भाजपा नेता के बालिका गृह से 3 साल में 5 नाबालिग गायब, अब दर्ज हुई अपहरण की FIR

Amresh Kushwaha | Jul 18, 2026, 15:45 IST
भाजपा नेता की संस्था से 5 नाबालिग लापता
इटारसी के एक बालिका गृह से तीन साल में पांच नाबालिग लड़कियां लापता हुई हैं। संस्था भाजपा नेता मनीष ठाकुर चलाते हैं। वहीं, अब देरी से FIR दर्ज होने पर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही, SP ने जांच के आदेश दिए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • इटारसी के एक बालिका गृह से तीन साल में पांच नाबालिग लापता हुईं।
  • यह बालिका गृह भाजपा नेता मनीष ठाकुर चलाते हैं।
  • शुक्रवार रात पुलिस ने पांच अलग-अलग एफआईआर दर्ज कीं।
  • एफआईआर दर्ज करने में एक से दो साल की देरी हुई।
  • एसपी ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

नर्मदापुरम जिले के इटारसी से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक बालिका गृह से तीन साल में पांच नाबालिग लड़कियां लापता हुई हैं। बालिका गृह का मतलब है लड़कियों के लिए बना आश्रय स्थल। यह बालिका गृह भाजपा नेता मनीष ठाकुर चलाते हैं।



शुक्रवार, 17 जुलाई की रात इटारसी थाने में पांच अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें गुमशुदगी और अपहरण दोनों की धाराएं शामिल हैं। मामला सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी पर सवाल उठ रहे हैं।



कब-कब हुईं लड़कियां लापता

इस मामले में लंबे समय से घटनाएं होती रही हैं। सबसे पहली घटना 10 जुलाई 2024 की है। उस दिन 17 साल की एक नाबालिग लड़की लापता हुई थी। इसके बाद 25 दिसंबर 2025 को एक साथ तीन नाबालिग लड़कियां गायब हुईं। इनमें से दो की उम्र 16 साल और एक की उम्र 17 साल थी। सबसे हालिया घटना 14 जून 2026 की है। इस दिन 13 साल की एक बच्ची लापता हुई थी। इन सभी मामलों में एफआईआर 17 जुलाई को दर्ज हुई है।



देरी से एफआईआर पर उठे सवाल

कानूनी प्रावधानों के मुताबिक नियम साफ हैं। नाबालिग के लापता होने की सूचना मिलते ही कार्रवाई जरूरी होती है। पुलिस को तुरंत मामला दर्ज करना होता है। वहीं, इस मामले में एक से दो साल बाद एफआईआर दर्ज हुई है। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संस्था की केयर टेकर रानी सिंह राजपूत ने पुलिस को आवेदन दिया था। इसमें बताया गया कि अलग-अलग समय पर लड़कियां गायब हुई हैं।



संस्था संचालक कौन हैं

बालिका गृह का संचालन मनीष ठाकुर करते हैं। वे भाजपा से जुड़े नेता हैं। उनकी पत्नी नगर पालिका में सभापति के पद पर हैं। एक और चौंकाने वाली बात भी सामने आई है। मनीष ठाकुर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से भी नियुक्त हैं। वे पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) से जुड़े मामलों में सपोर्ट पर्सन हैं। पॉक्सो का मतलब है प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट। इस भूमिका में उनका काम नाबालिग पीड़ितों की मदद करना है। लेकिन उनकी अपनी संस्था से ही बच्चियां सुरक्षित नहीं रह सकीं।



संस्था का क्या कहना है

मनीष ठाकुर ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि हर घटना की सूचना पुलिस को समय पर दी गई। उनके मुताबिक इसके बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में कलेक्टर, एसपी और बाल कल्याण समिति शामिल थे। मनीष ठाकुर के अनुसार इसी बैठक में मुद्दा उठाया गया। इसके बाद ही केस दर्ज करने के निर्देश दिए गए।



6015059d-003


थाना प्रभारी का अलग बयान

पुलिस की तरफ से भी इस मामले पर बयान आया है। इटारसी थाना प्रभारी सौरभ पांडे ने अपनी बात रखी। उनका कहना है कि उन्होंने करीब एक महीने पहले ही थाना जॉइन किया है। उनके मुताबिक मिसिंग की शिकायत शुक्रवार रात मिली थी। शिकायत मिलते ही तत्काल एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने कहा कि पहले शिकायत मिली थी या नहीं, यह उन्हें नहीं पता। इस तरह संस्था और पुलिस के बयानों में साफ अंतर है।



एसपी ने दिए जांच के आदेश

इस पूरे मामले में नर्मदापुरम एसपी ने भी सख्त रुख अपनाया है। एसपी सांई कृष्णा एस थोटा ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि बच्चियों के गायब होने पर एफआईआर तुरंत होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एफआईआर में देरी क्यों हुई। एसपी के अनुसार यह भी जांचा जाएगा कि देरी कहां हुई। यह देरी पुलिस स्तर पर हुई या संस्था स्तर पर, यह साफ होगा। उन्होंने इस मामले की जांच इटारसी एसडीओपी को सौंपी है। एसपी ने साफ कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।



आगे क्या होगा

फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है। एसडीओपी स्तर की जांच में देरी की असली वजह सामने आएगी। पुलिस अब सभी पांच मामलों की अलग-अलग जांच कर रही है। बाल कल्याण समिति की भूमिका पर भी नजर रहेगी। नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में देरी हल्के में नहीं ली जा सकती। समय पर एफआईआर दर्ज होने से लापता बच्चों को ढूंढने में मदद मिलती है। इसलिए इस मामले में देरी को गंभीरता से देखा जा रहा है।



आने वाले दिनों में इस मामले में और जानकारी सामने आ सकती है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी गंभीरता से की जाएगी। स्थानीय लोग भी इस मामले पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। बाल संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आने वाले समय में इस दिशा में नियमों की समीक्षा भी हो सकती है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर बाल सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ी है। नाबालिगों की सुरक्षा हर संस्था और प्रशासन की जिम्मेदारी है। जब कोई बच्चा लापता होता है तो समय पर कार्रवाई उसकी जान बचा सकती है। इस मामले में एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी बेहद गंभीर विषय है।



यह खबर बिना किसी पक्ष को दोषी ठहराए, सभी पक्षों का बयान सामने रखती है। जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। बाल संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं की निगरानी व्यवस्था को समझना हर नागरिक के लिए जरूरी है। यह जानकारी संविधान और कानून के दायरे में निष्पक्ष रूप से दी गई है।



ये खबरें भी पढ़िए...



MP News. सरकारी नौकरी: ऑर्डनेंस फैक्ट्री इटारसी में 265 पदों पर सीधी भर्ती, करें आवेदन



इटारसी आमला तीसरी रेल लाइन का काम शुरु, 2500 करोड़ के प्रोजेक्ट से 4 टनल और 361 पुल बनेंगे



मध्यप्रदेश ऑर्डनेंस फैक्ट्री को बम से उड़ाने की धमकी: बढ़ाई गई सुरक्षा, बम स्क्वॉड भी तैनात



इटारसी-भोपाल के रास्ते चलेंगी स्पेशल ट्रेनें: कानपुर-मुंबई और हैदराबाद-अजमेर यात्रियों को मिलेगी सुविधा



Tags:
  • MP News
  • मध्यप्रदेश
  • बालिका गृह
  • भाजपा नेता
  • बाल कल्याण समिति
  • इटारसी