आखिर कैसे खत्म हुआ नरसिंहपुर का सालों पुराना जल संकट? पीएम भी कर चुके तारीफ
Aman Vaishnav | Jul 27, 2026, 14:30 IST
नरसिंहपुर का सालों पुराना जल संकट
एक समय था जब नर्मदा नदी के पास होने के बाद भी नरसिंहपुर जिले में जलस्तर नीचे चला गया था। वहीं आज जिले में 63 अमृत सरोवर के जरिए 70 करोड़ लीटर पानी बचाकर गिरते भूजल स्तर को सुधारा गया है। पीएम मोदी के मन की बात में तारीफ के बाद यह मॉडल चर्चा में है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- नर्मदा किनारे बसे नरसिंहपुर में गिरते जलस्तर की बड़ी समस्या थी।
- जिले में 63 अमृत सरोवर तालाब बनाए गए हैं।
- इनमें करीब 70 करोड़ लीटर बारिश का पानी जमा होता है।
- पीएम मोदी ने मन की बात में इस मॉडल की तारीफ की।
गर्मी में पानी की समस्या
सबसे ज्यादा परेशानी वनांचल के पथरीली जमीन वाले गांवों में देखी गई थी। मुंगवानी से लगे कई गांवों में गर्मी के मौसम में यह संकट और गहरा जाता था।
पथरीली जमीन होने की वजह से यहां बारिश का पानी टिकता नहीं था। जमीन जल्दी सूख जाती और कुएं-ट्यूबवेल दम तोड़ देते थे।
इसी वजह से खेती भी सीमित फसलों तक सिमट गई थी। किसान सिर्फ सामा और कोदो-कुटकी जैसी परंपरागत फसलें ही उगा पाते थे।
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कैसे हुई बदलाव की शुरुआत
धीरे-धीरे एक के बाद एक तालाब खोदे गए। समाज, सरकार और प्रशासन ने कदम से कदम मिलाकर इस मुहिम को आगे बढ़ाया। समय के साथ इन गांवों की तस्वीर बदलने लगी। साथ ही यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी में भी सुधार दिखने लगा।
63 तालाबों की कहानी
आंकड़ों में देखें तो यह करीब 6 से 7 लाख घनमीटर पानी है। यह पानी साल भर जिले के भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद करता है।
पहले जो इलाके गर्मी शुरू होते ही सूखने लगते थे, वहां अब स्थिति अलग है। तालाबों में जमा पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसता है।
इससे आसपास के कुओं और ट्यूबवेल का जलस्तर भी बना रहता है। यही वजह है कि जिले के कई गांवों का जल संकट अब काफी हद तक दूर हो गया है।
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अब खेतों में लहलहाती फसलें
जिन खेतों में पहले सिर्फ सामा और कोदो-कुटकी जैसी फसलें उगती थीं, वहां अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अब वहां गेहूं और चना समेत कई फसलें साल भर लहलहाती हैं। किसानों के लिए यह बदलाव किसी सपने के सच होने जैसा है। खेती अब सिर्फ बारिश के भरोसे नहीं रही।
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पीएम मोदी ने की तारीफ
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जमीनी हकीकत क्या कहती है
पानी की चिंता अब पहले जितनी बड़ी नहीं रही है। यह बदलाव धीरे-धीरे लेकिन मजबूती से आया है। गांव वालों का कहना है कि सही जगह पर तालाब बनने से ही यह सफलता मिल पाई।
नरसिंहपुर का यह मॉडल दिखाता है कि छोटे स्तर के जल संरक्षण कदम भी बड़ा असर डाल सकते हैं। सही योजना और सामूहिक भागीदारी से पथरीली और सूखाग्रस्त जमीन भी उपजाऊ बनाई जा सकती है। यही वजह है कि अब यह मॉडल पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है।
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