इंदौर यशवंत क्लब पर दो करोड़ का टैक्स बाकी, चुनाव के पहले भवन मंजूरी की कोशिश, उलझा नगर निगम

इंदौर के प्रतिष्ठित यशवंत क्लब और नगर निगम के बीच दो करोड़ के बकाया संपत्ति कर को लेकर विवाद गहरा गया है। आगामी चुनाव के मद्देनजर क्लब भवन निर्माण की अनुमति चाहता है, जबकि निगम कर वसूली पर अड़ा है।

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Sanjay Gupta
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INDORE. इंदौर और मध्यप्रदेश के सबसे बड़े क्लब में पहचान रखने वाले यशवंत क्लब का नगर निगम से विवाद गहराता जा रहा है। क्लब पर निगम का दो करोड़ से ज्यादा का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। इसके बावजूद, लगातार याचिकाएं लगाकर वह भवन मंजूरी पाने में जुटा हुआ है। यह सारी कवायद जून 2026 में होने वाले चुनाव से जुड़ी है। वहीं इसमें नगर निगम उलझ गया है।

क्या है क्लब और निगम का संपत्तिकर विवाद?

यशवंत क्लब की साल 2020 में नपती हो गई थी। इसके बाद इंदौर नगर निगम ने नए सिरे से टैक्स की गणना की और नई डिमांड जारी की थी। इस डिमांड के खिलाफ क्लब ने याचिका (19108/2020) दायर की थी।

इसमें 2022 में अंतरिम आदेश हुआ कि 30 प्रतिशत टैक्स क्लब के जरिए भर दिया जाए और बाकी याचिका चलती रहेगी। तब क्लब पर करीब 68 लाख रुपए का टैक्स था। इसके बाद क्लब ने संपत्ति कर भरना बंद कर दिया था।

अब नए भवन में आई अड़चन तो नया विवाद

इसके बाद क्लब ने शांति पकड़ ली। हाल ही में क्लब ने 100 नए सदस्य बनाकर उनसे 25 करोड़ की राशि जमा कर क्लब में नए विकास, भवन की योजना बनाई। इसमें नक्शा मंजूरी के लिए आवेदन किया तो निगम के पोर्टल ने टैक्स बकाया होने पर यह आवेदन लिया ही नहीं।

पोर्टल में नियम है कि जब तक निगम के पूरे टैक्स जमा नहीं होंगे, पोर्टल एक्सेस ही नहीं देगा। इसी तरह का केस जुपिटर अस्पताल का हुआ था। इसमें भी शासन और निगम ने मंजूरी नहीं दी थी।

इसके बाद एक के बाद एक याचिकाएं

इसके बाद क्लब ने भवन मंजूरी के लिए साल 2025 में रिट पिटीशन (32538/25) दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में इसमें निगम को भवन नक्शा पास करने के आदेश दिए थे। वहीं, प्रॉपर्टी टैक्स बकाया होने की बात कहते हुए निगम ने इसमें रिट अपील (86/2026) दाखिल की थी। लेकिन 7 जनवरी को यह याचिका खारिज हो गई थी।

इसमें निगम ने कहा कि क्लब स्टे के बाद से ही टैक्स नहीं भर रहा है। लेकिन याचिका खारिज हो गई थी। वहीं क्लब ने हाईकोर्ट सिंगल बेंच के आदेश के बाद भी नक्शा पास नहीं होने पर अवमानना याचिका (735/26) दायर कर दी थी। इसमें 3 फरवरी को आदेश हुआ कि 30 दिन में सिंगल बेंच के आदेश का पालन किया जाए।

अब निगम ने जल्द सुनवाई के लिए लगाया आवेदन

वहीं अब इस आदेश के बाद नगर निगम ने भी क्लब से अपने बकाया प्रॉपर्टी टैक्स वसूली के लिए साल 2020 से चल रही याचिका में आवेदन लगाया है। नगर निगम ने मांग की है कि स्टे के बाद से ही क्लब ने प्रॉपर्टी टैक्स बकाया नहीं दिया है। यह अब बढ़कर दो करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है।

आवेदन में बकाया टैक्स की मांग की गई है। उधर क्लब के नए भवन की मंजूरी का फैसला भी निगम को अवमानना याचिका के आदेश के तहत 30 दिन में करना है।

क्लब चुनाव के पहले श्रेय की राजनीति

दरअसल क्लब में जून 2026 में मैनेजिंग कमेटी के चुनाव हैं। इसी के चलते ही पहले चार साल में 25-25 करके बनाए जाने वाले 100 नए सदस्यों को काम दो साल में ही पूरा कर लिया गया, जिससे चुनाव में वोट का फायदा हो।

वहीं अब नई सदस्यता से मिली राशि से जल्द से जल्द नए भवन के निर्माण काम की आधारशिला रखने की जद्दोजहद जारी है, जिससे इसका लाभ जून में होने वाले चुनाव में उठाया जा सके।

इसके चलते क्लब इसमें लगातार एक के बाद एक याचिकाएं दायर कर रहा है। यानी तय है कि एक माह में भवन की मंजूरी निगम ने नहीं दी तो फिर क्लब नई अवमानना याचिका दायर कर देगा जो निगम की मुश्किलें बढ़ाएगा।

वहीं इसी के चलते निगम ने भी पुरानी याचिका में प्रॉपर्टी टैक्स वसूली पर लगे स्टे को हटाने की कोशिश तेज कर दी है।

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