प्यार, पैसा और गद्दारी: हनुमानगढ़ का 'मजनू', जिसने पाकिस्तानी प्रेमिका के लिए देश को दांव पर लगाया

राजस्थान में हनुमानगढ़ का हरदीप सिंह पाकिस्तानी युवती के हनी ट्रैप में फंस गया। उसने इस युवती के लिए अपनों को लूटने का काला धंधा शुरू कर दिया।

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Purshottam Kumar Joshi
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Photograph: (the sootr)

News in Short

  • हनुमानगढ़ का हरदीप सिंह पाकिस्तानी युवती राबिया के हनी ट्रैप में फंसा।
  • राबिया ने पहले प्यारभरी बातों में फंसाया, फिर उससे ठगी का नेटवर्क चलवाया। 
  • हरदीप ठगी गई रकम को सीधे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर भेजता था पाकिस्तान।
  • अब तक हरदीप ठगी के करीब 3.26 करोड़ रुपए पहुंचा चुका है पाकिस्तान।
  • पुलिस की छापेमारी में मिनी 'साइबर कंट्रोल रूम' का खुलासा

News in Detail

राजस्थान के रेतीले धोरों से निकलकर एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के होश उड़ा दिए हैं। यह कहानी है हनुमानगढ़ के डबलीराठान निवासी हरदीप सिंह की, जिसने सरहद पार पाकिस्तान में बैठी एक युवती के 'हनीट्रैप' में फंसकर न केवल करोड़ों की साइबर ठगी की, बल्कि देश की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ कर डाला। ​जहां एक ओर सीमा हैदर प्यार के लिए सरहद लांघकर भारत आई, वहीं हरदीप ने अपनी कथित पाकिस्तानी प्रेमिका राबिया की खातिर अपनों को ही लूटने का काला कारोबार शुरू कर दिया।

​फेसबुक वाली 'मोहब्बत' और ठगी का जाल

​इस फिल्मी सी लगने वाली दास्तां की शुरुआत करीब दो साल पहले हुई। हरदीप के पास एक पाकिस्तानी नंबर से कॉल आया। पुलिस के अनुसार, हरदीप को शुरुआत में ही अंदेशा था कि यह एक फ्रॉड कॉल है, लेकिन दूसरी तरफ से हो रही मीठी बातों और राबिया के झांसे ने उसे इस कदर सम्मोहित किया कि वह सही-गलत का अंतर भूल गया।

प्यारी बातों में हरदीप को फंसाया

​राबिया ने हरदीप को प्यार के साथ-साथ अमीर बनने का सपना भी दिखाया। धीरे-धीरे हरदीप पाकिस्तानी साइबर अपराधियों के गिरोह का सबसे बड़ा मोहरा बन गया। राबिया ने उसे भारत में ठगी का नेटवर्क चलाने का काम सौंपा, जिसके बदले उसे कुल ठगी की रकम का 15 प्रतिशत कमीशन मिलता था, जबकि बाकी 85 प्रतिशत हिस्सा सीमा पार भेज दिया जाता था।

​क्रिप्टोकरेंसी का सहारा और 'ऑपरेशन सिंदूर'​

पकड़े जाने के डर से हरदीप ने तकनीक का शातिर इस्तेमाल किया। वह ठगी गई रकम को सीधे बैंक ट्रांसफर के बजाय क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर पाकिस्तान भेजता था। जांच में खुलासा हुआ है कि अब तक वह करीब 3.26 करोड़ रुपए पाकिस्तान पहुंचा चुका है।
 हरदीप अपनी प्रेमिका राबिया से मिलने के लिए इस कदर बेताब था कि उसने 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम से एक योजना बनाई। वह भारत छोड़कर हमेशा के लिए पाकिस्तान बसना चाहता था। इसके लिए उसने वीजा भी अप्लाई किया था, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती और तकनीकी खामियों की वजह से उसका यह 'नापाक' सपना अधूरा रह गया।

​कैसे बुना जाता था ठगी का ताना-बाना?

पाकिस्तानी साइबर गैंग ने भारतीय लोगों को शिकार बनाने के लिए हरदीप का बखूबी इस्तेमाल किया। हरदीप ने अपने भारतीय नंबरों के OTP पाकिस्तान भेजे। वहां राबिया का परिवार भारतीय नंबरों से वाट्सऐप चला रहा था, जिससे शिकार बनने वाले को लगता था कि वह किसी भारतीय से ही बात कर रहा है।
​सोशल मीडिया पर 'हर्ष साई फाउंडेशन' जैसे फर्जी एनजीओ और सस्ते सामान के विज्ञापन देकर लोगों को फंसाया जाता था। हरदीप गांव के गरीब मजदूरों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके बैंक खाते और एटीएम कार्ड किराए पर लेता था, ताकि पुलिस की जांच उन मजदूरों पर जाकर रुक जाए।

​मिनी 'साइबर कंट्रोल रूम' का खुलासा

​जब पुलिस ने हरदीप के ठिकाने पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी दंग रह गए। हरदीप अपने घर से ही एक मिनी 'साइबर कंट्रोल रूम' चला रहा था। पुलिस ने मौके से ​26 बैंक पासबुक और 18 एटीएम कार्ड, ​08 सिम कार्ड और 03 मोबाइल फोन तथा ​पाकिस्तान से संबंधित कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं।

​देशभर में फैला था जाल​

हरदीप की करतूतों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके खिलाफ देश के 14 राज्यों में 36 शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या हरदीप ने पैसों के अलावा देश की कोई गोपनीय जानकारी भी सीमा पार साझा की है।
​यह मामला उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के झांसे में आकर अपनी निजी जानकारी और मेहनत की कमाई गंवा देते हैं। फिलहाल, 'हनीट्रैप' का शिकार बना यह युवक अब सलाखों के पीछे अपने गुनाहों का हिसाब दे रहा है।

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