कैलारस शुगर फैक्ट्री विवाद: जमीन और मशीनों पर सवाल, विधायक ने खोला मोर्चा
समझें क्या है पूरा मामला
- कैलारस का शक्कर कारखाना लंबे समय से बंद पड़ा है।
- किसान और कर्मचारी इसे फिर शुरू कराने की मांग कर रहे हैं।
- विधायक पंकज उपाध्याय ने 15 अगस्त से अनशन का ऐलान किया है।
- विधायक ने जमीन और मशीनों के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
- उनका कहना है कि ठोस भरोसे तक आंदोलन जारी रहेगा।
शक्कर कारखाना फिर चर्चा में
मुरैना के कैलारस में शक्कर कारखाना फिर चर्चा में है। कारखाना शुरू कराने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने बड़ा ऐलान किया है। वह 15 अगस्त से आमरण अनशन पर बैठेंगे। विधायक ने कहा कि मांग पूरी होने तक आंदोलन चलेगा। उनका कहना है कि सरकार को ठोस भरोसा देना होगा। इस आंदोलन में किसान और कारखाना कर्मचारी भी शामिल होंगे।
15 अगस्त से आमरण अनशन पर बैठेंगे विधायक
पंकज उपाध्याय ने 15 अगस्त से अनशन शुरू करने की बात कही। उनके साथ कई किसान नेता भी मौजूद रहेंगे। इनमें अशोक तिवारी और गयाराम धाकड़ शामिल हैं। पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्रा भी आंदोलन में रहेंगे। विधायक के अनुसार बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता आएंगे। कारखाने से जुड़े कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल होंगे।आंदोलन का मुख्य मुद्दा कारखाने को दोबारा शुरू करना है।
विधायक बोले, सरकार ने कई बार दिया भरोसा
कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने मुख्यमंत्री पर कई सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि कई बार कारखाना शुरू करने की बात हुई। कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों से गन्ना उगाने को कहा गया। विधायक के अनुसार कई किसानों ने गन्ने की खेती शुरू की। इसके बाद भी कारखाना शुरू नहीं हुआ। इसी बात को लेकर किसानों में नाराजगी है।
जमीन और मशीनों को लेकर विधायक ने उठाए सवाल
विधायक ने 29 जून के फैसले का जिक्र किया है। उनके अनुसार जमीन एमएसएमई को देने का आदेश हुआ। उन्होंने मशीनों को बेचने के आदेश का भी दावा किया। विधायक ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया है। उनका आरोप है कि जमीन का गलत इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने छोटे प्लॉट काटने की आशंका भी जताई है। हालांकि ये आरोप विधायक के बयान पर आधारित हैं। सरकार का पक्ष इस मामले में जरूरी है।
कैलारस कारखाना पहले भी बन चुका है मुद्दा
कैलारस कारखाने को लेकर पहले भी आंदोलन हुए हैं। जनवरी 2025 में जमीन नीलामी का विरोध हुआ था। उस आंदोलन में किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए थे। उस समय बड़ी संख्या में ट्रैक्टर भी पहुंचे थे। मध्य प्रदेश विधानसभा के रिकॉर्ड में भी मामला दर्ज है। सरकार ने कारखाने की स्थापना वर्ष 1965 बताया था। उत्पादन वर्ष 1971-72 में शुरू हुआ था। कारखाने की क्षमता 1250 मीट्रिक टन बताई गई थी।
कारखाना बंद होने की वजह भी सरकार ने बताई
विधानसभा में सरकार ने कारखाना बंद होने की वजह बताई थी। सरकार के अनुसार गन्ने और पूंजी की कमी थी। कारखाना फिर शुरू करने का मामला भी उठ चुका है। सरकारी जवाब में इसका फैसला लंबित बताया गया था।
जुलाई में भी विधानसभा परिसर में हुआ था धरना
पंकज उपाध्याय ने जुलाई में भी विरोध किया था। उन्होंने विधानसभा परिसर में धरना दिया था। यह धरना कारखाने से जुड़े सवालों को लेकर था। उन्होंने सवालों को बार-बार खारिज करने का आरोप लगाया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पांच बार सवाल लगाए थे। विधायक ने सवाल खारिज होने पर जवाब मांगा था। कांग्रेस के कई विधायक उनके समर्थन में पहुंचे थे।
अब 15 अगस्त के अनशन पर टिकी नजर
अब आंदोलन का अगला चरण 15 अगस्त से शुरू होगा। विधायक ने अनशन को मांग पूरी होने तक चलाने की बात कही। कैलारस में कारखाना किसानों के लिए बड़ा मुद्दा बना है। आने वाले दिनों में सरकार के रुख पर नजर रहेगी। कारखाना शुरू होने से किसानों को बाजार मिलने की उम्मीद है। कर्मचारियों के लिए भी रोजगार का सवाल जुड़ा है। इसी वजह से आंदोलन को स्थानीय समर्थन मिल रहा है।
मामला सिर्फ कारखाने का नहीं
कैलारस शक्कर कारखाने का मुद्दा काफी पुराना है। इससे किसान, कर्मचारी और स्थानीय कारोबार भी जुड़े हैं। अब जमीन और मशीनों के फैसले ने विवाद बढ़ाया है। विधायक ने सरकार से साफ जवाब मांगा है। अनशन के जरिए वह सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं। अब देखना होगा कि सरकार क्या कदम उठाती है। फिलहाल कैलारस में आंदोलन की तैयारी तेज है।
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