The Sootr की खबर का असर : पहले ही बता दिया था Integrated Township Policy ला रही सरकार
भोपाल। मध्य प्रदेश में 'द सूत्र' की खबर ने एक बार फिर सही साबित होकर बड़ा असर दिखाया है। जिस नीति की चर्चा हमने पहले ही की थी, उसे सरकार ने आखिरकार मंजूरी दे दी है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी को हरी झंडी दे दी, जिससे प्रदेश में निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और किफायती आवास की राह आसान होगी।
क्या है इस नीति की खास बातें?
नई इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी के तहत, प्रदेश के पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में टाउनशिप विकसित करने के लिए कम से कम 20 हेक्टेयर जमीन होना अनिवार्य होगा, जबकि छोटे शहरों के लिए यह सीमा 10 हेक्टेयर होगी। इसके अलावा, टाउनशिप में कम से कम 5% हरित क्षेत्र सुनिश्चित करना होगा और 20% भूमि व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आरक्षित होगी।
सड़क चौड़ाई और ग्रीन एरिया पर भी नजर
नई टाउनशिप नीति में डेवलपर्स को सड़क की चौड़ाई और ग्रीन एरिया के संबंध में भी सख्त नियमों का पालन करना होगा। 40 हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र में बनने वाली टाउनशिप के लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 30 मीटर होनी चाहिए, जबकि छोटे टाउनशिप के लिए यह सीमा 24 मीटर तय की गई है। इसके अलावा, टाउनशिप में कम से कम 5% ग्रीन एरिया रखना अनिवार्य होगा। यदि कोई डेवलपर इससे अधिक हरित क्षेत्र विकसित करता है, तो उसे एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) में छूट दी जाएगी।
टाउनशिप विकास के लिए बनाए गए पांच वित्तीय स्लैब
1. 10 से 20 हेक्टेयर तक की टाउनशिप के लिए 5 करोड़ नेटवर्थ और 6 करोड़ सालाना टर्नओवर अनिवार्य होगा।
2. 20 से 40 हेक्टेयर तक के लिए 10 करोड़ नेटवर्थ और 12 करोड़ का टर्नओवर होना चाहिए।
3. 40 से 100 हेक्टेयर तक की टाउनशिप के लिए 20 करोड़ नेटवर्थ और 20 करोड़ का टर्नओवर आवश्यक होगा।
4. 100 से 300 हेक्टेयर तक की टाउनशिप के लिए 50 करोड़ नेटवर्थ और 40 करोड़ सालाना टर्नओवर होना जरूरी होगा।
5. 300 हेक्टेयर से अधिक की टाउनशिप के लिए 250 करोड़ नेटवर्थ और 200 करोड़ का सालाना टर्नओवर अनिवार्य होगा।
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