एमपी पुलिस प्रमोशन: जबलपुर रेंज में 301 प्रधान आरक्षक बने एएसआई
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश के जबलपुर रेंज में बड़ा पुलिस प्रमोशन आदेश जारी हुआ है।
- डीआईजी अतुल सिंह ने 301 प्रधान आरक्षकों को पदोन्नत किया है।
- ये सभी अब सहायक उप निरीक्षक के पद पर काम करेंगे।
- यह पदोन्नति मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के तहत हुई है।
- जबलपुर और कटनी जिलों के पुलिसकर्मी इस सूची में शामिल हैं।
मध्यप्रदेश पुलिस में बड़ा प्रमोशन आदेश आया है। जबलपुर रेंज के डीआईजी अतुल सिंह ने यह आदेश जारी किया है। इसके तहत 301 प्रधान आरक्षकों को पदोन्नति दी गई है। ये सभी अब एएसआई (Assistant Sub Inspector) के पद पर काम करेंगे। यह आदेश 12 जुलाई 2026 को जारी हुआ है। यह जबलपुर और कटनी जिलों के पुलिसकर्मियों पर लागू होता है। दोनों जिले जबलपुर रेंज में आते हैं।
क्या है पूरा आदेश
यह पदोन्नति मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के तहत हुई है। मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने 30 जून 2026 को एक पत्र जारी किया था। इस पत्र में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। इसी आदेश के बाद जबलपुर रेंज ने विचारण सूची तैयार की। इसी सूची के आधार पर अब प्रधान आरक्षकों को पदोन्नत किया गया है।
301 प्रमोशन का पूरा गणित
कुल 301 प्रधान आरक्षकों को एएसआई बनाया गया है। इनमें अनुसूचित जनजाति वर्ग के 73 पुलिसकर्मी शामिल हैं। अनुसूचित जाति वर्ग से 55 प्रधान आरक्षकों को पदोन्नति मिली है। अनारक्षित वर्ग में सबसे ज्यादा 173 पुलिसकर्मी पदोन्नत हुए हैं। तीनों वर्गों की प्रतीक्षा सूची खाली रखी गई है। दस्तावेज में कहा गया है कि विचारण के लिए प्रधान आरक्षक उपलब्ध नहीं थे।
द सूत्र पर देखे पूरी सूची...
कहां-कहां हुई तैनाती
पदोन्नत पुलिसकर्मी अपनी मौजूदा पदस्थापना पर ही काम करते रहेंगे। इसे स्थानापन्न पदोन्नति कहा गया है। ज्यादातर कर्मचारी जबलपुर जिले में तैनात हैं। कुछ पुलिसकर्मी कटनी जिले में भी पदस्थ हैं। किसी भी कर्मचारी का तबादला फिलहाल नहीं किया गया है।
वेतन में क्या बदलेगा
पदोन्नति के बाद वेतन में भी बदलाव होगा। एएसआई पद का मौजूदा वेतनमान 28 हजार 700 रुपए से 91 हजार 300 रुपए है। यह वेतन मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के पे मैट्रिक्स लेवल सात के अनुसार तय होगा। नया वेतन उसी दिन से लागू होगा, जिस दिन कर्मचारी कार्यभार संभालेंगे। सभी पदोन्नत कर्मचारियों को एक महीने के अंदर वेतन निर्धारण का विकल्प देना होगा। यह प्रक्रिया नियम 13 के तहत पूरी होगी।
किन शर्तों पर टिकेगा आदेश
आदेश में साफ लिखा है कि कुछ जरूरी शर्तें भी जुड़ी हैं। यदि किसी पुलिसकर्मी पर पहले से आपराधिक मामला चल रहा है, तो उसकी पदोन्नति अपने आप रद्द मानी जाएगी। विभागीय जांच से जुड़े मामलों में भी यही नियम लागू होगा। ऐसी जानकारी मिलते ही अफसरों को तुरंत सूचित करना होगा। सूची में किसी कर्मचारी की योग्यता से जुड़ी गलत जानकारी मिलने पर भी आदेश रद्द हो सकता है। यह अधिकार कार्यालय के पास किसी भी समय सुरक्षित रहेगा।
कोर्ट के मामले से जुड़ी शर्त
यह आदेश एक अदालती मामले के फैसले पर भी निर्भर करेगा। विनय कुमार बबेले बनाम मध्यप्रदेश शासन नामक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसके अलावा हाईकोर्ट में भी कुछ याचिकाएं पदोन्नति से जुड़ी हैं। इन सभी मामलों का अंतिम फैसला इस आदेश पर लागू होगा।
पुराना आदेश हुआ रद्द
इस आदेश में एक पुराना नियम भी रद्द कर दिया गया है। साल 2021 के एक विभागीय आदेश के तहत कई प्रधान आरक्षकों को एएसआई का प्रभार दिया गया था। यह प्रभार कार्यवाहक तौर पर दिया गया था। अब उस व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से खत्म कर दिया गया है। जिन प्रधान आरक्षकों को यह प्रभार मिला था, वे अब अपने मूल पद पर ही काम करेंगे। वे अपनी मौजूदा पदस्थापना पर प्रधान आरक्षक के तौर पर तैनात रहेंगे।
कब से लागू होगा आदेश
आदेश में साफ कहा गया है कि यह तुरंत प्रभाव से लागू होगा। जिन कर्मचारियों के नाम सूची में हैं, उनकी पदोन्नति तत्काल मानी जाएगी। हालांकि वेतन का लाभ कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से ही मिलेगा। आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक कार्यालय भोपाल को भी भेजी गई है। इसके अलावा जबलपुर और कटनी के पुलिस अधीक्षकों को भी सूचित किया गया है, ताकि जरूरी कार्रवाई समय पर हो सके।
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