राऊ में पट्टे की जमीन के नामांतरण में उलझीं तहसीलदार, कलेक्टर ने जांच शुरू कराई

Sanjay Gupta | Mar 21, 2026, 16:44 IST
Photograph: (THESOOTR)
INDORE. इंदौर के राऊ में एक सरकारी पट्टे की जमीन के नामांतरण में तहसीलदार याचना दीक्षित उलझ गई है। इस मामले में अब कलेक्टर शिवम वर्मा ने जांच शुरू कराते हुए जमीन पर पूरा रिकार्ड तलब किया है।

इंदौर की राऊ तहसील में पूर्व में सरकारी पट्टे पर दी गई जमीन के नामांतरण को लेकर तहसीलदार याचना दीक्षित उलझ गई है। यह जमीन मप्र शासन, प्रशासन द्वारा कुछ लोगों को पट्टे पर दी गई थी। बाद में इसमें तत्कालीन अपर कलेक्टर द्वारा 1991 में इसे बेचने की मंजूरी दी गई। इसके बाद जमीन बिक गई।



साल 2021 में भी इस जमीन के नामांतरण का मुद्दा उठा तब तत्कालीन एसडीएम प्रतुल सिन्हा ने इसे मीसल बंदोबस्त सरकारी रिकार्ड में सरकारी बताते हुए खारिज कर दिया था। साथ ही आवेदकों द्वारा अपर कलेक्टर द्वारा जमीन बेचने संबंधी 1991 के आदेश की मूल कापी नहीं पेश करते हुए केवल फोटोकापी दी थी। इन सभी कारणों का हवाला देकर आवेदन निरस्त हो गया था।



करोड़ों की कीमत की है जमीन

यह जमीन सर्वे नंबर 158 की 4.75 एकड़ है। इसे 1968 में शासन द्वारा पट्टे पर भूतपूर्व सैनिक दिवान सिंह को दिया गया। फिर 1991 में तत्कालीन अपर कलेक्टर ने बेचने की मंजूरी दे दी।



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बाद में जमीन निजी हुई

इसके बाद इस जमीन के नामांतरण हो गए और 14 लोगों के नाम हुई। इसमें मुरलीधर, मंशाराम, प्रह्लाद, कुंदनदास, दिलीप बुधानी, सोनी बुधनी, विजय मोटवानी, ज्ञानचंद, पंकज कुमार, जितेंद्र कुमार, जयपालदास, शंकरलाल पंजवानी, ओमप्रकाश, अनिल थे।



बाद में कुछ लोगों ने फर्म एसके इंटरप्राइजेज बना ली। इसमें कुछ पार्टनर भी बदल गए। कुछ लोगों ने अपना हिस्सा बेचा और फिर जमीन नामांतरण के लिए आवेदन लगाया। इस जमीन में अभी अन्य भागीदारों में सरला खेमलानी, अमरलाल, सतीश चुघ, वीणा चुघ, चंद्रकुमार चुघ है।



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पहले तहसीलदार ने खारिज कर दिया

इस सर्वे नंबर को लेकर नामांतरण मामले तहसीलदार कोर्ट में लगी। पहले इसे खारिज कर दिया गया, क्योंकि पटवारी की रिपोर्ट थी कि जमीन मिसल बंदोबस्त में सरकारी है। इसके बाद इसमें आवेदक ने 35(3) के तहत आवेदन लगाया कि उनका पक्ष सुना नहीं गया।



साथ ही बताया कि अपर कलेक्टर कोर्ट से पहले 1991 में ही बेचने की मंजूरी हो चुकी है और जमीन के पूर्व में भी नामांतरण हो चुके हैं। इसमें राजस्व रिकार्ड में आए अन्य नामों को भी तहसीलदार कोर्ट में बुलाया गया और बयान हुए।



इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने जमीन नामांतरण के आदेश कर दिए। लेकिन इसके बाद इसमें विवाद हुआ और कलेक्टर इंदौर शिवम वर्मा के पास शिकायत पहुंची। इसके बाद इसमें जमीन की पूरी रिपोर्ट कलेक्टर ने तलब की है।



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तहसीलदार ने यह कहा

तहसीलदार दीक्षित का इस मामले में कहना है कि पहले आवेदन खारिज किया, फिर उन्होंने आवेदन लगाया कि हमारा पक्ष नहीं सुना गया। इसमें पूर्व में ही अपर कलेक्टर का आदेश है और जमीन बिक्री की मंजूरी है। इसके बाद जमीन 14 लोगों के नाम भी चढ़ी और पूर्व में बिक्री और नामांतरण हुए हैं।



सभी के बयान और अपर कलेक्टर आदेश की कापी देखने के बाद ही इसमें नामांतरण की मंजूरी दी। बाद में एसडीएम कोर्ट का 2021 का आदेश संज्ञान में आया, जिस पर नामांतरण आदेश को रिव्यू के लिए अपर कलेक्टर को लिखा है। मेरे आदेश में सभी बातों को विस्तृत लिखा गया है।



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आबकारी अधिकारी दीक्षित की बहन है याचना

याचना दीक्षित देवास की तत्कालीन प्रभारी सहायक आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित की बहन है। हाल ही में मंदाकिनी पर एक शराब ठेकेदार ने रिश्वत के आरोप लगाते हुए सुसाइड कर लिया था। इसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। इस मामले में जांच चल रही है और हाईकोर्ट में भी केस लगे हुए हैं।





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