करोड़ों की काली कमाई के ‘कुबेर’ जगदीश सरवटे पर ED का शिकंजा, 11.81 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

Neel Tiwari | Feb 12, 2026, 22:00 IST
Photograph: (thesootr)
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित आदिम जाति कल्याण विभाग भ्रष्टाचार मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। EOW की जांच के आधार पर अब ED ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में शिकंजा कस दिया है।

News in short

11.81 करोड़ की संपत्ति अटैच: ED ने धारा 5(1) PMLA के तहत 9 अचल संपत्तियां कुर्क कीं।



चार जिलों में फैली संपत्ति: भोपाल, मंडला, उमरिया और सिवनी में घर, कृषि भूमि और प्लॉट शामिल।



भोपाल का आलीशान रेस्टोरेंट भी कुर्क: जांच में बड़े निवेश का खुलासा।



EOW की कार्रवाई बनी आधार: जुलाई 2025 की छापेमारी में आय से 400% अधिक संपत्ति मिली थी।



बाघ की खाल और विदेशी शराब हुई थी बरामद: वन्यजीव अधिनियम के तहत अलग मामला दर्ज, मां जेल गई थीं।



द सूत्र ने किया था विभागीय संरक्षण का खुलासा



News in Detail

जुलाई 2025 में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने जबलपुर, भोपाल और सागर स्थित जगदीश सरवटे के छह ठिकानों पर एक साथ दबिश दी थी। इस समय जगदीश सरवटे जबलपुर के आदिमजाति कल्याण विभाग के डिप्टी कमिश्नर के रूप में पदस्थ थे।



इस कार्रवाई में लगभग 5 करोड़ 89 लाख रुपये से अधिक की अनुपातिक संपत्ति उजागर हुई, जो उनकी ज्ञात आय से कहीं अधिक थी। जांच के दौरान मंडला जिले में व्यावसायिक प्लॉट, आवासीय भवन और रिसॉर्ट निर्माण से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए। EOW की इस कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी थी और यही जांच आगे चलकर ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का आधार बनी।



11.81 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

प्रवर्तन निदेशालय की भोपाल जोनल ऑफिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सरवटे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्वत की रकम को अचल संपत्तियों में निवेश किया।



ED ने 11 करोड़ 81 लाख रुपए की 9 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, जिनमें आवासीय घर, कृषि भूमि, व्यावसायिक प्लॉट और भोपाल स्थित एक आलीशान रेस्टोरेंट शामिल है। ये संपत्तियां भोपाल, मंडला, उमरिया और सिवनी जिलों में स्थित हैं। संपत्ति कुर्क की कार्रवाई इसलिए की गई है ताकि आरोपी इन संपत्तियों को बेच या ट्रांसफर न कर सके।



jagdish sarvate


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कैसे ‘सफेद’ किया गया काला धन?

ED की जांच में सामने आया कि डिप्टी कमिश्नर जगदीश सरवटे ने “प्लेसमेंट, लेयरिंग और इंटीग्रेशन” की प्रक्रिया अपनाकर अवैध कमाई को वैध संपत्ति में बदला। कई संपत्तियां नकद भुगतान के जरिए खरीदी गईं, जबकि कुछ संपत्तियों के बैंक लोन को अज्ञात स्रोतों से जमा नकदी द्वारा चुकाया गया। जांच एजेंसी का मानना है कि रिश्वत के पैसों को व्यवस्थित तरीके से निवेश कर संपत्ति का जाल खड़ा किया गया।



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‘बाघ की खाल’ से मचा था हड़कंप

EOW की छापेमारी के दौरान सरवटे के पैतृक आवास से बाघ की खाल बरामद हुई थी, जिसने मामले को और सनसनीखेज बना दिया था। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत उनकी मां के खिलाफ अलग प्रकरण दर्ज हुआ और उन्हें जेल भी भेजा गया। इसके अलावा भारी मात्रा में महंगी विदेशी शराब की बोतलें भी बरामद की गई थीं।



फरारी, सरेंडर और अब ED का शिकंजा

कार्रवाई के बाद सरवटे लंबे समय तक फरार रहे थे। अगस्त 2025 में अदालत में पेश होने पर उनकी जमानत खारिज कर दी गई थी और उन्हें जेल भेज दिया गया।



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FIR के बाद भी ऑफिस में बैठ रहा था सरवटे

आपको बता दें की जगदीश सरवटे पर FIR होने के बाद भी उसे फरार बताया जा रहा था जबकि वह अपने जबलपुर स्थित नए कार्यालय में बैठ रहा था। द सूत्र ने इसका खुलासा किया था और इससे जुड़ा प्रश्न विभागीय मंत्री विजय शाह से भी किया था जिसके बाद सरवटे पर दबाव आया और उसने सरेंडर किया था।



अब ED की 11.81 करोड़ रुपए की कुर्की ने उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे और भी संपत्तियों पर कार्रवाई हो सकती है।





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