अब सिर्फ नगर निगम संभालेगा जबलपुर ट्रैफिक सिग्नल, हाईकोर्ट के निर्देश
समझें क्या है पूरा मामला
- जबलपुर के सभी ट्रैफिक सिग्नल्सका संचालन अब नगर निगम करेगा।
- पहले पूरे शहर के ट्रैफिक सिगनलों का संचालन तीन एजेंसियां करती थी।
- सरकार ने बताया कि कलेक्टर, स्मार्ट सिटी, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की बैठक में यह फैसला हुआ।
- कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने और ट्रैफिक बाधाएं खत्म करने के निर्देश दिए हैं।
- इस मामले में अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 तय की है।
हाई कोर्ट में सरकार ने बताया नया प्लान
जबलपुर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट में अहम जानकारी सामने आई है। अब शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों का संचालन जबलपुर नगर निगम करेगा। सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस फैसले पर सभी संबंधित विभाग सहमत हैं। इससे ट्रैफिक व्यवस्था को एक ही एजेंसी के जरिए बेहतर बनाने की कोशिश होगी।
यह मामला नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की जनहित याचिका से जुड़ा है। मंच की ओर से डॉ. पी. जी. नाजपांडे और रजत भार्गव ने याचिका दायर की थी। उनकी ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट में पक्ष रखा।
किन विभागों ने मिलकर लिया फैसला
सरकार ने कोर्ट को बताया कि कलेक्टर की मौजूदगी में एक संयुक्त बैठक हुई। इस बैठक में जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में तय हुआ कि शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों की देखरेख अब नगर निगम करेगा। इससे जिम्मेदारी तय होगी और काम में बेहतर तालमेल बन सकेगा।
सिग्नल चलाने का खर्च कौन देगा
सरकार ने कोर्ट को बताया कि ट्रैफिक पुलिस और स्मार्ट सिटी मिलकर नगर निगम को राशि देंगे। हर ट्रैफिक सिग्नल के लिए सालाना 1.50 लाख रुपये का रखरखाव खर्च दिया जाएगा। इस व्यवस्था का मकसद यह है कि किसी भी सिग्नल की मरम्मत या रखरखाव पैसे की कमी से न रुके। इससे खराब पड़े सिग्नलों को समय पर ठीक किया जा सकेगा।
नगर निगम बनाएगा पूरा संचालन प्लान
सरकार ने यह भी बताया कि नगर निगम जल्द एक विस्तृत योजना तैयार करेगा। इस योजना में सिग्नलों के संचालन और रखरखाव का पूरा तरीका तय होगा। साथ ही जहां अतिक्रमण या दूसरी रुकावटें हैं, उन्हें भी हटाया जाएगा। इससे ट्रैफिक सिग्नलों का सही उपयोग हो सकेगा और सड़क पर वाहन आसानी से निकल सकेंगे।
हाई कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के दिए निर्देश
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने साफ कहा कि ट्रैफिक में रुकावट पैदा करने वाली सभी बाधाएं हटाई जाएं। कोर्ट ने संबंधित विभागों को इस दिशा में जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कोर्ट का मानना है कि केवल सिग्नल लगाने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी। सड़क पर मौजूद रुकावटें भी खत्म करनी होंगी। तभी लोगों को बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
7 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सरकार के जवाब को रिकॉर्ड पर लेने के बाद हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 तय की है।अगली सुनवाई में कोर्ट यह देख सकता है कि नगर निगम ने संचालन योजना तैयार की या नहीं। साथ ही अतिक्रमण हटाने और ट्रैफिक सुधार के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए।
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा
अगर यह योजना तय समय पर लागू होती है, तो शहर में ट्रैफिक सिग्नलों का रखरखाव पहले से बेहतर हो सकता है। खराब सिग्नलों की मरम्मत में देरी कम होगी। एक ही एजेंसी के पास जिम्मेदारी रहने से जवाबदेही भी बढ़ेगी। इससे ट्रैफिक नियंत्रण और सड़क सुरक्षा में सुधार की उम्मीद की जा रही है। हालांकि इसका वास्तविक असर योजना लागू होने के बाद ही साफ होगा।
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