रंगों से नहाई इंदौर की सड़कें, राजवाड़ा पर उतरी ऐतिहासिक पारंपरिक गेर
इंदौर में रंगपंचमी का उत्सव आज पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है। यहां 77 साल पुरानी पारंपरिक गेर ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। राजवाड़ा और टोरी कॉर्नर जैसे इलाकों में हजारों लोग रंगों और भाईचारे के संगम में डूबे नजर आए। ढोल-नगाड़ों की गूंज और आसमान में उड़ते गुलाल के बीच पूरा शहर उत्सव के रंग में सराबोर हो गया।
इंदौर की पहचान बन चुकी यह पारंपरिक गेर करीब सात दशकों से लगातार निकाली जा रही है। इस बार भी विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं ने अपने-अपने बैनर तले भव्य गेर निकालकर इस ऐतिहासिक विरासत को जीवंत किया।
इस साल (2026) इंदौर नगर निगम की टैंक गेर विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसपर ऑपरेशन सिंदूर लिखा गया था। यह गेर राजवाड़ा से शुरू होकर सीतलामाता बाजार होते हुए अपने निर्धारित मार्ग से गुजरी।
इंदौर की गेर में आस्था के रंग भी देखने को मिले। यहां हिंद रक्षक संगठन की यात्रा में महाकाल मंदिर की प्रतिकृति दिखाई दी। वहीं संगम कॉर्नर की गेर में भगवान शिव की जटाओं से गंगा अवतरण का मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किया गया।
दोपहर तक शहर की सड़कों पर टैंकरों और विशेष मशीनों से लाल, गुलाबी और नीले रंगों की बौछार की गई। रंगों की इस बारिश ने न केवल सड़कों को बल्कि पूरे आसमान को भी सतरंगी बना दिया।
स्मार्ट सिटी कंपनी ने दर्शकों के लिए गौराकुंड के पास ऊंची इमारतों की छतों पर बैठने की विशेष व्यवस्था की। यहां तिरपाल, पानी और अन्य सुविधाओं के साथ सुरक्षित तरीके से गेर देखने का आनंद दिया गया।
इंदौर की रंगपंचमी गेर देखने के लिए सीटों की बुकिंग बुक माय शो के जरिए की गई थी। इसकी 150 में से अधिकांश सीटें बुक हो चुकी थीं। पिछले साल की तरह इस बार भी कई एनआरआई खास तौर पर इस नजारे को देखने इंदौर पहुंचे।