कर्नाटक सरकार के इस फैसले पर भड़के सीएम मोहन यादव, जानें क्यों
कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने सरकारी ठेकों में मुस्लिम ठेकेदारों के लिए 4% आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस फैसले के बाद कर्नाटक की राजनीति में हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 7 मार्च को इस फैसले का एलान किया था और इस पर कैबिनेट की बैठक में भी चर्चा की गई थी। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य सरकारी ठेकों में मुस्लिम समुदाय को अधिक अवसर देना है, जिससे वे अलग-अलग विभागों और निगमों के लिए वस्तु और सेवाओं की खरीद में भाग ले सकें।
मुस्लिम समुदाय को 4% आरक्षण
डॉ. मोहन यादव की प्रतिक्रिया
कर्नाटक सरकार के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के नेताओं का विरोध भी सामने आया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि यह फैसला लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका कहना था कि धर्म आधारित आरक्षण से समाज में भेदभाव की भावना पैदा होगी, और यह कदम अनैतिक है। डॉ. यादव ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा समाज में विभाजन फैलाने का काम किया है।
ये भी खबर पढ़ें... सीएम मोहन यादव की मांग पर अमित शाह ने भोपाल में NDU के रीजनल कैम्पस को दी मंजूरी
क्या है इतिहास?
राजनीति और न्यायिक परिप्रेक्ष्य
कर्नाटक के इस फैसले पर राजनीतिक दृष्टिकोण से बहस तेज हो गई है। कुछ राजनीतिक दल इसे मुस्लिम समुदाय के उत्थान के लिए एक अच्छा कदम मानते हैं, जबकि विपक्ष इसे केवल चुनावी लाभ के लिए उठाया गया एक कदम मानता है। वहीं, न्यायिक दृष्टिकोण से यह फैसला न्यायालयों द्वारा कई बार खारिज किए गए फैसलों से प्रभावित हो सकता है। इससे पहले भी न्यायालयों ने धर्म आधारित आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया था, और अब भी यह फैसला न्यायालय में चुनौती का सामना कर सकता है।
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक