जबलपुर क्रूज हादसा: घंटों तक मौत से जूझती रही जिंदगियां

Neel Tiwari | May 01, 2026, 11:30 IST
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जबलपुर के बरगी डैम पर गुरुवार, 30 अप्रैल की शाम एक क्रूज डूब गया। अब तक 9 लोगों के शव मिले हैं और 23 को बचाया गया है। रियाज हुसैन 4 घंटे गर्दन तक पानी में फंसे रहे। एक बच्ची की नानी की मौत हुई और उसकी मां-भाई अभी लापता हैं।

News In Short

  • जबलपुर के बरगी डैम पर गुरुवार शाम पर्यटक क्रूज डूब गया।
  • अचानक मौसम बिगड़ा, तेज हवा और ऊंची लहरों से क्रूज पलट गया।
  • अब तक 9 लोगों के शव मिले हैं, 23 को सुरक्षित बचाया गया है।
  • 72 साल के रियाज हुसैन 4 घंटे गर्दन तक पानी में फंसे थे।
  • एक बच्ची की नानी की मौत हुई, मां और भाई अभी भी लापता हैं।

News In Detail

जबलपुर में क्रूज हादसे की दर्दनाक रात

मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम पर गुरुवार, 30 अप्रैल की शाम एक ऐसा हादसा हुआ जो कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गया। पर्यटकों से भरा एक क्रूज नर्मदा नदी के बैकवाटर में डूब गया। जानकारी के अनुसार, इस हादसे में कई लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, अब तक केवल 9 लोगों के ही शव बरामद हुए हैं और कई अभी भी लापता हैं। बचाव अभियान अभी जारी है।



क्रूज पर मौजूद लोगों ने बताया कि शाम करीब पांच बजे क्रूज बैकवाटर में पहुंचा था। तभी मौसम ने अचानक करवट ली। तेज हवाएं चलने लगीं और पानी में ऊंची लहरें उठने लगीं। कुछ ही पलों में क्रूज डगमगाने लगा और फिर उसमें पानी भरने लगा। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कोई लाइफ जैकेट ढूंढ रहा था, कोई अपने परिजनों को थाम रहा था।



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मां के सीने से लिपटा मिला मासूम

हादसे के बाद एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। शुक्रवार 01 मई की सुबह जब रेस्क्यू टीम पानी में लापता लोगों को तलाश रही थी। इस दौरान एक महिला और उसके चार साल के बेटे का शव साथ मिला। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त मां ने अपने बच्चे को एक ही लाइफ जैकेट में सीने से कसकर पकड़ रखा था, जैसे आखिरी सांस तक उसे बचाने की कोशिश कर रही हो।



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चार घंटे मौत से लड़ते रहे रियाज

72 साल के रियाज हुसैन उस क्रूज पर अपने परिवार के साथ सवार थे। जैसे ही क्रूज में पानी भरने लगा, उन्होंने खुद को संभाला। क्रूज का एक छोटा हिस्सा पानी से करीब दो फीट ऊपर था। रियाज ने वहीं खुद को टिका लिया। वहीं, कुछ ही मिनटों में पानी उनकी गर्दन तक आ गया।



रियाज बताते हैं कि चारों तरफ अंधेरा था। लहरों की भयावह आवाजें दिल दहला रही थीं। उस वक्त उन्हें लगने लगा था कि अब बचना मुश्किल है। उनके मन में सिर्फ एक ही ख्याल था, सब डूब रहे हैं, अब मैं भी डूब जाऊंगा। वहीं, उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।



करीब चार घंटे तक वह उसी हालत में डटे रहे। शरीर ठंड से कांप रहा था। तभी बाहर से आवाजें सुनाई दीं। रियाज ने पूरी ताकत से क्रूज की दीवारों पर हाथ मारे। रेस्क्यू टीम ने गैस कटर से क्रूज का ऊपरी हिस्सा काटा और उन्हें बाहर निकाला।



बचाव के बाद भी रियाज की आंखों में आंसू है। हादसे के बाद से उनकी पत्नी और समधन अब भी लापता हैं।



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बेटे का पहला जन्मदिन डरावने हादसे में बदल

जबलपुर के रोशन आनंद के लिए उनके बेटे का पहला जन्मदिन खुशियों भरा होना चाहिए था, लेकिन वो एक डरावने हादसे में बदल गया।



रोशन बताते हैं कि जैसे ही क्रूज अनियंत्रित हुआ, वहां मौजूद कर्मचारियों ने यात्रियों की मदद करने के बजाय खुद की जान बचाना ज्यादा जरूरी समझा और सीधे कूदकर भाग गए। हालत इतनी खराब थी कि यात्रियों को लाइफ जैकेट तक नहीं दी गई। बाद में लोगों ने खुद ही केबिन का कांच तोड़कर जैकेट निकाली।



करीब आधे घंटे तक लोग मौत और जिंदगी के बीच जूझते रहे थे। आसपास मौजूद दूसरे क्रूज से भी कोई मदद नहीं मिली। ऐसे में रोशन और बाकी यात्रियों ने हिम्मत दिखाई-डस्टबिन से पानी बाहर फेंकते रहे और किसी तरह हालात संभालकर अपनी जान बचाई।



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बच्ची की कांपती आवाज ने सबको रुला दिया

रेस्क्यू टीम की वैन में सहमी बैठी एक बच्ची ने पत्रकारों से जो कहा, वह सुनकर कलेजा मुंह को आ जाता है। कांपती आवाज में उसने बताया कि एकदम से क्रूज पलट गया था, पूरे क्रूज में बाढ़ आ गई और सब तितर-बितर हो गए। किसी तरह उसके पापा उसे मिले और उसने हाथ पकड़ लिया।



वहीं, उसकी मां और भाई अभी तक नहीं मिले हैं। उसके नानू तो मिल गए, लेकिन नानी की डेड बॉडी मिली है। यह बच्ची की जुबान से निकले शब्द थे जो उस रात की भयावहता को बयां करते हैं।



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रेस्क्यू में SDRF-NDRF जुटी

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, होमगार्ड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय नाविक भी बचाव में जुट गए। अब तक 23 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है और 9 शव बरामद हुए हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए गोताखोर और रेस्क्यू टीमें लगातार काम कर रही हैं।



कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मौसम अचानक बिगड़ा और चालक ने तुरंत क्रूज किनारे लगाने की कोशिश नहीं की। चश्मदीदों के मुताबिक क्रूज पहले से ही डगमगाने लगा था, फिर भी उसे नहीं रोका गया।



प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं जैसे कि क्रूज में यात्रियों की संख्या तय सीमा से ज्यादा तो नहीं थी, सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं और क्या खराब मौसम के बावजूद क्रूज को रवाना किया गया।



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