जबलपुर कलेक्टर को हाईकोर्ट की चेतावनी, 2 साल से नहीं दिया जवाब, OIC पर 10 हजार जुर्माना
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मुन्नालाल पटेल की जमीन का विवाद सीलिंग कानून से जुड़ा है।
- मामला 1990 से अलग-अलग अदालतों में चलता आ रहा है।
- जबलपुर हाई कोर्ट में दो साल से सरकार का जवाब नहीं आया।
- पांच सुनवाई के बाद OIC पर 10 हजार रु की कॉस्ट लगी।
- जवाब नहीं आया तो कलेक्टर जबलपुर को खुद आना होगा।
जबलपुर में सीलिंग भूमि का एक पुराना विवाद हाई कोर्ट पहुंचा है। इस मामले में सरकार की ओर से जवाब लंबित है। दो साल में इस मामले की पांच सुनवाई हो चुकी हैं। हर बार जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया। अब हाई कोर्ट ने इस देरी पर सख्त रुख अपनाया।
जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने OIC पर व्यक्ति भगत 10 हज़ार रु का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने जवाब के लिए एक सप्ताह का अंतिम मौका दिया। यह मौका ही 10 हजार रु की कॉस्ट के साथ दिया गया। खास बात यह है कि कॉस्ट सरकार पर नहीं लगी है। यह राशि OIC यानी Officer In Charge से वसूली जाएगी। इसके साथ ही जबलपुर कलेक्टर को चेतावनी दी गई है कि यदि अब जवाब नहीं आया तो कलेक्टर को खुद कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।
सरकार नहीं, OIC को भरनी होगी 10 हजार की कॉस्ट
याचिकाकर्ता मुन्नालाल पटेल की ओर से पक्ष रखा गया। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट के सामने तथ्य रखे।उन्होंने बताया कि मामला काफी पुराना है। प्रकरण वर्ष 1990 से अलग-अलग अदालतों में चलता रहा है। इसके बाद वर्ष 2024 में मामला हाई कोर्ट पहुंचा।
हाई कोर्ट में भी जवाब अब तक पेश नहीं हुआ। सरकार की ओर से लगातार समय मांगा गया। पांच सुनवाई के बाद कोर्ट ने और समय नहीं दिया। कोर्ट ने अब इसे अंतिम अवसर के तौर पर दिया है। इस देरी की जिम्मेदारी OIC पर तय की गई है। इसीलिए 10 हजार रु की कॉस्ट OIC से वसूली जाएगी। कोर्ट ने सरकारी फंड से राशि भरने पर रोक लगाई है। यह रकम हाई कोर्ट बार एसोसिएशन में जमा होगी।
एक सप्ताह का अंतिम मौका, फिर कलेक्टर की बारी
हाई कोर्ट ने सरकार को केवल एक सप्ताह दिया है। इस दौरान मामले में जवाब पेश करना होगा। साथ ही 10 हजार रु की कॉस्ट भी जमा करनी होगी। कोर्ट ने दोनों बातों को आदेश में साफ किया है।
अगर जवाब फिर भी पेश नहीं होता है, तो स्थिति बदलेगी। कॉस्ट जमा नहीं हुई तो भी कोर्ट सख्ती कर सकता है। कोर्ट ने आदेश में साफ लिखा है कि यदि अब जवाब नहीं आता तो कलेक्टर जबलपुर को खुद आना होगा। कोर्ट ने कलेक्टर की व्यक्तिगत मौजूदगी की चेतावनी दी है।
कलेक्टर को क्यों दी गई व्यक्तिगत हाजिरी की चेतावनी
मामले में कलेक्टर जबलपुर का आदेश चुनौती के दायरे में है। याचिका उसी आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में दायर हुई है। विवाद सीलिंग प्रभावित जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ा है। याचिकाकर्ता रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने की मांग कर रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सीलिंग कानून खत्म हो चुका है। इसके बाद भी जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव नहीं हुआ। उसका कहना है कि जमीन पर उसका कब्जा बना रहा। उसने जमीन के बदले मुआवजा भी नहीं लिया है।
याचिकाकर्ता के अनुसार रिकॉर्ड में सरकार का नाम दर्ज है। इस वजह से जमीन के उपयोग में उसे परेशानी है।
इसी रिकॉर्ड को लेकर कलेक्टर का आदेश चुनौती में है।
सीलिंग कानून खत्म होने के बाद भी क्यों अटका रिकॉर्ड
अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट में कानून का उल्लेख किया। उन्होंने सीलिंग कानून की धारा 4 का हवाला दिया। उनके अनुसार जमीन को सीलिंग प्रभावित रिकॉर्ड से हटना था। इसके बाद भूमि स्वामी का नाम दर्ज होना था।
याचिकाकर्ता का दावा है कि जमीन उसके कब्जे में रही। उसने जमीन का मुआवजा भी नहीं लिया है। इसी आधार पर रिकॉर्ड दुरुस्त करने की मांग की गई। लेकिन यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। इस वजह से याचिकाकर्ता अपनी संपत्ति का उपयोग नहीं कर पा रहा। इसी विवाद का समाधान हाई कोर्ट से मांगा गया है।
1990 से चल रहा विवाद, 2024 में फिर हाई कोर्ट पहुंचा
इस जमीन विवाद की शुरुआत करीब 1990 में हुई थी। इसके बाद मामला अलग-अलग अदालतों तक पहुंचता रहा। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मामला फिर हाई कोर्ट आया। वर्ष 2024 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।
इसके बाद सरकार से मामले पर जवाब मांगा गया। लेकिन दो साल में जवाब दाखिल नहीं हो पाया। इस दौरान पांच बार सुनवाई का मौका आया। हर बार जवाब के लिए समय मांगा गया। अब कोर्ट ने एक सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है। साथ ही OIC पर 10 हजार रु की कॉस्ट लगाई है।
अगली सुनवाई में कलेक्टर की मौजूदगी पर रहेगी नजर
हाई कोर्ट ने फिलहाल सरकार को अंतिम अवसर दिया है। अब एक सप्ताह में जवाब पेश करना होगा। कॉस्ट जमा करने की शर्त भी पूरी करनी होगी। अगर दोनों निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो कार्रवाई बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में कलेक्टर जबलपुर को व्यक्तिगत रूप से आना होगा। कोर्ट ने इस बात की स्पष्ट चेतावनी दी है।
मामले में अब अगली सुनवाई काफी अहम होगी। वहां जवाब और कॉस्ट जमा होने की स्थिति देखी जाएगी। लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद में यह अहम पड़ाव है। अब सरकार का जवाब मामले की आगे की दिशा तय करेगा।
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