/sootr/media/media_files/2026/02/02/tiger-2026-02-02-19-30-17.jpg)
Photograph: (the sootr)
News in Short
राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में टेरिटोरियल फाइट के दौरान एक बाघिन की मौत हो गई।
बाघिन के शरीर पर आठ घाव पाए गए, और मौत लगभग 24 घंटे पहले हुई थी।
पोस्टमार्टम में कोई संदिग्ध साक्ष्य नहीं मिले, सभी अंग सही पाए गए।
बाघिन की मां, एसटी 14 की लोकेशन दो-तीन दिन से डाबली क्षेत्र में नहीं पाई गई है।
मृत बाघिन एसटी 14 की बेटी थी और उसने तीन मादा टाइगर को जन्म दिया था।
News in Detail
सुनील जैन @ अलवर
राजस्थान के मशहूर सरिस्का टाइगर रिजर्व से बुरी खबर आई है। सरिस्का में टेरिटोरियल फाइट के दौरान एक बाघिन की मौत हो गई। उसके शरीर पर आठ घाव मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह मौत करीब 24 घंटा पहले हुई। सोमवार को मृत बाघिन का एनटीसीए प्रोटोकोल के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया गया है। सरिस्का में अब 49 टाइगर रह गए हैं।
पोस्टमार्टम में नहीं मिले संदिग्ध साक्ष्य
सरिस्का के क्षेत्रीय निदेशक संग्राम सिंह कटियार ने बताया कि अकबरपुर रेंज के डाबली वन क्षेत्र में सोमवार 2 फरवरी 2026 को बाघिन एसटी 28 का शव पाया गया। उसकी मौत का कारण टेरिटोरियल फाइट माना गया है। बाघिन का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टर की टीम से कराया गया। इसमें उसके समस्त अंग पाए गए। कोई भी संदिग्ध साक्ष्य नहीं मिले।
टेरिटोरियल फाइट का हुई शिकार
संग्राम सिंह ने बताया कि मृत बाघिन की उम्र करीब 6 साल थी। डाबली के एरिया में पहाड़ की टॉप पर यह बाघिन मृत पाई गई। इसके पुट्ठे में करीब 8- 9 घाव पाए गए हैं। इससे यही संभावना है कि इसकी फाइटिंग मां एसटी 14 या बाघिन एसटी 17 से हो सकती है। संभावना यह भी है कि यह बाघिन सुकोला तक जाती थी। इस दौरान टेरिटरी को लेकर उसकी फाइटिंग हुई।
फाइटिंग में पैरों के पट्टे पर ही हमला
यह भी बताया जा रहा है कि आपसी फाइटिंग में बाघिन के पिछले पैरों के पट्ठे पर ही जबरदस्त प्रहार किए गए हैं। इससे वह जख्मी हो गई। इसकी डेड बॉडी भी करीब 24 घंटे पुरानी प्रतीत होती थी। डाबली अकबरपुर रेंज में आता है। लेकिन, इसकी मां एसटी 14 की लोकेशन दो-तीन दिन से इसके आसपास नहीं पाई गई है। मृत बाघिन एसटी 14 की बेटी थी। इसने तीन मादा टाइगर को जन्म दिया। ये मादा टाइगर एसटी 26, एसटी 27, एसटी 28 के नाम से हैं।
बाघिन एसटी 28 की यह थी खासियत
बाघिन एसटी 28 सरिस्का टाइगर रिजर्व (Sariska Tiger Reserve) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी, उसकी मौत एक गहरे दुखदायी घटना थी। इस बाघिन का जीवन विशेष रूप से बहुत महत्वपूर्ण था, क्योंकि वह सरिस्का के जंगली जीवन के पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभा रही थी। एसटी 28 को सरिस्का के "मां" के रूप में जाना जाता था क्योंकि उसने कई शावकों को जन्म दिया था। इनमें से कुछ जीवित रहकर जंगल के इकोसिस्टम का हिस्सा बने।
इस क्षेत्र में बाघों की संख्या को बढ़ाने और इसके जैविक संतुलन को बहाल करने के लिए महत्वपूर्ण था। एसटी 28 के बारे में यह भी कहा जाता था कि वह सरिस्का में बाघों की घटती संख्या को पुनः बढ़ाने में सक्रिय रूप से मदद कर रही थी।
सरिस्का का इतिहास
सरिस्का टाइगर रिजर्व राजस्थान के अलवर जिले में स्थित एक प्रमुख वन्यजीव अभ्यारण्य है। सरिस्का का ऐतिहासिक महत्व भी है, क्योंकि यह क्षेत्र प्राचीन समय में शाही परिवारों द्वारा शिकार के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
सरिस्का का इतिहास लगभग 1000 साल पुराना है। यह एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल भी है। यह क्षेत्र भारतीय इतिहास के कुछ प्रमुख घटनाओं का गवाह रहा है। 1955 में इसे सरिस्का वन्यजीव अभ्यारण्य के रूप में घोषित किया गया और बाद में 1978 में इसे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया गया।
1990 के दशक में बाघों की घटती संख्या के कारण यह स्थान एक महत्वपूर्ण संरक्षण प्रयास का हिस्सा बन गया। 2005 में सरिस्का में बाघों की पूरी आबादी के विलुप्त होने की खबरें आई। इससे भारत में वन्यजीव संरक्षण पर चर्चा हुई। इसके बाद भारतीय वन्यजीव संरक्षण विभाग ने बाघों के पुनः प्रजनन और संरक्षण के लिए कई कदम उठाए और सरिस्का में फिर से बाघों को लाने का अभियान शुरू किया।
आज सरिस्का टाइगर रिजर्व एक प्रमुख स्थल बन चुका है जहां बाघों और अन्य वन्यजीवों का संरक्षण किया जाता है। यह वन्यजीव प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है।
खबरें यह भी पढ़िए...
केंद्रीय करों में राजस्थान के हिस्से पर चली कैंची, विकास के समीकरणों पर पड़ेगा असर
एमपी, सीजी और राजस्थान में ठंड का अलर्ट... कहीं गिरे ओले तो कहीं छाया रहा घना कोहरा
केंद्रीय बजट से भजनलाल को उम्मीद, राजस्थान के विकास को मिलेगी अधिक मजबूती
राजस्थान रोडवेज में 'ऑपरेशन क्लीन राइड',फ्लाइंग टीम की बताते थे लोकेशन, 8 गिरफ्तार
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us