जनगणना कर्मियों के ट्रांसफर पर HC सख्त: CS तक के आदेश दरकिनार करने पर सवाल, ट्रांसफर आदेश निरस्त
Neel Tiwari | Jun 29, 2026, 18:40 IST
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जनगणना 2027 ड्यूटी पर तैनात रीवा पटवारी प्रीति वर्मा के ट्रांसफर को MP हाईकोर्ट ने निरस्त किया। गृह सचिव और मुख्य सचिव के आदेशों के बावजूद तबादला हुआ था। जस्टिस विशाल धागत ने सख्त रुख अपनाया।
समझें क्या है पूरा मामला
- जनगणना ड्यूटी कर रहीं रीवा की पटवारी प्रीति वर्मा का ट्रांसफर हाईकोर्ट ने निरस्त किया।
- कोर्ट ने कहा कि जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों का ट्रांसफर सरकारी निर्देशों के विपरीत नहीं हो सकता।
- भारत सरकार के गृह सचिव ने 31 मार्च 2027 तक ऐसे कर्मचारियों के ट्रांसफर पर रोक के निर्देश दिए थे।
- मध्य प्रदेश शासन के गृह विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग ने भी इसी आशय के आदेश जारी किए थे।
- जस्टिस विशाल धगत की एकलपीठ ने सुनवाई में सरकारी आदेशों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाया।
जनगणना के बीच ट्रांसफर बना हाईकोर्ट की सख्ती का कारण
तब उनके विपरीत आदेश जारी करना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अदालत ने संबंधित ट्रांसफर आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की।
गृह सचिव से मुख्य सचिव तक जारी हुए थे स्पष्ट निर्देश
इसके बाद मध्य प्रदेश शासन के गृह (सामान्य) विभाग ने 9 अप्रैल 2026 को संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए कि जिला और तहसील स्तर पर जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों का कार्य पूर्ण होने तक यथासंभव तबादला न किया जाए। इसी निर्देश को आगे बढ़ाते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने 17 अप्रैल 2026 को सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को भी समान आदेश जारी कर दिए थे।
फिर भी हुए तबादले, कोर्ट ने जताई हैरानी
सुनवाई के दौरान जब न्यायालय के सामने यह तथ्य आया कि गृह सचिव से लेकर राज्य सरकार के उच्चतम स्तर तक ट्रांसफर रोकने के निर्देश पहले से प्रभावी हैं, तब न्यायालय ने इस स्थिति पर आश्चर्य व्यक्त किया और ट्रांसफर आदेश को निरस्त कर दिया।
जस्टिस विशाल धागत की अदालत ने दिया स्पष्ट संदेश
अदालत का यह आदेश भविष्य में ऐसे मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संदेश गया है कि जनगणना जैसे संवेदनशील कार्यों में लगे कर्मचारियों को अनावश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप से बचाना शासन की जिम्मेदारी है।
ट्रांसफर नीति पर भी उठ रहे बड़े सवाल
अंततः हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा, तो यह मामला केवल एक कर्मचारी के ट्रांसफर तक सीमित नहीं रह गया है। प्रशासनिक जवाबदेही, सरकारी आदेशों के पालन और जनगणना जैसे राष्ट्रीय अभियान को लेकर अधिकारियों की सजगता पर भी नए सवाल खड़े हो गए हैं।
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