आरक्षण पर हाईकोर्ट सख्त: AEO भर्ती में EWS सीटों में कटौती पर विभाग को नोटिस
समझें क्या है पूरा मामला...
- कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती (AEO) में EWS सीटों की संख्या घटाई गई है।
- पहले EWS वर्ग के लिए 444 पद तय किए गए थे।
- आवेदन की आखिरी तारीख पर ये पद घटकर 37 हो गए।
- इस बदलाव को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगी।
- कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से चार हफ्ते में जवाब मांगा है।
मध्य प्रदेश में कृषि विभाग ने भर्ती निकाली थी। इस भर्ती में 2,784 कृषि विस्तार अधिकारी ( Agriculture Extension Officer) चुने जाने थे। भर्ती परीक्षा MPESB के जरिए आयोजित होनी थी।
इसका विज्ञापन 24 जून 2026 को जारी हुआ था। शुरुआत में EWS के लिए 444 पद रखे गए थे। EWS का मतलब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग है।
इन पदों को देखकर उम्मीदवारों ने तैयारी शुरू की। कई उम्मीदवारों ने आवेदन भी इसी आधार पर किया, लेकिन अब 444 पदों की जगह केवल 37 पद रह गए हैं।
आवेदन शुरू होने के बाद बदली सीटों की संख्या
भर्ती के लिए आवेदन तीन जुलाई से शुरू हुए थे। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 17 जुलाई थी। इसी तारीख को EWS सीटों में बड़ा बदलाव हुआ। कृषि विभाग ने एक नया आदेश जारी किया।
इस आदेश में EWS पदों की संख्या घटाई गई। 444 पदों की जगह अब केवल 37 पद रह गए। यानी EWS सीटों में 407 पदों की कमी हुई। इस बदलाव ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए।
आखिरी दिन बदलाव से नुकसान हुआ
नर्मदापुरम के मोहित सिंह पवार ने याचिका लगाई है। मोहित की उम्र 22 साल बताई गई है। वह सिवनी मालवा तहसील के खुटवासा गांव के निवासी हैं। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की। मामला रिट याचिका क्रमांक 33972/2026 में दर्ज है।
मोहित ने सीटों में कटौती को चुनौती दी है। उनका कहना है कि बदलाव अचानक किया गया। आवेदन की आखिरी तारीख पर यह फैसला हुआ। ऐसे समय में उम्मीदवार पहले ही तैयारी कर चुके थे।
याचिका में नियम बदलने पर उठाया गया सवाल
याचिका में भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाया गया। याचिकाकर्ता ने इसे बीच प्रक्रिया में नियम बदलना बताया। उनका कहना है कि विज्ञापन के बाद बदलाव नहीं होना चाहिए। खासकर आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के समय बदलाव हुआ। इससे उम्मीदवारों की उम्मीदों पर सीधा असर पड़ा।
याचिका में इसे मनमाना फैसला बताया गया है। याचिकाकर्ता ने समान अवसर के अधिकार का मुद्दा उठाया। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 14 का सहारा लिया गया। अनुच्छेद 16(1) के तहत अवसर की समानता भी बताई गई। अनुच्छेद 16(6) के तहत EWS आरक्षण का मुद्दा भी उठाया गया है।
444 से 37 सीटों तक पहुंची संख्या
याचिका में सीटों की गणना पर भी सवाल है। याचिकाकर्ता ने पूछा कि 37 सीटें कैसे तय हुईं। विभाग ने किस आधार पर संख्या बदली, यह सवाल है। याचिका में रोस्टर और गणना की जानकारी मांगी गई।
स्वीकृत पदों का रिकॉर्ड भी मांगा गया है। सीटों की गणना से जुड़ी फाइलें भी महत्वपूर्ण हैं। गणना में गलती हुई थी, तो रिकॉर्ड दिखाना होगा।
याचिका में विभाग से इसकी स्पष्ट जानकारी मांगी गई।
उम्मीदवारों की उम्मीद का सवाल भी उठा...
- मूल विज्ञापन में EWS के 444 पद दिखाए गए थे।
- उम्मीदवारों ने उसी संख्या को देखकर आवेदन किया।
- उम्मीदवारों ने आवेदन प्रक्रिया में समय और पैसा लगाया।
- इसके बाद सीटों की संख्या अचानक बदल गई।
याचिकाकर्ता ने इसे उम्मीदवारों के हित के खिलाफ बताया। उनके अनुसार इससे EWS उम्मीदवारों पर सीधा असर पड़ा। विभाग पर पारदर्शिता की कमी का आरोप भी लगाया गया। इसी आधार पर कोर्ट से राहत की मांग हुई।
कृषि विभाग और MPESB भी मामले में पक्षकार
मामले में मध्य प्रदेश सरकार सहित कृषि विभाग के प्रमुख सचिव भी पक्षकार हैं। कृषि संचालनालय के संचालक और अपर संचालक स्थापना सहित MPESB को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है।MPESB इस भर्ती परीक्षा आयोजित करने वाला मंडल है।
हाई कोर्ट में नोटिस जारी कर दिया चार हफ्तों का समय
मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल धगत ने की। मामला हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के सामने आया। कोर्ट ने याचिका में उठाए मुद्दों पर सुनवाई की।
इसके बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया।
कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों से जवाब मांगा है। जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय मिला। अब विभाग को सीटों में कटौती का आधार बताना होगा। रिकॉर्ड सामने आने के बाद मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
अब 444 सीटों की बहाली पर टिकी नजर
इस मामले का असर EWS उम्मीदवारों पर पड़ सकता है। फिलहाल हाईकोर्ट ने अंतिम फैसला नहीं दिया है। कोर्ट ने केवल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। चार हफ्ते में विभाग अपना पक्ष रखेगा। इसके बाद याचिका पर आगे सुनवाई होगी।
सबसे अहम सवाल 444 और 37 सीटों का रहेगा। सीटों में बदलाव का आधार भी जांच के दायरे में है। अगली सुनवाई में तस्वीर और साफ हो सकती है।
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