जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के विखंडन पर PIL, हाईकोर्ट ने सरकार को दिया नोटिस

Neel Tiwari | Sept 15, 2026, 15:18 IST
यूनिवर्सिटी के बंटवारे पर हाईकोर्ट का नोटिस
जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी का दायरा घटाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। एक्ट में किए गए संशोधन के बाद यूनिवर्सिटी के दायरे में 80 से 14 कॉलेज रह जाएंगे। छह संभागों और 1400 छात्रों के दूसरी यूनिवर्सिटी में जाने और रिजर्व फंड पर भी सवाल उठे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी का दायरा घटाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
  • याचिका में 2022 के संशोधन को रद्द करने की मांग की गई है।
  • जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधिकार क्षेत्र में 80 कॉलेजों में अब केवल 14 कॉलेज बचे हैं।
  • छह संभागों और 1400 छात्र नई यूनिवर्सिटी में चले गए हैं।
  • पुरानी यूनिवर्सिटी के रिजर्व फंड को नई यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर करने को लेकर भी सवाल उठाया गया है।

जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के बंटवारे का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इसके दायरे में कमी करने वाले संशोधन को जनहित याचिका में चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई मंगलवार 15 सितंबर को जबलपुर में हुई। चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की खंडपीठ ने सुनवाई की।



पी. जी. नाजपांडे की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई है। उनकी ओर से अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय ने कोर्ट के सामने पक्ष रखा। उन्होंने 2022 में किए गए संशोधन पर कई सवाल उठाए हैं।



2022 के संशोधन से यूनिवर्सिटी का दायरा घटने का दावा

अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि याचिका 2022 के संशोधन से जुड़ी है। उनके अनुसार इस संशोधन के जरिए मेडिकल यूनिवर्सिटी का विभाजन किया गया। सरकार ने इसके बाद उज्जैन में नई यूनिवर्सिटी बनाने का फैसला लिया।



नई यूनिवर्सिटी का नाम धनवंतरी यूनिवर्सिटी है। इसके लिए अलग कानून या अध्यादेश लाने की बात याचिका में कही गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे जबलपुर यूनिवर्सिटी का काम काफी सीमित हो गया। उनके अनुसार इससे यूनिवर्सिटी की व्यवस्था और कामकाज पर सीधा असर पड़ा है।



80 कॉलेजों की जगह अब बचे 14 कॉलेज

याचिका में यूनिवर्सिटी के दायरे में आए बदलाव का आंकड़ा भी दिया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार पहले जबलपुर यूनिवर्सिटी से 80 कॉलेज जुड़े थे। संशोधन के बाद यह संख्या घटकर केवल 14 कॉलेज रह गई है। बाकी कॉलेज उज्जैन की नई यूनिवर्सिटी में चले गए हैं।



याचिका में कहा गया कि इससे जबलपुर यूनिवर्सिटी का काम और प्रभाव काफी कम हो गया। याचिकाकर्ता ने इसे यूनिवर्सिटी के मूल उद्देश्य पर असर डालने वाला बदलाव बताया है। कोर्ट के सामने इसी आधार पर संशोधन को रद्द करने की मांग रखी गई।



10 में से छह संभाग नई यूनिवर्सिटी में जाने का दावा

याचिका में कॉलेजों के साथ संभागों का भी आंकड़ा रखा गया है। इसके अनुसार पहले जबलपुर यूनिवर्सिटी का दायरा 10 संभागों तक था। संशोधन के बाद छह संभाग नई यूनिवर्सिटी के साथ चले गए। अब जबलपुर यूनिवर्सिटी के पास केवल चार संभाग रह गए हैं। इसी बदलाव को जनहित याचिका में चुनौती देने का एक आधार बनाया गया है।



1600 छात्रों में 1400 के दूसरी यूनिवर्सिटी ट्रांसफर

याचिका में छात्रों की संख्या को लेकर भी महत्वपूर्ण दावा किया गया है। इसके अनुसार पहले करीब 1600 छात्र जबलपुर यूनिवर्सिटी से जुड़े थे। संशोधन के बाद 1400 छात्रों के नई उज्जैन यूनिवर्सिटी में जाने की बात कही गई है।



अब जबलपुर यूनिवर्सिटी में करीब 200 छात्र ही बचेंगे। उनका कहना है कि कॉलेज और संभाग घटने के साथ छात्रों की संख्या भी कम हुई है। याचिका में इन बदलावों को यूनिवर्सिटी के अस्तित्व और कामकाज से जोड़कर देखा गया है।



रिजर्व फंड नई यूनिवर्सिटी को देने पर भी आपत्ति

मामले में केवल यूनिवर्सिटी के क्षेत्र को लेकर सवाल नहीं उठाया गया है। याचिका में पुराने विश्वविद्यालय के रिजर्व फंड का मुद्दा भी उठाया गया है। अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि नई यूनिवर्सिटी के लिए अलग फंड होना चाहिए। उनका तर्क है कि पुरानी यूनिवर्सिटी का रिजर्व फंड नई यूनिवर्सिटी को नहीं दिया जा सकता।



याचिकाकर्ता के अनुसार सरकार ने नई यूनिवर्सिटी बनाने का फैसला किया है। ऐसे में उसके लिए अलग वित्तीय व्यवस्था होनी चाहिए थी। रिजर्व फंड के इस्तेमाल को याचिका में अलग कानूनी मुद्दा बताया गया है।



हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय की दलीलों के बाद कोर्ट ने मामले पर विचार किया। कोर्ट ने याचिका को सुनवाई के योग्य मानते हुए संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया। प्रिंसिपल सेक्रेटरी, मेडिकल एंड हेल्थ एजुकेशन विभाग को नोटिस दिया गया है।



विधि विभाग और विधायी कार्य विभाग से भी जवाब मांगा गया है। अब संबंधित विभाग कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखेंगे। जवाब मिलने के बाद कोर्ट इस मामले में आगे सुनवाई करेगा। फिलहाल हाईकोर्ट ने संशोधन रद्द करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है।



सरकार के जवाब से साफ होगी मामले की अगली तस्वीर

इस मामले में अब सरकार और संबंधित विभागों का जवाब अहम होगा। उन्हें यूनिवर्सिटी के दायरे में बदलाव पर अपना पक्ष रखना होगा। कॉलेजों और संभागों के बंटवारे को लेकर भी स्थिति साफ हो सकती है।



छात्रों की संख्या से जुड़े दावों पर भी जवाब सामने आ सकता है। सबसे अहम सवाल पुराने रिजर्व फंड के इस्तेमाल का है। इस पर सरकार का कानूनी पक्ष भी कोर्ट के सामने आएगा। इसके बाद हाईकोर्ट मामले में आगे की दिशा तय करेगा।



ये खबरें भी पढ़िए...



प्रमोशन में आरक्षण 50% से ज्यादा नहीं, मुख्य सचिव करेंगे निगरानी



फर्जी फैकल्टी के सहारे चल रहे MP के 633 नर्सिंग कॉलेज, सीबीआई जांच में खुली पोल



खत्म होगा सालों का इंतजार! एक साल में पूरी होगी विभागीय जांच, समय पर मिलेगा प्रमोशन



ससुर की RTI ने खोला बहू तृप्ति सिंह के फर्जी आईएएस होने का राज, 13 लोगों से ठगे डेढ़ करोड़



Tags:
  • जबलपुर
  • जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी
  • हाईकोर्ट