एमपी में नहीं थम रहा बाघों की मौत का सिलसिला, 5 दिन में 3 शावकों ने गंवाई जान
News In Short
- कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन T-141 के तीन शावक की मौत हो गई है।
- पांच दिनों में 21, 24 और 25 अप्रैल को एक-एक शावक की मौत हुई।
- पहले दो शावकों की मौत की वजह भूख बताई गई थी।
- तीसरे शावक का शव सरही वन परिक्षेत्र में मिला, फॉरेंसिक जांच जारी है।
- अप्रैल में कान्हा में अब तक कुल चार बाघों की मौत हो चुकी है।
News In Detail
बाघिन का दर्द, सिस्टम की चुप्पी
मध्यप्रदेश के मंडला जिले में स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व से एक के बाद एक दिल दहला देने वाली खबरें आ रही हैं। बाघिन T-141 के चार शावकों में से तीन की मौत हो चुकी है। सबसे दुखद बात यह है कि यह सब सिर्फ पांच दिनों में हुआ।
बताया जा रहा है कि अपने बच्चों को खोने के बाद बाघिन ने खाना-पीना बंद कर दिया है। वह उसी इलाके में बैठी है जहां उसके बच्चे थे। अब उसके पास सिर्फ एक शावक बचा है और उसकी हालत को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है।
तीसरे शावक का शव मिला नाले के पास
25 अप्रैल को मादा शावक का शव सरही वन परिक्षेत्र (Sarahi Forest Range) के बड़े अमाही नाला क्षेत्र के पास मिला। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पूरे इलाके को सुरक्षित किया गया और शव को पोस्टमार्टम तथा फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।
इससे पहले 21 अप्रैल को पहला नर शावक मृत मिला था। फिर 24 अप्रैल को दूसरे नर शावक ने भी दम तोड़ दिया था। प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों की मौत की वजह भूख बताई गई थी।
भूख से हुई मौत, फिर भी नहीं जागा विभाग
वन्यजीव (Wildlife) विशेषज्ञों का कहना है कि जब पहले शावक की मौत भूख से हुई, तभी सतर्क हो जाना चाहिए था। यदि बाघिन खुद शिकार करने में असमर्थ थी, तो विभाग की जिम्मेदारी थी कि वह भोजन का इंतजाम करे। ऐसा नहीं किया गया।
एमपी वन विभाग के सूत्रों ने माना है कि इस समय बाघिन और उसके बचे हुए एक शावक को बचाने के प्रयास होने चाहिए। वहीं, जमीन पर ऐसी कोई तैयारी नहीं दिख रही।
8 महीने में 10 बाघ और 5 तेंदुए
यह मामला अकेला नहीं है। अप्रैल महीने में अब तक कान्हा में कुल चार बाघों की मौत हो चुकी है। पिछले आठ महीनों के आंकड़े और भी चिंताजनक हैं। इस दौरान मध्यप्रदेश में 10 बाघ और पांच तेंदुओं की मौत हुई है। यह संख्या वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Conservation) के लिए खतरे की घंटी है।
मध्यप्रदेश को देश में टाइगर स्टेट (Tiger State) कहा जाता है। राज्य में बाघों की संख्या सबसे ज्यादा है। ऐसे में लगातार हो रही मौतें इस दर्जे पर सवाल उठाती हैं।
विभाग का जवाब, फॉरेंसिक का इंतजार
वन विभाग का कहना है कि तीसरे शावक की मौत का सही कारण फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा। विभाग ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है कि भविष्य में बाघिन और बचे शावक के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि देरी अब और बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
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