14 दिन में 3 लेपर्ड और एक बाघ की मौत, हादसों के शिकार हो रहे वन्यजीव, जानें पूरी खबर

राजस्थान में अलवर और कोटपूतली बहरोड़ जिले में 14 दिन में 3 लेपर्ड और एक बाघ की मौत हो गई हैं। इनका मुख्य कारण सड़क हादसा और आपसी संघर्ष शामिल हैं।

author-image
Ashish Bhardwaj
New Update
lapard

Photograph: (the sootr)

News In Short 

  • राजस्थान के दो जिले में 14 दिन में 3 लेपर्ड और 1 बाघ की मौत हुई।
  • 26 जनवरी को प्रतापगढ़ में एक लेपर्ड पेड़ किसान के खेत में फंदे से लटका मिला।
  • 7 फरवरी को नारायणपुर क्षेत्र में किसान ने अपने बचाव में लेपर्ड को कुल्हाड़ी मारी।
  • 2 फरवरी को अलवर में बाघिन एसटी-28 की टेरिटोरियल फाइट में मौत हो गई।
  • एक लेपर्ड की सड़क हादसे में मौत होने की आशंका जताई गई।

News In Detail

राजस्थान के अलवर जिले में सोमवार सुबह एक और लेपर्ड की मौत हो गई। यह लेपर्ड कुशालगढ़ से नारायणपुर रोड पर नांगलहेड़ी गांव के मुख्य रोड पर पाया गया। सड़क पर एक्सीडेंट के कारण उसकी मौत होने की आशंका जताई जा रही है। वन विभाग की टीम ने मृत शरीर का पोस्टमार्टम कराया। अलवर और कोटपूतली बहरोड़ जिले में 14 दिन के भीतर ही तीसरे लेपर्ड और एक बाघ की मौत हो चुकी है।

14 दिन में 3 लेपर्ड और 1 बाघ की मौत

इससे पहले 7 फरवरी को कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नारायणपुर के खरकड़ी गांव में एक किसान ने आत्मरक्षा में एक लेपर्ड को कुल्हाड़ी से मार दिया था। 2 फरवरी को अलवर के अकबरपुर रेंज में टाइग्रेस एसटी-28 का शव जंगल में पड़ा हुआ था। 26 जनवरी को प्रतापगढ़ के गुवाड़ा में एक लेपर्ड एक किसान के खेत में पेड़ पर फंदे से लटका हुआ पाया गया था।

फंदे से लटका हुआ लेपर्ड

26 जनवरी को प्रतापगढ़ जिले के गुवाड़ा गांव में एक पेड़ पर एक लेपर्ड फंदे से लटका हुआ मिला था। अधिकारियों ने इसकी जानकारी 28 जनवरी को दी। बाद में यह सामने आया कि एक ग्रामीण ने अपने खेत में जानवरों को रोकने के लिए फंदा लगाया था, जिसमें यह लेपर्ड फंस गया था। फंदा कसने के बाद लेपर्ड की मौत हो गई।

बाघिन की मौत: टेरिटोरियल फाइट या कुछ और

2 फरवरी को सरिस्का के अकबरपुर रेंज में बाघिन एसटी-28 का शव मिला था। अधिकारियों के अनुसार बाघिन की मौत टेरिटोरियल फाइट के कारण हुई थी। बाघिन के शरीर पर दो बड़े घाव थे, जो शायद एसटी-14 से हुई फाइट के कारण थे। बाघिन का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका कि फाइट किसके साथ हुई थी।

किसान और लेपर्ड के बीच संघर्ष

7 फरवरी को कोटपूतली के नारायणपुर थाना क्षेत्र के गांव खरकड़ी कला में एक किसान और लेपर्ड के बीच संघर्ष हुआ। इस संघर्ष में 10-15 मिनट तक लड़ाई चली, जिसमें किसान गंभीर रूप से घायल हो गया और लेपर्ड की मौत हो गई। बाद में यह खुलासा हुआ कि किसान ने अपने बचाव में लेपर्ड को कुल्हाड़ी मारी थी, जिससे उसकी मौत हो गई।

लैपर्ड मौत एक नजर में 

अलवर में एक लेपर्ड की मौत सड़क पर एक्सीडेंट से होने की आशंका है। उसे नांगलहेड़ी गांव के मुख्य रोड पर पाया गया था। 14 दिनों के भीतर 3 लेपर्ड और 1 बाघ की मौत हुई है, जिनमें एक बाघिन की मौत टेरिटोरियल फाइट में हुई, और 2 लेपर्ड की मौत संघर्ष और फंदे के कारण हुई।

क्यों हो रही है ये मौत

लेपर्ड की मौत का मुख्य कारण यह है कि वे जंगलों से आबादी के क्षेत्र की ओर आ रहे थे। इसके कारण या तो वे सड़क हादसों का शिकार हो गए, या फिर किसानों से संघर्ष हुआ। ऐसे हादसों की जिम्मेदारी तय करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए, लेपर्ड को केवल वन क्षेत्र तक ही सीमित किया जाना चाहिए, ताकि इस तरह के हादसों से बचा जा सके।

ये भी पढे़:-

प्यासा राजस्थान! पाताल से पानी खत्म, क्या अगली पीढ़ी को मिलेगा सिर्फ सूखा

रोडवेज की नई तबादला नीति लागू: बीमार, दिव्यांग, विधवा और महिला कर्मियों को मिलेगी प्राथमिकता

प्यार, पैसा और गद्दारी: हनुमानगढ़ का 'मजनू', जिसने पाकिस्तानी प्रेमिका के लिए देश को दांव पर लगाया

एमपी, सीजी और राजस्थान में थमा घने कोहरे और कड़ाके की सर्दी का सितम, बढ़ेगा तापमान

कोटपूतली-बहरोड़ अलवर मौत बाघ लेपर्ड
Advertisment