केन-बेतवा लिंक परियोजना: बुंदेलखंड के सैकड़ों गांवों की बुझेगी प्यास, सुधरेगा भूजल स्तर
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड की सभी छोटी नदियां, तालाब और बड़े बांध जुड़ेंगे।
- मुख्य नहर करीब 222 किलोमीटर लंबी होगी।
- मध्य प्रदेश के 10 जिलों के 1900 से अधिक गांवों को सीधा फायदा मिलेगा।
- 44 लाख लोगों की प्यास बुझेगी और 8.11 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी।
- बारिश का पानी रोककर भूजल स्तर सुधारना इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है।
बुंदेलखंड को मिलेगी जल संकट से राहत
बुंदेलखंड का नाम आते ही सूखे और पानी की कमी की तस्वीरें सामने आने लगती है। यहां के लोग सालों से पानी के लिए जूझ रहे हैं। अब केन-बेतवा लिंक परियोजना इस संकट को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम बनने जा रही है।
इस परियोजना से बुंदेलखंड की सभी छोटी नदियों, तालाबों और बड़े बांधों को छोटी-छोटी नहरों के जरिए मुख्य नहर से जोड़ा जाएगा। केन-बेतवा की मुख्य नहर से सभी जलाशयों तक बारिश का पानी पहुंचाने का काम भी इसी परियोजना से होगा।
222 किलोमीटर लंबी होगी मुख्य नहर
केन-बेतवा लिंक परियोजना की मुख्य नहर करीब 222 किलोमीटर लंबी होगी। इसका सीधा फायदा टीकमगढ़, पन्ना, छतरपुर और झांसी जिलों को मिलेगा।
इस परियोजना के शुरू होने से मध्य प्रदेश के 10 जिलों को लाभ होगा, जिनमें छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा और सागर शामिल हैं। इन जिलों के 1900 से अधिक गांवों की 8.11 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इतनी बड़ी जमीन पर खेती से किसानों की आय में सीधा बदलाव आएगा।
भूजल सुधारना है असली मकसद
इस परियोजना (Ken-Betwa Link Project) का मुख्य उद्देश्य सिर्फ सिंचाई नहीं है। बारिश के पानी को रोककर भूजल स्तर में सुधार करना इसका सबसे अहम लक्ष्य है। इसके लिए जल संसाधन विभाग सर्वे करा रहा है। इसमें सभी क्षेत्रीय तालाबों, बांधों और नदियों की मैपिंग होगी। नहरों के माध्यम से इन्हें जोड़ने पर कितनी लागत आएगी इसकी डिटेल रिपोर्ट तैयार होगी।
परियोजना के सीईओ प्रशस्त कुमार दीक्षित ने बताया कि बुंदेलखंड के छोटे से लेकर बड़े-बड़े बांधों और जलाशयों को केन-बेतवा की मुख्य नहर से जोड़ा जाएगा। इससे मुख्य नहर पर किसानों की निर्भरता कम होगी और बारिश के पानी को ज्यादा से ज्यादा रोका जा सकेगा।
44 लाख लोगों की प्यास बुझेगी
यह परियोजना क्षेत्रीय लोगों को जल संकट और सूखे की मार से राहत देगी। मध्य प्रदेश की 44 लाख आबादी की प्यास इससे बुझेगी। पानी की उपलब्धता बढ़ने से वॉटर लेवल भी बेहतर होगा। इससे न सिर्फ पेयजल की समस्या हल होगी बल्कि खेती के लिए भी पानी की कमी दूर होगी। किसानों को हर साल मानसून के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।
कृषि और रोजगार दोनों को मिलेगा बढ़ावा
8.11 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होने से कृषि उत्पादन में बड़ा इजाफा होगा। इससे स्थानीय रोजगार के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। पानी की नियमित उपलब्धता से किसान दो फसलें ले सकेंगे जो अभी तक संभव नहीं था।
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FAQ
- केन-बेतवा लिंक परियोजना क्या है और इससे बुंदेलखंड को कैसे फायदा होगा?
केन-बेतवा लिंक परियोजना एक नदी जोड़ो परियोजना है जिसमें केन नदी के पानी को बेतवा नदी से जोड़ा जाएगा। इससे बुंदेलखंड की सभी छोटी नदियों, तालाबों और बड़े बांधों को करीब 222 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर से जोड़ा जाएगा। मध्यप्रदेश के 10 जिलों के 1900 से अधिक गांवों की 8.11 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 44 लाख आबादी को पेयजल मिलेगा।
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