हाईकोर्ट में लगे आरोप: एमपी पुलिस बैंड भर्ती में भ्रष्टाचार, मनमानी की बू, कैसे हुआ खेला
Sanjay Gupta | Aug 27, 2026, 13:45 IST
mp police band recruitment 679 posts row
एमपी पुलिस की 679 पदों पर पुलिस बैंड भर्ती विवादों में आ गई है। इंदौर और जबलपुर हाईकोर्ट में दो याचिकाओं के चलते इंटरव्यू पर रोक लग गई है। इंदौर की याचिका में सीधे तौर पर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद के आरोप लगे हैं।
मध्य प्रदेश में लंबे समय बाद पुलिस मुख्यालय ने हर जिले में पुलिस बैंड शुरू करने की तैयारी की। इसके लिए अप्रैल 2026 में 679 पदों पर भर्ती निकाली गई। भर्ती की प्रक्रिया तीन चरणों में होनी थी। अगस्त में दूसरे चरण का रिजल्ट जारी हुआ और इंटरव्यू शुरू करने की तैयारी थी। लेकिन इसी बीच भर्ती विवादों में घिर गई। इंदौर और जबलपुर हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिकाएं दायर हो गईं। इसके बाद कोर्ट ने इंटरव्यू पर रोक लगा दी और भर्ती से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड भी तलब कर लिया।
पहला चरण स्किल टेस्ट था। इसमें उम्मीदवारों के पसंद के वाद्य यंत्र (Musical Instrument) को बजाने की क्षमता देखी जानी थी। यह सिर्फ स्क्रीनिंग के लिए था, इसके कोई अंक नहीं जुड़ने थे।
दूसरा चरण बैंड वादन टेस्ट था। यह 60 अंकों का था। इसके अलावा 15 बोनस अंक भी रखे गए थे। अगर कोई उम्मीदवार तीन अलग-अलग वाद्य यंत्र बजाकर दिखाता है तो उसे हर वाद्य यंत्र के लिए 5-5 अंक मिलते। यानी यह चरण कुल 75 अंकों का था। इसमें अनारक्षित, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को कम से कम 50% अंक और एसटी-एससी वर्ग के उम्मीदवारों को 40% अंक हासिल करना जरूरी था।
तीसरा चरण इंटरव्यू का था। इसमें 25 अंक रखे गए थे। इस चरण के लिए पदों की संख्या से तीन गुना उम्मीदवारों को बुलाया जाना था। इसके बाद वादन टेस्ट और इंटरव्यू के कुल 100 अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार होनी थी।
विवाद की शुरुआत अगस्त में दूसरे चरण यानी वादन टेस्ट के रिजल्ट के बाद हुई। इस रिजल्ट में किसी भी उम्मीदवार के अंक जारी नहीं किए गए। सिर्फ इंटरव्यू के लिए योग्य उम्मीदवारों की सूची जारी की गई। इसमें भी 1271 उम्मीदवारों को ही शामिल किया गया, जो कुल पदों की संख्या के करीब दोगुना थे।
जबकि भर्ती नियमों के मुताबिक इंटरव्यू के लिए पदों की संख्या से तीन गुना उम्मीदवारों को बुलाना था। यानी 679 पदों के लिए 2000 से ज्यादा उम्मीदवारों को मौका मिलना चाहिए था। लेकिन करीब 700 उम्मीदवारों को इंटरव्यू से बाहर कर दिया गया। इसी को लेकर सवाल उठने लगे और मामला एमपी हाईकोर्ट तक पहुंच गया।
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हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में लगाई गई याचिका में नीलेश सिंह और विपिन बैरवा ने मध्य प्रदेश सरकार औरपुलिस मुख्यालय को पक्षकार बनाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और मनमानी की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भर्ती के किसी भी चरण में पारदर्शिता नहीं रखी गई, चाहे वह स्किल टेस्ट हो या वादन टेस्ट।
उनका आरोप है कि मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय के भर्ती अधिकारियों ने अपनी मर्जी से नियमों में बदलाव किए और प्रक्रिया को अपने हिसाब से चलाया। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बैकडोर एंट्री का रास्ता तैयार किया गया।
स्किल टेस्ट पर सवाल
स्किल टेस्ट सिर्फ छंटनी के लिए रखा गया था, लेकिन इसमें किसी उम्मीदवार को बाहर करने के लिए कोई साफ नियम या मानक तय नहीं थे। उम्मीदवारों से सिर्फ वाद्य यंत्र बजाकर दिखाने को कहा गया। उनकी योग्यता साबित करने के लिए किसी तरह के सर्टिफिकेट या दस्तावेज भी नहीं लिए गए।
वादन टेस्ट में सबसे ज्यादा सवाल
सबसे ज्यादा सवाल वादन टेस्ट को लेकर उठ रहे हैं। इसके लिए पुलिस भर्ती अधिकारियों ने 6 कमेटियां बनाई थीं, जिन्हें उम्मीदवारों का वादन टेस्ट लेना था। हर दिन करीब 750 उम्मीदवारों को टेस्ट के लिए बुलाया गया। यानी एक कमेटी के पास रोजाना लगभग 125 उम्मीदवारों को परखने की जिम्मेदारी थी।
इतने उम्मीदवारों का टेस्ट लेने के लिए हर व्यक्ति को औसतन सिर्फ तीन-चार मिनट का समय मिल पाया। इसी कम समय में उम्मीदवार को अपना वाद्य यंत्र बजाकर दिखाना था और कमेटी को उसकी प्रतिभा का आकलन करना था।
मैन्युअल टेस्ट होने पर उठे सवाल
वादन टेस्ट पूरी तरह मैन्युअल तरीके से कराया गया। इसमें जांच के लिए कोई तकनीकी व्यवस्था नहीं थी और न ही किसी तरह का लिखित टेस्ट लिया गया। ऐसे में उम्मीदवारों को कितने अंक देने हैं, यह पूरी तरह कमेटी के मूल्यांकन पर निर्भर था।
हालांकि इस टेस्ट की वीडियोग्राफी कराई गई थी, जिसे तीन साल तक सुरक्षित रखा जाएगा। लेकिन अंक देने की प्रक्रिया में पूरी जिम्मेदारी कमेटी के हाथ में थी। इसमें किसी तरह की कंप्यूटर आधारित व्यवस्था नहीं थी, जिससे मूल्यांकन को अलग तरीके से जांचा जा सके।
अंक जारी नहीं करने और उम्मीदवारों की संख्या पर विवाद
इस टेस्ट के बाद सिर्फ इंटरव्यू के लिए चुने गए उम्मीदवारों की सूची जारी की गई। इसमें किसी भी उम्मीदवार के वादन टेस्ट के अंक सार्वजनिक नहीं किए गए कि उसे 75 में से कितने अंक मिले हैं। सिर्फ चयनित उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी गई।
इसके अलावा भर्ती नियमों के मुताबिक पदों की संख्या से तीन गुना उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना था। यानी 679 पदों के हिसाब से 2037 उम्मीदवारों को मौका मिलना चाहिए था। लेकिन सिर्फ 1271 उम्मीदवारों को ही इंटरव्यू के लिए बुलाया गया और करीब 700 उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इससे भर्ती प्रक्रिया के तय नियमों में बदलाव हुआ, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार भर्ती शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता।
इस मामले में इंदौर और जबलपुर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं। अब सबसे पहले इंदौर हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई होगी। कोर्ट ने सभी पक्षकारों से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 7 सितंबर को तय की गई है।
वहीं, जबलपुर हाईकोर्ट में दायर याचिका में पुलिस अधिकारियों से भर्ती से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। तब तक भर्ती प्रक्रिया के इंटरव्यू पर रोक जारी रहेगी।
याचिकाकर्ता नीलेश सिंह ने द सूत्र से बातचीत में मध्य प्रदेश पुलिस बैंड भर्तीप्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें गड़बड़ी हुई है। उनका कहना है कि वादन टेस्ट में मनमानी की गई और कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए ज्यादा अंक दिए गए, जबकि बाकी उम्मीदवारों को कम अंक देकर बाहर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी गई।
याचिका से जुड़े दस्तावेज देखिए--
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चयन की प्रक्रिया तीन चरणों में होनी थी
दूसरा चरण बैंड वादन टेस्ट था। यह 60 अंकों का था। इसके अलावा 15 बोनस अंक भी रखे गए थे। अगर कोई उम्मीदवार तीन अलग-अलग वाद्य यंत्र बजाकर दिखाता है तो उसे हर वाद्य यंत्र के लिए 5-5 अंक मिलते। यानी यह चरण कुल 75 अंकों का था। इसमें अनारक्षित, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को कम से कम 50% अंक और एसटी-एससी वर्ग के उम्मीदवारों को 40% अंक हासिल करना जरूरी था।
तीसरा चरण इंटरव्यू का था। इसमें 25 अंक रखे गए थे। इस चरण के लिए पदों की संख्या से तीन गुना उम्मीदवारों को बुलाया जाना था। इसके बाद वादन टेस्ट और इंटरव्यू के कुल 100 अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार होनी थी।
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कहां से उठा विवाद
जबकि भर्ती नियमों के मुताबिक इंटरव्यू के लिए पदों की संख्या से तीन गुना उम्मीदवारों को बुलाना था। यानी 679 पदों के लिए 2000 से ज्यादा उम्मीदवारों को मौका मिलना चाहिए था। लेकिन करीब 700 उम्मीदवारों को इंटरव्यू से बाहर कर दिया गया। इसी को लेकर सवाल उठने लगे और मामला एमपी हाईकोर्ट तक पहुंच गया।
mp police band recruitment
हाईकोर्ट की याचिका में क्या कहा गया
उनका आरोप है कि मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय के भर्ती अधिकारियों ने अपनी मर्जी से नियमों में बदलाव किए और प्रक्रिया को अपने हिसाब से चलाया। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बैकडोर एंट्री का रास्ता तैयार किया गया।
अब इस भर्ती में खेला होने के लिए कहां छोड़ी विंडो
स्किल टेस्ट सिर्फ छंटनी के लिए रखा गया था, लेकिन इसमें किसी उम्मीदवार को बाहर करने के लिए कोई साफ नियम या मानक तय नहीं थे। उम्मीदवारों से सिर्फ वाद्य यंत्र बजाकर दिखाने को कहा गया। उनकी योग्यता साबित करने के लिए किसी तरह के सर्टिफिकेट या दस्तावेज भी नहीं लिए गए।
वादन टेस्ट में सबसे ज्यादा सवाल
सबसे ज्यादा सवाल वादन टेस्ट को लेकर उठ रहे हैं। इसके लिए पुलिस भर्ती अधिकारियों ने 6 कमेटियां बनाई थीं, जिन्हें उम्मीदवारों का वादन टेस्ट लेना था। हर दिन करीब 750 उम्मीदवारों को टेस्ट के लिए बुलाया गया। यानी एक कमेटी के पास रोजाना लगभग 125 उम्मीदवारों को परखने की जिम्मेदारी थी।
इतने उम्मीदवारों का टेस्ट लेने के लिए हर व्यक्ति को औसतन सिर्फ तीन-चार मिनट का समय मिल पाया। इसी कम समय में उम्मीदवार को अपना वाद्य यंत्र बजाकर दिखाना था और कमेटी को उसकी प्रतिभा का आकलन करना था।
मैन्युअल टेस्ट होने पर उठे सवाल
वादन टेस्ट पूरी तरह मैन्युअल तरीके से कराया गया। इसमें जांच के लिए कोई तकनीकी व्यवस्था नहीं थी और न ही किसी तरह का लिखित टेस्ट लिया गया। ऐसे में उम्मीदवारों को कितने अंक देने हैं, यह पूरी तरह कमेटी के मूल्यांकन पर निर्भर था।
हालांकि इस टेस्ट की वीडियोग्राफी कराई गई थी, जिसे तीन साल तक सुरक्षित रखा जाएगा। लेकिन अंक देने की प्रक्रिया में पूरी जिम्मेदारी कमेटी के हाथ में थी। इसमें किसी तरह की कंप्यूटर आधारित व्यवस्था नहीं थी, जिससे मूल्यांकन को अलग तरीके से जांचा जा सके।
अंक जारी नहीं करने और उम्मीदवारों की संख्या पर विवाद
इस टेस्ट के बाद सिर्फ इंटरव्यू के लिए चुने गए उम्मीदवारों की सूची जारी की गई। इसमें किसी भी उम्मीदवार के वादन टेस्ट के अंक सार्वजनिक नहीं किए गए कि उसे 75 में से कितने अंक मिले हैं। सिर्फ चयनित उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी गई।
इसके अलावा भर्ती नियमों के मुताबिक पदों की संख्या से तीन गुना उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना था। यानी 679 पदों के हिसाब से 2037 उम्मीदवारों को मौका मिलना चाहिए था। लेकिन सिर्फ 1271 उम्मीदवारों को ही इंटरव्यू के लिए बुलाया गया और करीब 700 उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इससे भर्ती प्रक्रिया के तय नियमों में बदलाव हुआ, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार भर्ती शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता।
इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ में हो सकता है पहले फैसला
वहीं, जबलपुर हाईकोर्ट में दायर याचिका में पुलिस अधिकारियों से भर्ती से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। तब तक भर्ती प्रक्रिया के इंटरव्यू पर रोक जारी रहेगी।
क्या बोल रहे याचिकाकर्ता
याचिका से जुड़े दस्तावेज देखिए--
744a3074-cdb
f6adab1d-482
829a8d75-198
09f3ba79-23a
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