कलेक्टरर्स की कुर्सी अब परफॉर्मेंस टेस्ट पर, कमजोर जिलों में बदलाव के संकेत
Ramanand Tiwari | Sept 05, 2026, 22:52 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्य प्रदेश में संभावित प्रशासनिक फेरबदल का आधार इस बार सिर्फ तबादला नीति नहीं, बल्कि जिलों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट बनती दिख रही है। जन विश्वास अभियान में जनता से संवाद की स्थिति कमजोर मिलने वाले जिलों में कलेक्टर बदले जा सकते हैं।
ऐसे समझें मामला...
- जन विश्वास अभियान ने जिलों की रिपोर्ट दी।
- कमजोर प्रदर्शन वाले कलेक्टर निशाने पर।
- 2017 बैच को मिल सकती है जिलों की कमान।
- मंत्रालय में अतिरिक्त प्रभार भी बदलेंगे।
- अगले सप्ताह फैसले की संभावना जताई जा रही।
7 जुलाई से चले जन विश्वास अभियान की रिपोर्ट के बाद कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों में नेतृत्व बदलने की तैयारी की चर्चा तेज है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के स्तर पर शुरुआती मंथन हो चुका है।
तबादले की फाइल में अब ‘परफॉर्मेंस’ भी
जन विश्वास अभियान के दौरान जिलों में लोगों की शिकायतों के निराकरण, अधिकारियों की सक्रियता और जनता से सीधे संपर्क की स्थिति देखी गई। कुछ जिलों की रिपोर्ट अपेक्षित स्तर की नहीं बताई जा रही है। यही रिपोर्ट अब प्रशासनिक फैसलों का आधार बन सकती है।
सरकार का नया संदेश: दफ्तर से बाहर निकलना होगा
यानी कलेक्टर की भूमिका अब केवल जिला प्रशासन चलाने तक सीमित नहीं, बल्कि सरकार की योजनाओं का जमीन पर असर दिखाने से भी जोड़ी जा रही है।
कमजोर जिलों में नई टीम का प्रयोग
अगर ऐसा होता है तो फेरबदल का एक और संदेश साफ होगा कि सरकार अपेक्षाकृत युवा अधिकारियों को मैदानी जिम्मेदारी देकर परिणाम आधारित प्रशासन पर जोर देना चाहती है।
मुख्यमंत्री की वापसी के बाद बढ़ेगी हलचल
हालांकि, अंतिम सूची और अधिकारियों के नाम पर निर्णय सरकार के स्तर पर होना बाकी है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित फेरबदल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
मंत्रालय भी फेरबदल से अछूता नहीं
इन जिम्मेदारियों को भी व्यवस्थित करने पर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्तर पर चर्चा की बात सामने आ रही है। अगर अगले सप्ताह बदलाव होता है तो जिलों के साथ मंत्रालय में भी दायित्वों का पुनर्गठन देखने को मिल सकता है।
असली कहानी तबादले की नहीं, जवाबदेही की है
शिकायत कितनी जल्दी सुलझी, अधिकारी जनता के बीच कितने सक्रिय रहे और सरकारी योजनाओं का असर जमीन पर कितना दिखा, इन सवालों का वजन बढ़ रहा है।
अब देखना यह है कि सरकार कमजोर रिपोर्ट वाले जिलों में केवल चेहरे बदलती है या इसके साथ जवाबदेही का कोई स्थायी सिस्टम भी खड़ा करती है। यही फैसला बताएगा कि यह फेरबदल सिर्फ प्रशासनिक कवायद है या मध्य प्रदेश में ‘परफॉर्मेंस बेस्ड ब्यूरोक्रेसी’ की शुरुआत।
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