अफसरों की संपत्ति: ससुराल से मिली प्रॉपर्टी कैसे बना रही अफसरों को अमीर?
Sanjay Sharma | Jun 02, 2026, 17:31 IST
mp officers property relatives gad portal
मध्य प्रदेश के कई प्रशासनिक अधिकारियों को ससुराल और परिजनों से मिली अचल संपत्तियों का ब्यौरा सामने आया है। रजिस्टर्ड गिफ्ट व वसीयत में दर्ज जमीन एवं मकानों की कुल कीमत लाखों में है। इससे पारिवारिक उपहारों का पैटर्न उजागर होता है।
चाचा, ताऊ और ससुरजी से मिली संपत्ति बना रही एमपी के अफसरों को अमीर?
आयकर और संपत्ति नियमों के नजरिए से भले ही यह कोई करप्शन न हो,मगर साहबों पर हुई इस मेहरबानी पर सवाल तो उठते ही हैं… आज पढ़िए प्रशासनिक अफसरों के बारे में…
ससुरजी की मेहरबानी
नीलेश कुमार शर्मा: संयुक्त कलेक्टर - नर्मदापुरम
Joint Collector Nilesh Kumar Sharma
शर्मा को उनके ससुर से ही दूसरी अचल संपत्ति साल 2003 में रीवा के अनंतपुर में 1500वर्ग फीटके भूखंड के रूप में मिली थी। यह जमीन भी उनकी पत्नी अनामिका मिश्रा के नाम पर है,जिसकी वर्तमान कीमत 45 लाखरुपएअनुमानित है।
चाचाजी ने दे दी 6 बीघा जमीन
महेन्द्र सिंह सौजन्या: डिप्टी कलेक्टर - भिंड
सासुजी ने मकान गिफ्ट कर दिया
महेश कुमार बडोले: डिप्टी कलेक्टर - झाबुआ
Deputy Collector Mahesh Kumar Badole
दादा-नाना सब मेहरबान
राजीव रंजन पांडेय: अतिरिक्त कलेक्टर - होशंगाबाद
Additional Collector Rajiv Ranjan Pandey
ससुराल ने सौंपी 95 लाख की जमीन
डायरेक्टर राजेश राठौड़: एक्जीक्यूटिव - मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन
Director Rajesh Rathod
ससुर ने दे दी 35 लाख की जमीन
राहुल कुमार पटेल: डिप्टी कलेक्टर - छिंदवाड़ा
Deputy Collector Rahul Kumar Patel
चाचाजी ने दे दी एक करोड़ की जमीन
रूपेश कुमार उपाध्याय: अपर कलेक्टर - श्योपुर
Additional Collector Rupesh Kumar Upadhyay
इनमें एक संपत्ति 232.61 वर्ग मीटर के आवासीय भूखंड के रूप में ग्वालियर के अलापुर में है। इसकी कीमत 56 लाख रुपए है। जबकि दूसरी संपत्ति ग्वालियर के मुरार में भदरौली गांव में 0.615 हेक्टेयर कृषि भूमि के रूप में है। इसका वर्तमान मूल्य 95 लाख रुपए बताया गया है। यानी उपाध्याय को ससुराल पक्ष से एक करोड़ से ज्यादा कीमत की अचल संपत्तियां ससुराल से हासिल हुई हैं।
ससुराल से मिला 17 लाख का प्लॉट
लोचनलाल अहिरवार: अतिरिक्त कलेक्टर - रीवा
सास-ससुर ने भेंट की 45 लाख की जमीन
विनीत कुमार तिवारी: अतिरिक्त कलेक्टर - भोपाल
सास की मेहरबानी से 30 लाख की जमीन
शोभाराम सोलंकी: अतिरिक्त कलेक्टर - देवास
Additional Collector Shobharam Solanki
पापा-दादा ने भेंट की करोड़ों की जमीन
संजय कुमार जैन: संयुक्त कलेक्टर
पापाजी ने भेंट की 20 बीघा तो मम्मी ने मकान दे दिया
सपना अनुराग जैन: अपर कलेक्टर
Additional Collector Sapna Anurag Jain
वहीं उन्हें मां उर्मिला जैन की वसीयत से गुना में भवन प्राप्त हुआ है। वहीं ससुराल पक्ष यानी ताऊ ससुर से इंदौर में 50 लाख रुपए कीमत का भूखंड मिला है। यह उनके पति के नाम पर दर्ज है।
ससुरजी भेंट कर गए 12 लाख की जमीन
अंकुर मेश्राम: डिप्टी कलेक्टर- भोपाल
Deputy Collector Ankur Meshram
सास ने भेंट की 54 लाख की जमीन
कलावती बयारे: संयुक्त कलेक्टर - नरसिंहपुर
Joint Collector Kalawati Bayare
ससुराल मेहरबान तो मिली एक करोड़ की जमीन
डॉ. अभय सिंह खरारी- डिप्टी कलेक्टर- उज्जैन
Deputy Collector Dr Abhay Singh
डॉ. खरारी ने जीएडी को दिए संपत्ति के ब्यौरे में इसकी वर्तमान कीमत का उल्लेख नहीं किया है और न ही इससे होने वाली वार्षिक आय की जानकारी दी है। हालांकि धार की तिरला तहसील में फिलहाल कृषि भूमि का औसत भाव 5 लाख रुपए प्रति बीघा बताया जा रहा है। यानी अब डिप्टी कलेक्टर की जमीन एक करोड़ से कम की नहीं है।
अफसरों का ससुराली खेल: काली कमाई पर गिफ्ट का ठप्पा!
ज्यादातर मामलों में प्रशासनिक सेवा में आने के साथ ही ऐसी संपत्तियों का ब्योरा अधिकारी अपने नाम से दर्ज कराते हैं। जिससे बाद में बेनामी संपत्ति को अधिकृत दर्शाना आसान होता है। प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की संपत्ति की जांच के मानदंडों में बड़े बदलाव की जरूरत है ताकि बेनामी संपत्तियों को रिश्तेदारों का उपहार दर्शाने के खेल पर कसावट हो सके। (एमपी अफसर संपत्ति)
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FAQ
- क्या सरकारी अफसर रिश्तेदारों से संपत्ति गिफ्ट में ले सकते हैं?
सरकारी सेवा आचरण नियमों के तहत अफसरों को एक निश्चित सीमा से अधिक का उपहार लेने पर विभाग को सूचना देना अनिवार्य है। यदि संपत्ति का मूल्य तय सीमा से अधिक हो तो सरकारी अनुमति भी जरूरी होती है। GAD पोर्टल पर घोषणा इसी नियम के अंतर्गत की जाती है। - GAD पोर्टल क्या होता है और अफसरों की संपत्ति वहां क्यों दर्ज होती है?
GAD यानी General Administration Department का पोर्टल मध्यप्रदेश सरकार का वह प्लेटफॉर्म है जहां सरकारी अधिकारी अपनी चल-अचल संपत्ति की सालाना घोषणा करते हैं। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार रोकने का सरकारी तंत्र है। इसी डेटा के आधार पर thesootr ने यह पड़ताल की है।
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