10 लाख का बिल पास कराने मांग रहे थे घूस, EOW ने बिजली कंपनी के दो अफसरों पकड़ा

Neel Tiwari | Jun 29, 2026, 22:25 IST
Photograph: (THESOOTR)
JABALPUR. जबलपुर में EOW) ने मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अतिरिक्त मुख्य अभियंता और कार्यपालन यंत्री को 10 लाख रुपए के निर्माण कार्य का भुगतान कराने के एवज में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • 10 लाख रुपए का निर्माण भुगतान जारी करने के बदले मांगी जा रही थी रिश्वत।
  • अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने 30 हजार और कार्यपालन यंत्री ने 20 हजार रुपए की मांग की थी।
  • कार्यपालन यंत्री पहले ही 5 हजार रुपए रिश्वत ले चुका था।
  • EOW ने दूसरी किश्त लेते समय दोनों अधिकारियों को एक साथ रंगे हाथों पकड़ा।
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(ए) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू।

मध्यप्रदेश केजबलपुर में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बिजली विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के दो वरिष्ठ अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।



मामला ग्राम बचैया, तहसील बहोरीबंद, जिला कटनी में जूनियर इंजीनियर कार्यालय के निर्माण कार्य के लगभग 10 लाख रुपए के भुगतान से जुड़ा है। भुगतान जारी करने के बदले अधिकारियों द्वारा ठेकेदार से रिश्वत की मांग किए जाने की शिकायत EOW तक पहुंची थी।



शिकायत सही निकली, पहले भी ले चुके थे रिश्वत

गुप्तेश्वर निवासी अशोक कुमार द्विवेदी ने EOW जबलपुर को शिकायत देकर बताया था कि कार्यपालन यंत्री (सिविल) चंद्रशेखर मेहरा 20 हजार रुपये तथा अतिरिक्त मुख्य अभियंता (सिविल) प्रहलाद मर्सकोले 30 हजार रुपए रिश्वत मांग रहे हैं।



EOW ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें आरोप सही पाए गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर मेहरा शिकायतकर्ता से पहले ही 5 हजार रुपए रिश्वत के रूप में ले चुका था।



दूसरी किश्त लेते ही EOW ने दोनों को एक साथ दबोचा

रविवार 29 जून को EOW जबलपुर की ट्रैप टीम ने अधीक्षण अभियंता (सिविल) सर्किल, रामपुर स्थित बिजली कंपनी के कार्यालय में जाल बिछाया।



कार्रवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रहलाद मर्सकोले को 10 हजार रुपए तथा कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर मेहरा को 15 हजार रुपए की दूसरी किश्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। दोनों अधिकारियों की गिरफ्तारी से बिजली विभाग में हड़कंप मच गया और कार्यालय परिसर में देर तक कार्रवाई चलती रही।



भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला

EOW ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(ए) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है।



यह भी जांच की जा रही है कि क्या निर्माण कार्यों के भुगतान के नाम पर इस तरह की रिश्वतखोरी का कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। EOW ने संकेत दिए हैं कि मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी और आवश्यक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



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