इंदौर यशवंत क्लब के बाहर नगर निगम ने ढोल बजवा करवा दी मुनादी, 2.64 करोड़ संपत्ति कर बकाया

Sanjay Gupta | Mar 14, 2026, 17:13 IST
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इंदौर के प्रतिष्ठित और राजा-रजवाड़ों द्वारा स्थापित यशवंत क्लब की भद पिट गई है। नगर निगम ने संपत्तिकर बकाया को लेकर ढोल बजवाकर मुनादी करा दी।

INDORE. इंदौर और मध्यप्रदेश के सबसे बड़े क्लब में पहचान रखने वाले यशवंत क्लब की बुरी तरह भद पिट गई है। इंदौर नगर निगम ने क्लब के बाहर वसूली अधिकारियों को भेजा और बाहर जमकर ढोल बजवाकर मुनादी करा दी। साथ ही क्लब की दीवार पर संपत्तिकर को लेकर नोटिस भी चस्पा करा दिया।



निगम की टीम के साथ ढोल लेकर मुनादी वाला आया और वहां एक मिनट तक ढोल बजाया गया। साथ ही वसूली अधिकारियों ने घोषणा करते हुए कहा कि क्लब पर संपत्ति कर बकाया है। वह जल्द भर दें नहीं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर क्लब के जून 2026 में चुनाव होना है, इसके पहले इसे बड़ा झटका माना जा रहा है। क्लब पर 2 करोड़ 64 लाख संपत्ति कर बकाया है।



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वर्तमान मैनेजिंग कमेटी की कार्यशैली पर उठे सवाल

वहीं इस कदम से वर्तमान मैनेजिंग कमेटी की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम और क्लब के बीच में संपत्तिकर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। बीच में क्लब की नपती भी हुई थी। मामला कोर्ट में भी गया। लेकिन इसके बाद भी मामला नहीं सुलझा। उधर वित्तीय साल 2025-26 के खत्म होने से पहले 31 मार्च के पूर्व वसूली को लेकर निगम ने सख्ती शुरू कर दी है। इसी के तहत बड़े बकायादारों के यहां तकाजा किया जा रहा है। इसके बाद भी नहीं जमा करने पर कुर्की की जाएगी।



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क्या है क्लब और निगम का संपत्तिकर विवाद

यशवंत क्लब की साल 2020 में नपती हो गई थी, जिसके बाद इंदौर नगर निगम ने नए सिरे से टैक्स की गणना की और नई डिमांड जारी की। इस डिमांड के खिलाफ क्लब ने याचिका (19108/2020) दायर की। इसमें 2022 में अंतरिम आदेश हुआ कि 30 फीसदी टैक्स क्लब द्वारा भर दिया जाए और बाकी याचिका चलती रहेगी। तब क्लब पर करीब 68 लाख रुपए का टैक्स था। इसके बाद क्लब ने संपत्ति कर भरना बंद कर दिया।



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फिर नए भवन में आई अड़चन तो नया विवाद

इसके बाद क्लब ने शांति पकड़ ली। हाल ही में क्लब ने 100 नए सदस्य बनाकर उनसे 25 करोड़ की राशि जमा कर क्लब में नए विकास, भवन की योजना बनाई। इसमें नक्शा मंजूरी के लिए आवेदन किया तो निगम के पोर्टल ने टैक्स बकाया होने पर यह आवेदन लिया ही नहीं। पोर्टल में नियम है कि जब तक निगम के पूरे टैक्स जमा नहीं होंगे पोर्टल एक्सेस ही नहीं देगा।



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इसके बाद एक के बाद एक याचिकाएं

इसके बाद क्लब ने भवन मंजूरी के लिए साल 2025 में रिट पिटीशन (32538/25) दाखिल की। हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में इसमें निगम को भवन नक्शा पास करने के आदेश दिए। लेकिन प्रापर्टी टैक्स बकाया होने की बात कहते हुए निगम ने इसमें रिट अपील ( 86/2026) दाखिल की, लेकिन 7 जनवरी को यह याचिका खारिज हो गई।



इसमें निगम ने कहा कि क्लब स्टे के बाद से ही टैक्स नहीं भर रहा है। लेकिन याचिका खारिज हो गई। वहीं क्लब ने हाईकोर्ट सिंगल बेंच के आदेश के बाद भी नक्शा पास नहीं होने पर अवमानना याचिका (735/26) दायर कर दी। इसमें 3 फरवरी को आदेश हुआ कि 30 दिन में सिंगल बेंच के आदेश का पालन किया जाए।



अब निगम ने जल्द सुनवाई के लिए लगाया आवेदन

वहीं अब इस आदेश के बाद नगर निगम ने भी क्लब से अपने बकाया प्रापर्टी टैक्स वसूली के लिए साल 2020 से चल रही याचिका में आवेदन लगाया है। नगर निगम ने मांग की है कि स्टे के बाद से ही क्लब ने प्रापर्टी टैक्स बकाया नहीं दिया है जो अब बढ़कर 2 करोड़ 64 लाख रुपए हो चुका है। आवेदन में बकाया टैक्स की मांग की गई है।



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