मध्यप्रदेश पुलिस के 168 सूबेदार बने रक्षित निरीक्षक, पदोन्नति आदेश जारी हुआ
Pawan Modiya | Jul 12, 2026, 23:01 IST
सूबेदार बने रक्षित निरीक्षक
मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने 168 सूबेदार और कार्यवाहक रक्षित निरीक्षकों को रक्षित निरीक्षक पद पर पदोन्नत किया है। सूची में शामिल अधिकारी लगभग हर जिले से हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे बड़े शहरों के अलावा छतरपुर, शिवपुरी, सिवनी जैसे जिले भी हैं।
मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने रविवार शाम एक पदोन्नति आदेश जारी किया है। इसमें सूबेदार और कार्यवाहक रक्षित निरीक्षकों को लाभ मिलेगा। कुल 168 अधिकारियों के नाम इस सूची में शामिल हैं। यह पदोन्नति मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र पर आधारित है, जो 30 जून 2026 को जारी हुआ था। इसी पत्र में मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 का हवाला दिया गया। इसके अलावा पुलिस मुख्यालय के 9 जुलाई 2026 के आदेश का भी जिक्र है। उसी आदेश के आधार पर अब यह अंतिम पदोन्नति आदेश जारी किया गया है।
इस आदेश से कुल 168 सूबेदार और कार्यवाहक रक्षित निरीक्षकों को फायदा मिलेगा। सभी को रक्षित निरीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया है।सूची में बृहस्पति कुमार साकेत, राधा यादव और रणवीर सिंह यादव के नाम हैं। इसके अलावा विजय बघेल और संजय सिंह राजपूत का नाम भी सूची में है। साथ ही राकेश कुमार तिवारी का नाम भी शामिल है। पूरी सूची में प्रदेश के अलग अलग जिलों में तैनात अधिकारी शामिल हैं। सभी की मौजूदा पदस्थापना का भी उल्लेख आदेश में किया गया है।
सूची में शामिल अधिकारी प्रदेश के लगभग हर जिले से जुड़े हैं। इसमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहर शामिल हैं। इसके अलावा छतरपुर, शिवपुरी, सिवनी, श्योपुर और उज्जैन जैसे जिले भी सूची में हैं। कई अधिकारी पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों और रेल पुलिस में भी तैनात हैं। यह दिखाता है कि पदोन्नति का लाभ पूरे प्रदेश के अधिकारियों को मिला है। इससे विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पद भी अब भर सकेंगे। कई अधिकारी वर्षों से इस पदोन्नति का इंतजार कर रहे थे।
पदोन्नत अधिकारियों को नया वेतनमान भी मिलेगा। यह वेतनमान 9300 से 34800 रुपए तक होगा। इसके साथ 4200 रुपए ग्रेड पे भी जुड़ेगा। यह मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के पे मेट्रिक्स लेवल 10 के अनुसार है। यह वेतनमान उसी दिन से लागू होगा, जिस दिन अधिकारी कार्यभार लेंगे।
सभी अधिकारियों को फिलहाल स्थानापन्न और अस्थायी रूप से पदस्थ किया गया है। यह पदस्थापना आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। आदेश में सभी की मौजूदा पदस्थापना यथावत रखी गई है। यानी फिलहाल किसी अधिकारी का तबादला नहीं किया गया है। सिर्फ उनका पद बदला गया है, तैनाती की जगह वही रहेगी।
आदेश में एक पुरानी व्यवस्था को भी खत्म किया गया है। इसके तहत सूबेदार को रक्षित निरीक्षक के पद का कार्यवाहक प्रभार मिलता था। अब इस आदेश के बाद वह कार्यवाहक प्रभार खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह अब सीधे पदोन्नति दी जा रही है।
आदेश में कुछ जरूरी शर्तें भी जोड़ी गई हैं। अगर कोई अधिकारी निलंबित है तो पहले कार्यालय को सूचित करना होगा। इसी तरह विभागीय जांच या आपराधिक प्रकरण में भी यह नियम लागू होगा। बिना सूचना के किसी को पदोन्नति पर कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। अगर फिर भी ऐसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी इकाई प्रमुख की होगी। इसके अलावा जिन्होंने मूलभूत प्रशिक्षण पूरा नहीं किया, उन्हें भी पहले सूचना देनी होगी। यह प्रक्रिया सभी संबंधित अधिकारियों पर समान रूप से लागू होगी।
यह सभी पदोन्नतियां एक अदालती मामले के अधीन भी रहेंगी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका के तहत लंबित है। यह मामला अभी विचाराधीन है। अगर सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट नया आदेश देते हैं, तो स्थिति बदल सकती है। पदोन्नति उसी नए आदेश के अनुसार तय होगी।
पदोन्नत अधिकारियों को वेतन निर्धारण के लिए एक विकल्प भी देना होगा। यह विकल्प मध्यप्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम 2025 के नियम 13 के तहत जरूरी है। सभी अधिकारियों को आदेश मिलने की तारीख से एक महीने में विकल्प देना होगा। तय समय सीमा में विकल्प न देने पर आगे दिक्कत हो सकती है। इसलिए सभी अधिकारियों को समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
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168 अफसरों को मिला लाभ
किन जिलों से जुड़े हैं नाम
कितना मिलेगा वेतनमान
फिलहाल स्थानापन्न नियुक्ति
आदेश में एक पुरानी व्यवस्था को भी खत्म किया गया है। इसके तहत सूबेदार को रक्षित निरीक्षक के पद का कार्यवाहक प्रभार मिलता था। अब इस आदेश के बाद वह कार्यवाहक प्रभार खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह अब सीधे पदोन्नति दी जा रही है।
शर्तों के साथ मिली राहत
कोर्ट के आदेश पर निर्भर
वेतन विकल्प देना जरूरी
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