फर्जी बैंक खाते और नकली शेयर होल्डर, बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर कंपनी ने लगाया 39.67 लाख का चूना
समझें क्या है पूरा मामला...
- सीड प्रोड्यूसर कंपनी के 9 लोगों पर पाटन थाने में FIR दर्ज हुई।
- जांच में फर्जी बैंक खाता और नकली किसान सदस्य सूची सामने आई है।
- जाली नियुक्ति पत्रों के आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति का आरोप सामने आया।
- शासन को 39.67 लाख रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाने की बात जांच में उजागर हुई।
- कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच दल की रिपोर्ट के बाद एफआईआर दर्ज हुई।
शिकायत से शुरू हुई जांच, खुलती गई परतें
पाटन थाना क्षेत्र में दर्ज इस बहुचर्चित मामले की शुरुआत किसान मजदूर महासंघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ठाकुर की शिकायत से हुई। शिकायत में कहा गया कि बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड ने उपार्जन प्रक्रिया में गड़बड़ी कर राशि हासिल की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर जबलपुर ने विशेष जांच दल गठित किया। इस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
नियुक्तियों में मिला फर्जीवाड़ा
जांच दल ने पाया कि कंपनी में प्रबंधक, लेखाकार और कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां थीं। कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए जारी किए गए आदेशों पर अलग-अलग हस्ताक्षर पाए गए। साथ ही उनके समर्थन में कोई वैधानिक प्रस्ताव या अधिकृत अभिलेख उपलब्ध नहीं था।
जांच अधिकारियों ने इन दस्तावेजों को कूटरचित और संदिग्ध माना, जिसके आधार पर कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
नियमों को दरकिनार करने का आरोप
उपार्जन कार्य में भाग लेने के लिए निर्धारित वित्तीय पात्रता साबित करने हेतु कंपनी द्वारा एक बैंक खाता प्रस्तुत किया गया था। नियमों के अनुसार खाते में 50 लाख रुपए की राशि अथवा समकक्ष क्रेडिट लिमिट होना जरूरी था।
वेरिफिकेशन के दौरान सामने आया कि जिस ICICI बैंक खाते का विवरण प्रस्तुत किया गया, वह कंपनी के नाम पर था ही नहीं। जांच अधिकारियों ने इसे योजनाबद्ध तरीके से नियमों को धोखा देने का प्रयास माना है।
किसानों के नाम पर बनाई गई फर्जी सूची
जांच रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा कंपनी की शेयरधारक सूची को लेकर हुआ। सूची में दर्ज किसानों के नामों के साथ उनके पते, ग्राम, तहसील और शेयर संबंधी जानकारी अनुपस्थित पाई गई।
जब जांच दल ने सूची में दिए गए मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया तो कई लोगों ने स्वयं को कंपनी का सदस्य मानने से इनकार कर दिया। इससे यह आशंका और मजबूत हुई कि कंपनी ने पात्रता हासिल करने के लिए किसानों की कथित फर्जी सूची तैयार की थी।
39 लाख 67 हजार रुपए के भुगतान पर उठे सवाल
एमपी राज्य सहकारी विपणन संघ के अभिलेखों के अनुसार कंपनी को उपार्जन कार्य के एवज में प्रासंगिक व्यय, हैंडलिंग और कमीशन मद में भुगतान किया गया। राशि कुल 39 लाख 67 हजार 781 रुपए थी।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह राशि फर्जी दस्तावेजों और गलत जानकारी के आधार पर प्राप्त की गई। रिपोर्ट में इसे शासन को प्रत्यक्ष आर्थिक क्षति बताया गया है।
छह डायरेक्टर और तीन कर्मचारी बने आरोपी
पुलिस ने कंपनी के छह डायरेक्टरों तथा तीन कर्मचारियों को नामजद आरोपी बनाया है। आरोपियों में कंपनी के पदाधिकारी और संचालन से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि सभी ने मिलकर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उनका उपयोग करने और आर्थिक लाभ प्राप्त करने में भूमिका निभाई।
कृषि विभाग की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
मध्यप्रदेश किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सहायक संचालक रवि कुमार आम्रवंशी को FIR दर्ज कराने के लिए अधिकृत किया गया था। उनकी शिकायत के आधार पर पाटन पुलिस ने 2 जून 2026 की रात मामला दर्ज किया। पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और साझा आपराधिक मंशा से संबंधित धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।
अब पुलिस विवेचना पर टिकी निगाहें
FIR दर्ज होने के बाद पूरे मामले की विवेचना पाटन थाने के निरीक्षक गोपीन्द्र सिंह राजपूत को सौंपी गई है। पुलिस अब दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच, बैंकिंग रिकॉर्ड और भुगतान संबंधी अभिलेखों का परीक्षण करेगी।
मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि जांच दल की रिपोर्ट में कई ऐसे बिंदुओं का उल्लेख किया गया है जिनकी विस्तृत पड़ताल अभी बाकी है।
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