कैलारस शक्कर कारखाना हमेशा के लिए बंद, 23 हजार किसानों का सपना टूटा
Ratan Kumar Mishra | Jul 08, 2026, 13:40 IST
कैलारस शक्कर कारखाना हमेशा के लिए बंद
मुरैना के कैलारस शक्कर कारखाने को लेकर सीएम मोहन यादव और पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के वादे धरे के धरे रह गए। सरकार ने कारखाने की जमीन MSME विभाग को सौंप दी है और पंजीयन भी रद्द कर दिया है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- कैलारस शक्कर कारखाने की जमीन सरकार ने एमएसएमई विभाग को सौंप दी है।
- कारखाने का पंजीयन नंबर भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया है।
- सीएम मोहन यादव 6 बार कारखाना चालू करने की घोषणा कर चुके हैं।
- पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान भी 2 बार यह वादा कर चुके थे।
- किसानों ने अपनी जमीन और जेवर बेचकर इस कारखाने के शेयर खरीदे थे।
इसके साथ ही कारखाने का पंजीयन नंबर भी खत्म कर दिया गया है। यह फैसला उस समय आया है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद इस कारखाने को दोबारा शुरू करने का भरोसा कई बार दे चुके थे।
मुख्यमंत्री और मंत्री कर चुके थे वादे
कृषि एवं किसान विकास मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने भी किसानों को गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए एक करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। इतने वादों के बावजूद सरकार ने चुपचाप कारखाने की जमीन दूसरे विभाग को सौंप दी।
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विधायक ने किया था विरोध प्रदर्शन
विधायक के मुताबिक जिस जमीन पर कारखाना बना है, वह सहकारिता विभाग की है। किसान नेताओं का आरोप है कि जमीन को एमएसएमई विभाग को सौंपकर उसे खुर्दबुर्द करने की योजना बनाई गई है।
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क्या हो सकता है जमीन का इस्तेमाल
किसानों के पैसों से बना था कारखाना
इस कारखाने के लिए 23 हजार किसानों ने शेयर खरीदे थे। कई किसानों ने शेयर खरीदने के लिए अपनी जमीनें तक बेच दी थीं। कुछ किसानों ने अपनी पत्नियों के जेवर भी बेच दिए थे। तब जाकर यह कारखाना शुरू हो पाया था।
चार जिलों के किसान आते थे यहां
यह इलाका पहले डकैत प्रभावित माना जाता था। किसानों को रास्ते में लुटने का डर भी रहता था। इसके बावजूद किसान अपनी गन्ने की फसल लेकर कारखाने पहुंचते थे।
मशीन खराब होने से रुका उत्पादन
कुछ दिन चलने के बाद वह फिर से खराब हो गई। इसके बाद मशीन को दोबारा ठीक नहीं किया जा सका। आखिरकार साल 2011 में कारखाना स्थायी रूप से बंद हो गया।
मुरैना में चार कारखानों की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार जिले में नहरें भी पहले से बनी हुई हैं। बिजली की सुविधा भी पर्याप्त मौजूद है। यहां की मिट्टी गन्ना उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त मानी गई है। इसके बावजूद कारखाने को दोबारा शुरू नहीं किया जा रहा है।
260 बीघा जमीन का हो सकता है बंटवारा
कारखाना परिसर की 50 बीघा से ज्यादा जमीन एमएसएमई विभाग को दी गई है। इसके अलावा 60 बीघा जमीन भी राजस्व विभाग को सौंपी गई है। अब दोनों विभाग इस जमीन पर प्लॉटिंग कर सकते हैं।
पांच साल से चल रहा है संघर्ष
किसान नेता का आरोप
FAQ
- कैलारस शक्कर कारखाने की जमीन किसे सौंपी गई है?
कैलारस शक्कर कारखाने की जमीन लघु एवं सूक्ष्म उद्योग विभाग यानी एमएसएमई को सौंपी गई है। इसके साथ ही कारखाने का पंजीयन नंबर भी खत्म कर दिया गया है। - कैलारस शक्कर कारखाना कब और कैसे बंद हुआ था?
साल 2008 में कारखाने की मशीन खराब होने से उत्पादन रुक गया था। मरम्मत के बाद भी मशीन ठीक से नहीं चली। आखिरकार साल 2011 में कारखाना स्थायी रूप से बंद हो गया। - कारखाना चालू करने को लेकर किन नेताओं ने घोषणाएं की थीं?
मुख्यमंत्री मोहन यादव 6 बार और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 2 बार इसे चालू करने की घोषणा कर चुके हैं। कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंसाना ने भी किसानों को एक करोड़ रुपए देने की बात कही थी।
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