टाइगरों की कब्रगाह: 2026 में 11वें बाघ की मौत, पांच साल में 225

टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में ही टाइगर सुरक्षित नहीं है। हाल ही में रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में एक बाघ की मौत हो गई है। इससे सिस्टम पर सवाल उठता है कि आखिर बाघों की सुरक्षा में कमी कहां रह रही है?

author-image
Aman Vaishnav
एडिट
New Update
madhya pradesh rani durgavati sanctuary tiger deaths

मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट भी कहा जाता है, क्योंकि यहां 785 बाघ हैं। ये पूरे देश में सबसे ज्यादा हैं। वहीं बाघों की मौत की बढ़ती रफ्तार ने सबको चिंता में डाल दिया है। अब ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या टाइगर स्टेट ही अब बाघों के लिए सुरक्षित नहीं है?

NTCA (National Tiger Conservation Authority) की गाइडलाइन और सुरक्षा के सख्त दावे होने के बावजूद हर साल बाघों की मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। 2026 तो जैसे बाघों के लिए काल बनकर आया है। महज 45 दिन में 11 बाघ अलग- अगल कारणों से मारे गए हैं। 

रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत

हाल ही में एक ताजा मामला वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व से सामने आया है। यह टाइगर रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला हुआ है। यहां सोमवार, 16 फरवरी को 3 साल के एक नर बाघ की मौत हो गई। हम पिछले पांच सालों का आंकड़ा देखें तो यह संख्या 225 तक पहुंच चुकी है।

कुछ दिन पहले ही किया था शिफ्ट

26 दिन पहले ही इस बाघ को कान्हा टाइगर रिजर्व से शिफ्ट किया गया था। इस बाघ की निगरानी रेडियो कॉलर के जरिए की जा रही थी। जब दो दिन तक उसकी मूवमेंट नहीं देखी गई तो टीम मौके पर पहुंची। वहां बाघ को मृत पाया गया। 

वन मंडल अधिकारी क्या बोले? 

वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि अभयारण्य में मृत पाए गए नर बाघ की मौत क्षेत्र के संघर्ष के कारण हो सकती है। असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी। अधिकारी ने ये भी बताया कि घटनास्थल के पास दूसरे बाघ के पैरों के निशान भी मिले हैं।

क्या टाइगर स्टेट में बाघ अब भी सुरक्षित हैं?

सड़क हादसे और टेरिटोरियल फाइट जैसी वजहें बाघों की मौत का कारण बताई जा रही हैं। सवाल यह है कि हर टाइगर रिजर्व को करोड़ों का बजट मिल रहा है। फिर निगरानी में कमी कहां रह गई है? विशेषज्ञों का कहना है कि फील्ड मॉनिटरिंग को और मजबूत करना होगा। 

मुखबिर तंत्र को सुधारना होगा। साथ ही लापरवाही पर सख्त कार्रवाई करनी होगी। इसके बाद ही हालात सुधर सकते हैं। हर बार किसी बाघ की मौत के बाद एक सवाल सामने आ रहा है। क्या टाइगर स्टेट में बाघ अब भी सुरक्षित हैं?

डेढ़ महीने में 11 बाघों की मौत

वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे बताते हैं कि 2021 में 34 बाघों की मौत हुई थी। 2022 में 43 बाघों की मौत हुई थी। 2023 में 45 बाघों की मौत हुई थी। 2024 में 46 और 2025 में 54 बाघों की मौत हुई थी। 2026 की शुरुआत के सिर्फ डेढ़ महीने में ही 11 बाघों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़े सीधे सिस्टम पर सवाल उठाते हैं कि मप्र में बाघों की सुरक्षा को लेकर कितनी चिंता जताई जा रही है। 

ये खबरें भी पढ़िए...

14 दिन में 3 लेपर्ड और एक बाघ की मौत, हादसों के शिकार हो रहे वन्यजीव, जानें पूरी खबर

एमपी न्यूज: टेरिटोरियल फाइटिंग से बाघिन की मौत, मां से हुई थी मुठभेड़, पोस्टमार्टम में हुआ खुलासा

फसल सुरक्षा बनी बाघों के लिए काल, करंट लगने से दो बाघों की मौत

बाघ की मौत छिपाने और जलाने के मामले में दो वनकर्मी निलंबित, बालाघाट  DFO को नोटिस

एमपी न्यूज टाइगर स्टेट वन मंडल रानी दुर्गावती बाघ की मौत वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व
Advertisment