कैलारस शक्कर कारखाना विवाद: विधायक उपाध्याय ने कलेक्टर को दी मानहानि की धमकी

Ratan Kumar Mishra | Aug 24, 2026, 17:52 IST
Photograph: (THESOOTR)
MORENA. कैलारस शक्कर कारखाने को लेकर विधायक पंकज उपाध्याय और मुरैना कलेक्टर लोकेश जांगिड़ आमने-सामने हैं। विधायक ने पत्र लिखकर विशेषाधिकार और मानहानि की चेतावनी दी है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • विधायक पंकज बनाम कलेक्टर जांगिड़, अब खुली जंग शुरू।
  • कैलारस मिल विवाद में अब कानूनी चेतावनी की एंट्री।
  • अनशन खत्म हुआ, लेकिन सियासी लड़ाई अभी बाकी है।
  • कलेक्टर के एक बयान ने बढ़ा दी विधायक की नाराजगी।
  • EOI की तारीख पर उठा सवाल, किसका दावा सही।

कैलारस शक्कर कारखाने को लेकर विधायक और कलेक्टर आमने-सामने आ गए हैं। जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने मुरैना कलेक्टर लोकेश जांगिड़ को पत्र लिखा है।



कलेक्टर के एक मीडिया बयान पर विधायक ने कड़ी आपत्ति जताई है। विधायक ने विशेषाधिकार और मानहानि की कार्रवाई की चेतावनी दी है। EOI की तारीख को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।



कैलारस शक्कर कारखाने का आंदोलन अब नए विवाद में उलझ गया है। आमरण अनशन खत्म होने के बाद बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने कलेक्टर के बयान पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे जनप्रतिनिधि के अधिकार से जुड़ा मामला बताया है। पत्र में विधायक ने कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं।



कलेक्टर के बयान से शुरू हुई नई बहस

कलेक्टर लोकेश जांगिड़ ने कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत की थी। उन्होंने कहा था कि कारखाने को लेकर फैसला पहले ही हो चुका था। कलेक्टर के मुताबिक विधायक को इसकी जानकारी पहले ही दे दी गई थी।



कलेक्टर ने बताया था कि दस दिन के भीतर EOI जारी होगी। इसके बावजूद विधायक आमरण अनशन पर बैठ गए थे। कलेक्टर के इसी बयान पर अब विधायक नाराज हैं। उनका कहना है कि इस बयान से जनता में गलत संदेश गया।



विधायक ने पूछा, जवाब क्यों नहीं दिया गया

पंकज उपाध्याय ने कलेक्टर को औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र की तारीख 24 अगस्त 2026 बताई गई है। विधायक का कहना है कि उन्होंने पहले भी पत्र भेजे थे। उन पत्रों में अनशन की पूरी जानकारी भी दी गई थी।



विधायक के मुताबिक उन पत्रों का कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने सीधा सवाल किया कि जवाब देना जरूरी क्यों नहीं समझा गया। उनका कहना है कि यह मामला लाखों लोगों से जुड़ा है। इसलिए प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए था।



विधायक बोले, कलेक्टर का रवैया भाजपा कार्यकर्ता जैसा

विधायक ने कलेक्टर के रवैये पर सीधा सवाल उठाया है। उनका कहना है कि कलेक्टर एक जिम्मेदार पद पर बैठे हैं। इसके बावजूद उनका व्यवहार भाजपा कार्यकर्ता जैसा नजर आया। विधायक ने कलेक्टर के मीडिया बयान पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। विधायक ने कलेक्टर से अपने बयान पर खेद मांगने को कहा है।



विशेषाधिकार और मानहानि की चेतावनी

विधायक ने पत्र में आगे बड़ी चेतावनी भी दी है। उन्होंने विधानसभा में विशेषाधिकार का मामला उठाने की बात कही है। साथ ही अदालत में मानहानि का दावा करने की बात भी कही है।



विधायक ने कलेक्टर के बयान को इसकी सीधी वजह बताया है। उनका कहना है कि इससे पद की गरिमा भी प्रभावित हुई है। फिलहाल यह कार्रवाई सिर्फ चेतावनी के स्तर पर है। किसी कानूनी कार्रवाई की औपचारिक शुरुआत की पुष्टि अभी नहीं हुई है।



EOI की तारीख पर टिका सबसे बड़ा सवाल

विवाद का दूसरा बड़ा मुद्दा EOI की तारीख है। सरकार ने 21 अगस्त को EOI (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट – रुचि की अभिव्यक्ति) जारी की थी। विधायक का अनशन इससे पहले 15 अगस्त को शुरू हुआ था।



विधायक का सवाल है कि EOI पहले क्यों नहीं जारी हुई। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया पहले ही शुरू होनी चाहिए थी। कलेक्टर का दावा इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है। उनके अनुसार फैसला अनशन शुरू होने से पहले ही हो चुका था। यही अंतर अब पूरे विवाद का केंद्र बन गया है।



सरकार ने कारखाना चलाने के लिए मांगे प्रस्ताव

EOI के जरिए कंपनियों से रुचि के प्रस्ताव मांगे गए हैं। यह प्रक्रिया कारखाने को दोबारा शुरू करने से जुड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार मिल 30 साल की लीज पर दी जाएगी।



कारखाने की रोजाना क्षमता 1250 टन गन्ना पेराई की है। इसमें कारखाने से जुड़ी जमीन और अन्य संपत्तियां भी शामिल हैं। इच्छुक कंपनियां 15 सितंबर तक अपने प्रस्ताव दे सकती हैं। प्रस्ताव 16 सितंबर को औपचारिक रूप से खोले जाएंगे।



आंदोलन के बाद कारखाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी

विधायक ने 15 अगस्त से आमरण अनशन शुरू किया था। इस आंदोलन को किसानों और स्थानीय लोगों का व्यापक समर्थन मिला। कांग्रेस के कई नेताओं ने भी आंदोलन को समर्थन दिया था।



21 अगस्त को EOI जारी होने की खबर सामने आई। इसके बाद विधायक ने 22 अगस्त को अपना अनशन खत्म किया। उन्होंने इसे अपने आंदोलन की बड़ी सफलता बताया था। लेकिन अब आंदोलन की जगह राजनीतिक आरोपों ने ले ली है।



अब विवाद सिर्फ कारखाने तक सीमित नहीं

कैलारस मिल का मुद्दा अब राजनीतिक टकराव में बदल गया है। एक तरफ विधायक अपने पत्रों का जवाब मांग रहे हैं। दूसरी तरफ कलेक्टर का बयान बिल्कुल अलग दावा कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल अब भी EOI की वास्तविक प्रक्रिया पर टिका है।



आगे देखना यह होगा कि प्रशासन अब क्या कदम उठाता है। विधायक विशेषाधिकार और मानहानि की बात पहले ही कह चुके हैं। कलेक्टर की ओर से इस पत्र का जवाब अभी बाकी है। इस जवाब से ही विवाद की अगली तस्वीर साफ होगी।



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