इंदौर विजयनगर पुलिस ने ड्रग तस्कर को पकड़ा, 5 स्टार होटल में रखा, 5 लाख वसूलकर छोड़ा
इंदौर के बड़े और क्रीम थानों से लगातार प्रताड़ित करने की शिकायतें आ रही हैं। हाल ही में लसूडिया थाने के पांच पुलिसकर्मियों पर वारंट तामीली में गलत तरीके से घर में घुसने और 22.50 तोला सोना लेने के आरोप लगे थे। इन्हें निलंबित कर जांच बिठाई गई। भागीरथपुरा चौकी में एक व्यक्ति की मौत हुई। अब विजयनगर पुलिस का एक पुराना कांड सामने आया है।
ड्रग तस्कर को लेकर आए, थाने की जगह होटल ले गए
यह घटना नवंबर 2024 की है। इसमें फिर से जांच के लिए पत्र चलने पर मामला और पुरानी जांच सामने आई है। इस मामले में शिकायत पर एसीपी (आईपीएस आदित्य पटेल) से जांच कराई गई थी।
विजय नगर टीआई सीपी पटेल ने एक सूचना मिलने के बाद सहायक उपनिरीक्षक भूपेंद्र सिंह गुर्जर, हेड कांस्टेबल मुकेश सिंह जादौन, कांस्टेबल कपिल सोनानिया और कांस्टेबल राधेश्याम राठौर को आगर मालवा के बड़ौद में तस्कर वसीम, पिता राजू खान को पकड़ने के लिए रवाना किया।
होटल में रखा और मारा, 5 लाख वसूले
पुलिसकर्मी वहां से उसे 22 नवंबर 2024 को उठाकर इंदौर ले आए थे। वहीं, थाने नहीं ले जाकर थाने के पास एक 5 स्टार होटल में रखा था। टीआई से टीम ने बोल दिया कि तस्कर नहीं मिला।
वसीम ने जांच के दौरान बयान दिया कि होटल में पुलिसकर्मियों ने उसे मारा था। फिर साथी आरिफ को पकड़वाने के लिए कहा। उसे पकड़वा दिया तो फिर मुझे एक बलेनो कार में ले जाकर छोड़ दिया गया था। मेरे चाचा भी मेरे साथ थे। बलेनो में बैठने वाले ने चाचा से पांच लाख रुपए लिए थे।
दूसरे तस्कर को भी पकड़ा और यही किया
वसीम के जरिए ही एक अन्य तस्कर आरिफ भूरा को पुलिस ने पकड़ा था। इसके लिए वसीम से ही फोन करके उसे मिलने बुलवाया और जब वह इंदौर आया तो पकड़ लिया। उसे भी होटल ले गए और राशि वसूली। आरिफ ने भी पुलिस को बयान दिया है। इसमें वसीम की बात की पुष्टि होती है।
जांच में एसीपी ने यह लिखा
एसीपी पटले ने जांच रिपोर्ट में लिखा है कि संदिग्धों को बिना किसी वैधानिक कार्रवाई के छोड़ना और उनसे लाभ प्राप्त करना प्रमाणित हुआ है। टीआई चंद्रकांत पटेल का अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं था। चारों पुलिसकर्मी आरोपी को पकड़ने के लिए बाहर गए थे।
लेकिन रिपोर्ट पर कुछ नहीं हुआ
एसीपी ने मामले की रिपोर्ट डीसीपी को सौंप दी थी। रिपोर्ट फिर सीपी तक गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसके बाद फिर अभी इसमें नए एसएसपी द्वारा पत्राचार किया गया, जिसके बाद मामला फिर सामने आया।
इस मामले में तत्कालीन एसीपी, जो वर्तमान में छतरपुर एडिशनल एसपी हैं, और तत्कालीन डीसीपी कुमार प्रतीक, जो अब डीआईजी नारकोटिक्स हैं, ने केस को लेकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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