पन्ना टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन में लगा क्रशर प्लांट, क्या संकट में है बाघों की जान?

एमपी के पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगलों में खदानों की मंजूरी से बाघों के जीवन पर संकट मंडरा सकता है। राजनगर तहसील के बरद्वाहा गांव में एक पत्थर खदान की लीज दी गई है, जो टाइगर रिजर्व के ईको-सेंसिटिव जोन में आती है।

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Aman Vaishnav
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mp panna tiger reserve ken betwa project

News In Short

  • पन्ना टाइगर रिजर्व में खदानों की मंजूरी से बाघों को खतरा हो सकता है।

  • खदान टाइगर रिजर्व के ईको-सेंसिटिव जोन में स्थित है।

  • शोर और प्रदूषण से बाघों के इलाके पर असर पड़ सकता है।

  • केन-बेतवा परियोजना के तहत नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी ने लीज पर ली है।

News In Detail

पन्ना-छतरपुर जिले में अब भी पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगलों को नुकसान पहुंचाने का सिलसिला नहीं थम रहा है। राजनगर तहसील के बरद्वाहा गांव में 20 हेक्टेयर इलाके में पत्थर खदान की लीज दी गई है। यह लीज केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत ढोड़न बांध बनाने वाली नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी को दी गई है।

नियमों की अनदेखी

यह एक चौंकाने वाली बात है कि यह खदान टाइगर रिजर्व के ईको-सेंसिटिव जोन में आती है। नियमों की अनदेखी करते हुए कंपनी ने मौके पर क्रेशर प्लांट लगा दिया है। ये सब नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ से अनुमति मिलने से पहले ही हो गया है।

नजदीक ही बाघों का मूवमेंट

यह खदान रनगुवां बांध के पानी के क्षेत्र के पास ही स्थित है। खसरा नंबर 1361/1 पर यह खदान स्वीकृत है जो बाघों के मूवमेंट के पास ही है। यह खदान पन्ना टाइगर रिजर्व की चंद्रनगर रेंज से महज 800 मीटर दूर है। वहीं चंद्रनगर रेंज कोर एरिया की सीलोन और सेजा बीट से जुड़ती है।

बाघों का ठिकाना

इस इलाके में दो बाघिनों समेत कुल 5 बाघों का स्थायी ठिकाना है। भारी मशीनों के शोर और खनन के काम से इन बाघों के रहने के इलाके पर खतरा मंडरा रहा है। इन गतिविधियों से वन्यजीवों के रास्ते पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ईकोसेंसिटिव जोन में एनसीसी कंपनी का क्रशर प्लांट लग चुका है। यह प्लांट रनगवां बांध के भराव क्षेत्र के पास स्थित है। ये बाघ और तेंदुए की मूवमेंट वाली जगह है।

बाघों की जान को खतरा

केन-बेतवा प्रोजेक्ट से कई समस्याएं हो रही हैं। ब्लास्टिंग और क्रेशर से निकलने वाले शोर ने चंद्रनगर रेंज के इको-सिस्टम को परेशान कर दिया है। कोर एरिया में कैंप और भारी मशीनों से हो रहे प्रदूषण हो रहा है। इस कारण से बाघों को अपना इलाका छोड़ने पर मजबूर होना पड़ सकता है। बाघों का नया क्षेत्र में जाना उन्हें एक दूसरे से भिड़ने और कई बार जान गंवाने के खतरे में डाल सकता है।

एमपी के वाइल्ड लाइफ चीफ वार्डन शुभरंजन सेन ने अपना बयान दिया है। पन्ना टाइगर रिजर्व के ईकोसेंस्टिव जोन में क्रशर प्लांट लगाए जाने का मामला अब तक सामने नहीं आया है। टाइगर रिजर्व प्रबंधन से रिपोर्ट मांगी जाएगी। इसके बाद जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

वहीं एनसीसी प्रबंधन शैलेंद्र सिंह ने भी अपना बयान दिया है। हमारी कंपनी सभी नियमों का पालन कर रही है। हमने प्लांट स्थापित करने से पहले सारी जरूरी अनुमतियां ली थीं। फिलहाल, मौके पर खनन का काम शुरू नहीं किया गया है।

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