पुलिस अब रिक्रूटर और सरगना तक पहुंचेगी; साइबर अपराधों पर लगाम लगाने की नई रणनीति
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 06, 2026, 10:46 IST
म्यूल अकाउंट यानी किराए के बैंक खातों पर पुलिस की निगरानी बढ़ेगी।
राजस्थान पुलिस ने म्यूल अकाउंट से जुड़े साइबर अपराधों की जांच के लिए नई एसओपी लागू की है। इस योजना के तहत अब जांच अधिकारियों को छह चरणों में 21 स्टेप्स पूरे करने होंगे। जांच का मुख्य उद्देश्य खाताधारक के अलावा रिक्रूटर और मुख्य सरगना तक पहुंचना है। इसके लिए डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच और कस्टडी चेन की जरुरत होगी।
समझें क्या है पूरा मामला
- म्यूल अकाउंट यानी किराए के बैंक खातों पर पुलिस की निगरानी बढ़ेगी।
- जांच छह चरणों में 21 स्टेप्स के तहत पूरी की जाएगी।
- खाताधारक के साथ रिक्रूटर और मुख्य सरगना तक पहुंचने की कोशिश होगी।
- बैंक ट्रांजेक्शन, UPI, SIM और डिजिटल डिवाइस की जांच होगी।
- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच और कस्टडी चेन अनिवार्य होगी।
इस एसओपी के तहत जांच अधिकारियों को छह चरणों में कुल 21 स्टेप्स पूरे करने होंगे। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर रहेगा कि ठगी की रकम खाते में कहां से आई, खाते को वास्तव में कौन चला रहा था, खाता किसने उपलब्ध कराया और आखिरकार रकम का फायदा किसे मिला।
खाताधारक के साथ पूरी चेन तक पहुंचेगी जांच
इसके लिए पैसों की पूरी दिशा यानी मनी ट्रेल को ट्रेस किया जाएगा। बैंक खाते से रकम निकलने, दूसरे खातों में ट्रांसफर होने, एटीएम से निकासी और चेक के इस्तेमाल तक की टाइमलाइन तैयार की जाएगी।
पुलिस का प्रयास होगा कि डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पूरे सिंडिकेट की भूमिका सामने लाई जाए, ताकि मामले में सिर्फ छोटे स्तर पर कार्रवाई न हो और नेटवर्क के पीछे मौजूद लोगों तक भी पहुंचा जा सके।
छह चरणों में होगी जांच
इसके बाद बैंक से KYC से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। जांच अधिकारी यह पता लगाएंगे कि खाता किसने खुलवाया, खाताधारक को बैंक तक कौन लेकर गया और खाता खोलते समय बैंक में लगे CCTV कैमरों में कौन-कौन लोग दिखाई दिए।
तीसरे चरण में डिजिटल जांच होगी। इसमें खाते से जुड़े SIM, IMEI, UPI बाइंडिंग और OTP एक्सेस की जानकारी का मिलान किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि खाते को वास्तव में कौन ऑपरेट कर रहा था। इसके बाद बैंक ट्रांजेक्शन का पूरा विश्लेषण किया जाएगा। रकम कब आई, कहां ट्रांसफर हुई और किस माध्यम से निकाली गई, इसका पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
फोरेंसिक जांच होगी जरूरी
जांच पूरी होने से पहले पूरे मामले की सुपरवाइजरी समीक्षा भी की जाएगी। इसके बाद ही चालान पेश करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोर्ट में पेश किए जाने वाले डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य मजबूत हों।
कई राज्यों की जांच व्यवस्था का किया अध्ययन
जयपुर रेंज के अलवर, दौसा, भिवाड़ी और खैरथल-तिजारा जैसे इलाकों में साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क की मौजूदगी को देखते हुए इस तरह की जांच व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजस्थान: धनतेरस के चलते पंचायत चुनाव की तारीखों में बड़ा बदलाव, जानें पूरा शेड्यूल
By Jageshwar prasad
बिजली कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन का पूरा हक, हाईकोर्ट के आदेश के बाद बकाया-ब्याज की मांग
By Ratan Kumar Mishra
छत्तीसगढ़ में OPS की मांग तेज: रायपुर में महारैली, सामूहिक अवकाश पर जाएंगे बिजली कर्मी, सरकार को अल्टीमेटम
By Harrison Masih
राष्ट्रीय योगासन खेल प्रतियोगिता के समापन समारोह आज, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा करेंगे शिरकत
By
तीसरी बार बढ़ी एमपी टीईटी की डेडलाइन, अब 11 अक्टूबर तक कर सकेंगे अप्लाई, मंत्री बोले- फार्म भरें, आंदोलन खत्म करें
By Amresh Kushwaha
90% युवा-युवतियां DJ पर नशे में नाचते हैं, पांच बच्चों वाले बयान के बाद फिर चर्चा में भाजपा सांसद गजेंद्र पटेल
By Aman Vaishnav
MP में ड्रग नेटवर्क पर नकेल की तैयारी, पर सवाल- एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को कितने मिलेंगे फ्री हैंड अधिकार?
By Ramanand Tiwari