झुग्गीवासियों को राहत विधायक ने नहीं, हाईकोर्ट ने दी, अब राजनीति पर उठ रहे सवाल

Neel Tiwari | Jul 27, 2026, 19:09 IST
Photograph: (THESOOTR)
JABALPUR. जबलपुर उखरी झुग्गी मामले में हाईकोर्ट ने राहत बरकरार रखी है। विधायक की भूमिका पर सवाल उठे, जबकि कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी थी। जमीन पर करीब 75 झुग्गियां वर्षों से बनी हैं।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • उखरी में झुग्गियां हटाने की कार्रवाई 23 जुलाई से शुरू हुई।
  • हाईकोर्ट ने 24 जुलाई को पहली राहत दी।
  • विधायक के वीडियो के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ा।
  • 27 जुलाई को कोर्ट ने राहत बरकरार रखी।
  • जमीन पर करीब 75 झुग्गियां वर्षों से बनी हैं।

उखरी क्षेत्र में केसरवानी शिक्षा समिति की जमीन से झुग्गियां हटाने के मामले में भाजपा विधायक डॉ. अभिलाष पांडे की कथित सक्रियता पर सवाल उठने लगे हैं। वजह यह है कि जिस कार्रवाई का विधायक बाद में विरोध करते नजर आए, वह 23 जुलाई को शुरू हो चुकी थी।



अगले दिन 24 जुलाई को हाईकोर्ट ने झुग्गीवासियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर निगम और जबलपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के बयान को रिकॉर्ड पर लिया कि 27 जुलाई तक कोई भी बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी।



इसी दिन यानी 24 जुलाई को विधायक का अधिकारियों को फटकार लगाते हुए वीडियो भी वायरल हुआ। अब सोमवार 27 जुलाई को हाई कोर्ट ने फिर साफ कर दिया है कि मंगलवार 28 जुलाई तक भी झुग्गीवासियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि राहत आखिर हाई कोर्ट ने दिलाई या फिर इसका राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश की जा रही है।



jabalpur slum removal (2)


23 जुलाई को शुरू हुई कार्रवाई, विरोध भी

केसरवानी शिक्षा समिति की जमीन पर बने कथित अतिक्रमण को हटाने के लिए 23 जुलाई को नगर निगम, जेडीए और पुलिस की संयुक्त टीम उखरी पहुंची थी।



कार्रवाई के दौरान भारी हंगामा हुआ और झुग्गीवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया। उस समय स्थानीय लोगों का आरोप था कि उन्हें अचानक बेदखल किया जा रहा है। पूरे घटनाक्रम के दौरान विधायक की सक्रिय मौजूदगी सामने नहीं आई।



jabalpur slum removal


24 जुलाई को हाई कोर्ट ने दी पहली राहत

झुग्गीवासियों की ओर से दायर याचिका पर 24 जुलाई को जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी की एकलपीठ में सुनवाई हुई। नगर निगम और जेडीए ने हाई कोर्ट को बताया कि 27 जुलाई तक कोई भी बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी और विवाद सुलझाने के प्रयास चल रहे हैं।



इसी आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई तय कर दी। यानी झुग्गीवासियों को पहली कानूनी राहत हाई कोर्ट से मिली।



स्टे के बाद वायरल हुआ विधायक का वीडियो

इसी 24 जुलाई को, जब हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश आ चुका था, भाजपा विधायक डॉ. अभिलाष पांडे का अधिकारियों को फटकार लगाते हुए वीडियो सामने आया।



वीडियो में वह अधिकारियों से नाराजगी जताते और बस्तीवासियों को पुनर्वास का भरोसा देते दिखाई दिए। इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इसे विधायक की पहल के रूप में प्रचारित किया गया।



हालांकि अब पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन सामने आने के बाद चर्चा यह है कि जब 23 जुलाई को कार्रवाई शुरू हुई और झुग्गीवासी विरोध कर रहे थे, तब विधायक सामने क्यों नहीं आए? उनकी सक्रियता उस समय दिखी जब हाई कोर्ट से राहत मिल चुकी थी और प्रशासन स्वयं अदालत के सामने कार्रवाई रोकने का आश्वासन दे चुका था।



27 जुलाई को हाई कोर्ट ने राहत बरकरार रखी

सोमवार 27 जुलाई की सुनवाई में झुग्गीवासियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर ने हाई कोर्ट को बताया कि 19 जून 2026 के पुराने आदेश के आधार पर उन्हें बेदखल किए जाने का खतरा बना हुआ है। इस पर नगर निगम की ओर से फिर अदालत में कहा गया कि 28 जुलाई तक कोई भी बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी।



जस्टिस मनिंदर एस भट्टी ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले को 28 जुलाई को उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया, जिसने 19 जून 2026 को अतिक्रमण हटाने संबंधी आदेश पारित किया था।



क्या है पूरा विवाद?

यह मामला केसरवानी शिक्षा समिति की उस जमीन से जुड़ा है, जिस पर वर्षों से करीब 75 झुग्गियां बनी हुई हैं। समिति का दावा है कि जमीन उसे शैक्षणिक उद्देश्य के लिए आवंटित की गई थी।



2023 में हाई कोर्ट ने जेडीए को पहले इस मामले में नियमों के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया था। बाद में 19 जून 2026 को हाई कोर्ट की दूसरी पीठ ने नगर निगम और जेडीए को अतिक्रमण हटाने के लिए 30 दिन का समय दिया।



इसी आदेश के बाद प्रशासन ने 23 जुलाई से कार्रवाई शुरू की, लेकिन झुग्गीवासियों की नई याचिका पर 24 जुलाई को हाईकोर्ट ने तत्काल राहत दे दी, जिसे 27 जुलाई की सुनवाई में भी बरकरार रखा गया।



फिलहाल स्थिति यह है कि मंगलवार 28 जुलाई तक झुग्गीवासियों के खिलाफ कोई भी बलपूर्वक कार्रवाई नहीं होगी। ऐसे में अब यह साफ है कि मौजूदा राहत किसी राजनीतिक हस्तक्षेप से नहीं, बल्कि हाई कोर्ट के अंतरिम आदेशों के कारण मिली है। आगे का रास्ता अब हाई कोर्ट की अगली सुनवाई से तय होगा।



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