भोपाल के कमला नेहरु हॉस्पिटल में मरीजों का वार्ड तोड़ निजी कंपनी का PET-CT सेंटर खोलने की तैयारी
News in Short
- KNH में PET-CT सेंटर के विरोध में गैस पीड़ित संगठनों ने CM को लिखा पत्र
- आरोप: टेंडर GMC के नाम था, KNH को जगह देना शर्तों का उल्लंघन
- कहा- KNH गैस पीड़ितों के लिए बना, यहां निजी कंपनी को जगह देना गलत
- PET-CT के लिए रेडियोधर्मी बंकर से मरीजों, गर्भवती महिलाओं को खतरा
- मांग: प्रस्ताव तुरंत रद्द हो, सेंटर GMC में ही बने, KNH का ऑडिट हो
News in Detail
भोपाल के चार संगठनों ने सीएम को शिकायत भेजकर कमला नेहरु हॉस्पिटल में निजी सेंटर खोलने पर आपत्ति दर्ज कराई है। गैस पीड़ितों का कहना है कि गैस राहत अस्पताल में गैस से प्रभावितों का उपचार होता है। PET-CT सेंटर के विकिरण उन पर विपरीत प्रभाव डालेंगे। जब सेंटर के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज में जगह तय की गई थी तो उसे कमलानेहरु हॉस्पिटल में शिफ्ट क्यों किया जा रहा है। इससे अस्पताल से आपातकालीन वार्ड भी हटाना पड़ेगा।
अस्पताल में पीपीपी मोड पर PET-CT सेंटर खोलने को लेकर लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। गैस पीड़ित संगठन सरकार से शिकायत करने के बाद कोर्ट जाने की तैयारी भी कर रहे हैं। संगठनों ने सीएम डॉ. मोहन यादव और स्वास्थ्य मंत्री से प्राइवेट फर्म SIAMS को सेंटर के लिए आवंटित जगह रद्द करने की मांग की है। वहीं संगठनों ने इसे टेंडर की शर्तों की अनदेखी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया है।
विरोध के ये हैं बड़े कारण
- टेंडर की मूल शर्तों का उल्लंघन : MPHSC के टेंडर में लिखा था कि भोपाल का PET-CT सेंटर गांधी मेडिकल कॉलेज GMC में बनेगा। जबकि अचानक इसे कमलानेहरु हॉस्पिटल में शिफ्ट किया जा रहा है।
- गैस पीड़ितों से छिनेगी राहत : कमला नेहरु हॉस्पिटल यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी पीड़ितों को मुफ्त सुपर-स्पेशिलिटी इलाज देने के लिए बनाया गया है। सेंटर बनाने के लिए इमरजेंसी और रजिस्ट्रेशन वार्ड हटाया जा रहा हे।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी : सुप्रीम कोर्ट ने 9 अगस्त 2012 को गैस पीड़ितों को मुफ्त इलाज देना राज्य का संवैधानिक दायित्व बताया था। निजी कंपनी का सेंटर स्थापित होने से यहां सुविधाओं का निजीकरण हो जाएगा।
- रेडियोधर्मी बंकर से खतरा : PET-CT के लिए रेडियोधर्मी पदार्थों का बंकर बनेगा। इससे गैस त्रासदी प्रभावित मरीज, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के साथ ही यहां के स्टॉफ पर रेडियोएक्टिव किरणों का बुरा असर होगा।
जीएमसी में प्रबंधन के बेहतर इंतजाम
गैस पीड़ित संगठन की रचना ढींगरा, बालकृष्ण नामदेव का कहना है कि गांधी मेडिकल कॉलेज में पहले से ही न्युक्लियर मेडिसिन विभाग संचालित है। यहां न्युक्लियर मेडिसिन और रेडियोलॉजी से संबंधित उपकरणों से निकलने वाली रेडियोएक्टिव विकिरणों को नियंत्रित करने के इंतजाम हैं। जबकि कमलानेहरु गैस राहत अस्पताल रेडियोएक्टिव पदार्थों के प्रबंधन और इसके लिए अतिरिक्त जगह के लिहाज से पर्याप्त नहीं है।
FAQs
1. कमला नेहरू अस्पताल में PET-CT सेंटर का विरोध क्यों हो रहा है?
गैस पीड़ित संगठनों का कहना है कि MPHSC टेंडर के अनुसार सेंटर GMC में बनना था। KNH गैस पीड़ितों के लिए बना है। यहां PPP मोड पर निजी कंपनी को जगह देना टेंडर और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।
2. CM से क्या मांग की गई है?
19 मई 2026 को CM को पत्र भेजकर मांग की गई कि KNH में PET-CT सेंटर का प्रस्ताव तुरंत रद्द हो। सेंटर GMC में बने। KNH का ऑडिट हो। बंकर बनाने से पहले जनसुनवाई हो।
3. PET-CT सेंटर बनने से गैस पीड़ितों को क्या नुकसान होगा?
संगठनों के मुताबिक सेंटर के लिए इमरजेंसी वार्ड और पंजीकरण कक्ष हटेगा। रेडियोधर्मी बंकर से खतरा होगा। OPD-वार्ड प्रभावित होंगे। KNH का 60% हिस्सा पहले ही GMC के पास है। 48 विशेषज्ञ पद खाली हैं।
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