केन-बेतवा प्रोजेक्ट में रिकॉर्ड का रोड़ा: गलत खसरा नंबर होने से 49 गांवों के लोगों की बढ़ी मुस्किलें
बुंदेलखंड की प्यास बुझाने वाली महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना अब एक नई तकनीकी उलझन में फंसती नजर आ रही है। परियोजना जहां अपने दूसरे चरण की ओर कदम बढ़ा चुकी है, वहीं जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज गलतियों ने किसानों की नींद उड़ा दी है।
डिजिटल पोर्टल पर खसरा नंबर और रकबे का मिलान न होने के कारण 49 गांवों के ग्रामीणों को अब अपने हक का मुआवजा डूबने का डर सता रहा है।
पोर्टल पर लापता हुई किसानों की जमीन
केन-बेतवा प्रोजेक्ट के तहत लिंक नहर के निर्माण के लिए 100 मीटर की चौड़ाई में भूमि अधिग्रहण किया जाना है। जिले के 49 गांवों की लगभग 165 हेक्टेयर भूमि इस दायरे में आ रही है। वहीं, समस्या तब शुरू हुई जब ग्रामीणों ने ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जमीन की जानकारी जांची।
किसानों का आरोप है कि पोर्टल पर खसरा नंबर (Survey Number) और जमीन का रकबा (Area) गलत दर्ज है। इस तकनीकी खामी की वजह से उनका भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन सिस्टम में शो नहीं हो रहा है। ग्रामीणों को अंदेशा है कि यदि रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं हुए, तो मुआवजे की राशि तकनीकी फाइलों में ही दफन होकर रह जाएगी।
219 किमी लंबा जाल और 4000 करोड़ का बजट
परियोजना के ब्लूप्रिंट के अनुसार, लिंक नहर की कुल लंबाई 219 किलोमीटर होगी। इसे दो पैकेज में बांटा गया है। पहले पैकेज में ढोड़न बांध से धसान नदी तक 100 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण होगा। इसके लिए 4000 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित किया गया है।
वर्तमान में ढोड़न बांध का काम तेजी से चल रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण के ईई (Executive Engineer) विवेक मित्तल के अनुसार, डीपीआर (Detailed Project Report) को मंजूरी मिलते ही जमीनी काम शुरू कर दिया जाएगा।
परियोजना का सबसे अहम हिस्सा
इस पूरी परियोजना में छतरपुर जिला केंद्र बिंदु बना हुआ है। कुल 219 किमी लंबी नहर का 107 किमी हिस्सा अकेले इसी जिले की सीमा से होकर गुजरेगा। इसमें राजनगर के गंज, कदौहां, लखेरी, महाराजपुर के मलहरा, मऊ, और नौगांव के लुगासी, नयागांव सहित सटई तहसील के बेडरी और करोंदिया जैसे गांव शामिल हैं। इन क्षेत्रों में नहर आने से सिंचाई क्षमता में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। इससे क्षेत्र की सूरत बदल सकती है।
किसानों ने लगाए लापरवाही के आरोप
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर किसानों में गहरा असंतोष है। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने ग्रामसभा के प्रस्तावों को नजरअंदाज किया है। किसानों का कहना है कि उन्हें बिना जानकारी दिए भूमि अधिग्रहण के फैसले ले लिए गए।
इसके अलावा, प्रति वोटर पैकेज में भेदभाव और मुआवजे की दरों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। किसानों की मांग है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी (Transparent) बनाया जाए और उनके पैतृक हक का उचित दाम दिया जाए।
ये खबर भी पढ़िए...
केन-बेतवा प्रोजेक्ट : मुआवजे के बदले किसान से मांगी रिश्वत, 50 हजार लेते पटवारी गिरफ्तार
BJP ऑफिस बनाने वाली कंपनी को मिला केन-बेतवा प्रोजेक्ट का ठेका: जीतू पटवारी
केन-बेतवा लिंक परियोजना: अफसरों के बंगले बचाने को बदल गया प्रोजेक्ट, 12 हजार करोड़ बढ़ी लागत
केन-बेतवा लिंक की धीमी रफ्तार: मुख्य सचिव ने गुरुवार को बुलाई काउंसिल की बैठक