कटनी रेत घोटाला: विस्टा सेल्स पर कलेक्टर कोर्ट ने ठोका 27.44 करोड़ का जुर्माना
समझें क्या है पूरा मामला
- कटनी में रेत स्टॉक में बड़ी गड़बड़ी मिली।
- पोर्टल पर 1.46 लाख घनमीटर रेत दर्ज थी।
- जांच में मौके पर सिर्फ 100 घनमीटर रेत मिली।
- कंपनी पर 27.44 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया।
- फर्म ने फैसले के खिलाफ अपील की बात कही है।
कटनी जिले में रेत के स्टॉक में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। मेसर्स विस्टा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के पोर्टल पर 1.46 लाख घनमीटर रेत दर्ज थी। मौके पर जांच में सिर्फ 100 घनमीटर रेत मिली।
कलेक्टर आशीष तिवारी की कोर्ट ने कंपनी पर 27.44 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। फर्म के वकील ने इस फैसले को गलत बताते हुए ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही है।
पूरा मामला क्या है?
यह गड़बड़ी 30 सितंबर 2023 की रात सामने आई। सेंड पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों और मौके के सत्यापन में बड़ा अंतर मिला। तहसील विजयराघवगढ़ के गांव पुरैनी में कंपनी के लाइसेंस वाले स्थल की जांच हुई थी। यह स्थल खसरा क्रमांक 43/1, 43/2 और 43/3 पर स्थित है, जिसका कुल रकबा 1.320 हेक्टेयर है।
जांच में पता चला कि पोर्टल पर रेत का स्टॉक 1,46,462 घनमीटर दर्ज था। लेकिन मौके पर सिर्फ 100 घनमीटर रेत मिली। इस तरह कुल 1,46,362 घनमीटर रेत गायब पाई गई। यह बहुत बड़ा अंतर था।
कैसे हुआ खुलासा
जब कंपनी से वैध बिक्री और परिवहन के दस्तावेज मांगे गए, तो फर्म कुछ नहीं दिखा पाई। ई-ट्रांजिट पास, बिल और रजिस्टर जैसे जरूरी कागज कंपनी के पास नहीं थे। संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म, मध्यप्रदेश के नियमों के अनुसार यह साफ संकेत है।
अगर पोर्टल पर बड़ा स्टॉक दिखे और मौके पर वह गायब मिले, तो इसका मतलब साफ है। बिना अभिवहन पास (TP – Transit Pass) के रेत की कालाबाजारी या अवैध परिवहन हुआ है। यही निष्कर्ष जांच अधिकारियों ने निकाला।
जुर्माने का गणित
गायब रेत की मात्रा के आधार पर रॉयल्टी की मूल राशि निकाली गई। यह राशि 1 करोड़ 83 लाख 95 हजार 310 रुपए बनी। नियम के अनुसार इस राशि का 15 गुना जुर्माना लगाया जाता है।
इस हिसाब से कुल जुर्माना 27 करोड़ 44 लाख 29 हजार 650 रुपए तय हुआ। कलेक्टर कोर्ट ने यह राशि सरकारी खजाने में जमा करने का आदेश दिया है। यह जिले में हाल के सबसे बड़े जुर्मानों में से एक है।
कंपनी की दलील और कोर्ट का जवाब
सुनवाई के दौरान कंपनी ने जांच प्रक्रिया में खामियों की बात कही। फर्म ने कहा कि जांच तकनीकी और प्रक्रिया के स्तर पर सही नहीं थी। लेकिन कोर्ट ने सभी सबूतों की बारीकी से जांच की।
पंचनामे, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने दलीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि 1.46 लाख घनमीटर रेत का गायब होना मामूली गलती नहीं है। अगर रेत वैध तरीके से बिकी होती, तो कंपनी के पास सबूत जरूर होते।
कंपनी के वकील योगेश सोनी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह फैसला अनुमान के आधार पर लिया गया।
आगे क्या होगा
कंपनी अब इस फैसले के खिलाफ डिवीजन कमिश्नर कोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रही है। देखना होगा कि ऊपरी अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है। तब तक जुर्माने का आदेश कलेक्टर कोर्ट के फैसले के मुताबिक ही लागू रहेगा।
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रेत घोटाला