जमीन बांटने में CG अव्वल, दूसरे स्थान पर MP, हजारों परिवारों को मिला अपना प्लॉट
समझें क्या है पूरा मामला...
- भूमिहीन परिवारों को जमीन देने में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है।
- प्रदेश के 95.84% भूमिहीन परिवारों को अब तक प्लॉट मिल चुका है।
- छत्तीसगढ़ इस मामले में पहले नंबर पर बना हुआ है।
- यह जानकारी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में दी है।
- मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना के तहत लोगों को मुफ्त भूखंड मिल रहा है।
भूमिहीन परिवारों को अपना घर देने की कोशिश अब रंग ला रही है। मध्य प्रदेश इस मामले में देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। प्रदेश के करीब 96 प्रतिशत भूमिहीन परिवारों को घर बनाने के लिए जमीन मिल चुकी है। यह जानकारी खुद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में दी है। इस सफलता के पीछे राज्य की मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना का बड़ा हाथ माना जा रहा है।
MP में कितने परिवारों को मिली जमीन
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (Pradhan Mantri Awas Yojana Gramin) के तहत मध्य प्रदेश में 38 हजार 490 भूमिहीन परिवार चिह्नित किए गए थे। इनमें से 36 हजार 890 परिवारों को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। यानी प्रदेश के 95.84 प्रतिशत भूमिहीन परिवारों को अब अपना प्लॉट मिल गया है। सिर्फ 1,600 परिवार अभी जमीन मिलने का इंतजार कर रहे हैं। यह आंकड़ा प्रदेश सरकार की योजनाओं की सफलता दिखाता है।
छत्तीसगढ़ है पहले नंबर पर
प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए तो छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से आगे निकल गया है। छत्तीसगढ़ में 99.81 प्रतिशत भूमिहीन परिवारों को जमीन दी जा चुकी है। यही वजह है कि पूरे देश में छत्तीसगढ़ पहले नंबर पर है और मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर आता है। हालांकि कुल संख्या के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग है। इस मामले में मध्य प्रदेश देश में चौथे स्थान पर है।
कौन से राज्य आगे हैं संख्या में
कुल भूमिहीन परिवारों को जमीन देने के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है। महाराष्ट्र में एक लाख 21 हजार 202 परिवारों को जमीन मिल चुकी है। इसके बाद राजस्थान का नंबर आता है, जहां 63 हजार 925 परिवारों को प्लॉट मिला है। असम में भी 41 हजार 202 भूमिहीन परिवारों को जमीन दी जा चुकी है। मध्य प्रदेश इन राज्यों के बाद चौथे स्थान पर आता है। लेकिन प्रतिशत के लिहाज से मध्य प्रदेश का प्रदर्शन कहीं बेहतर है।
आवास बनाने का लक्ष्य कितना पूरा हुआ
पीएमएवाई-जी (Pradhan Mantri Awas Yojana Gramin) के तहत मध्य प्रदेश में कुल 57 लाख 74 हजार 572 आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 54 लाख 18 हजार 955 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। अब तक 43 लाख 78 हजार 398 आवास पूरे भी हो चुके हैं। लक्ष्य के मुकाबले अभी भी 13 लाख 96 हचार 174 आवास अधूरे हैं। यह आंकड़ा पूरी योजना के आवासों का है, इसे सिर्फ भूमिहीन परिवारों से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
देशभर में कितने परिवार हैं पात्र
6 अगस्त 2026 तक पूरे देश में करीब पांच लाख 62 हजार भूमिहीन परिवार पात्र के रूप में चिह्नित किए गए। इनमें से तीन लाख 26 हजार 183 परिवारों को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। वहीं दो लाख 35 हजार 736 परिवारों को अभी जमीन का इंतजार है। सरकार अब इस काम को तेजी से पूरा करने में जुटी है। इसके लिए राज्यों को समयबद्ध लक्ष्य और पर्याप्त फंड दिया जा रहा है।
2029 तक दो करोड़ नए घरों का लक्ष्य
सरकार ने पीएमएवाई-जी के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी है। इसके तहत मार्च 2029 तक दो करोड़ अतिरिक्त घर बनाए जाएंगे। इस काम में तेजी लाने के लिए नियमित समीक्षा की जाएगी। डैशबोर्ड के जरिए हर राज्य की प्रगति पर नजर रखी जाएगी। ग्रामीण राजमिस्त्रियों को भी खास ट्रेनिंग दी जा रही है।
चुनाव से पहले शुरू हुई थी योजना
भूमिहीन और गरीब परिवारों को प्लॉट देने के लिए एक खास योजना बनाई गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनवरी 2023 में यह योजना शुरू की थी। यह विधानसभा चुनाव से ठीक पहले का समय था। योजना की शुरुआत टीकमगढ़ जिले से की गई थी। इसके तहत पात्र परिवारों को बिना किसी शुल्क के 600 वर्गफीट तक जमीन का पट्टा दिया जाना तय हुआ था।
टीकमगढ़ में बांटे गए थे हजारों पट्टे
योजना की शुरुआत टीकमगढ़ की बकपुरा ग्राम पंचायत से हुई थी। उस मौके पर 10 हजार 918 हितग्राहियों को आवासीय भूखंड के पट्टे दिए गए थे। इन प्लॉट की कुल कीमत करीब 129 करोड़ 37 लाख रुपए आंकी गई थी। पूरे प्रदेश से इस योजना के लिए करीब 14 लाख आवेदन आए थे। इससे पता चलता है कि लोगों में इस योजना को लेकर कितनी दिलचस्पी है।
सरकारी जमीन नहीं तो खरीदकर देंगे प्लॉट
योजना शुरू करते वक्त शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा भरोसा दिया था। उन्होंने कहा था कि हर गरीब परिवार को जरूरत के हिसाब से जमीन मिलेगी। जहां सरकारी जमीन उपलब्ध होगी, वहां वही जमीन दी जाएगी। जहां सरकारी जमीन नहीं होगी, वहां जमीन खरीदकर प्लॉट दिया जाएगा। इस भरोसे ने योजना को गांव-गांव तक लोकप्रिय बना दिया।
योजना में कौन होगा पात्र
इस योजना का फायदा उन्हीं परिवारों को मिलता है जिनके पास खुद का घर नहीं है। जिस परिवार के पास पांच एकड़ से कम जमीन है, वह भी पात्र माना जाता है। पीडीएस (Public Distribution System) दुकान से राशन लेने वाले परिवार भी आवेदन कर सकते हैं। परिवार का कोई सदस्य आयकरदाता नहीं होना चाहिए। साथ ही परिवार में कोई सरकारी नौकरी में भी नहीं होना चाहिए। आवेदक का नाम 1 जनवरी 2021 की मतदाता सूची में दर्ज होना जरूरी है।
पति-पत्नी दोनों के नाम मिलेगा भूखंड
योजना के तहत पात्र परिवार के पति और पत्नी दोनों को संयुक्त मालिकाना हक मिलेगा। भूखंड बिना किसी प्रीमियम और भू-भाटक के मुफ्त दिया जाएगा। भूखंड का अधिकतम क्षेत्रफल 60 वर्गमीटर यानी 600 वर्गफीट तय किया गया है। अगर आबादी क्षेत्र में जमीन उपलब्ध नहीं होती तो कलेक्टर के पास खास अधिकार है। वे मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237 के तहत जमीन को आबादी घोषित कर सकते हैं।
योजना के लिए कैसे करें आवेदन
योजना में आवेदन के लिए सबसे पहले SAARA पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। होम पेज पर मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना का विकल्प दिखेगा। इस पर क्लिक करने के बाद Apply के बटन को दबाना होगा। इसके बाद स्क्रीन पर आवेदन फॉर्म खुल जाएगा। फॉर्म में जिला, तहसील, पटवारी हल्का और ग्राम की जानकारी भरनी होगी। इसके साथ मोबाइल नंबर जैसी निजी जानकारी भी देनी होगी। आखिर में डिक्लेरेशन बॉक्स टिक करके सबमिट बटन दबाना होगा।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
योजना में आवेदन के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज साथ रखने होंगे। इनमें आधार कार्ड सबसे जरूरी दस्तावेज है। पहचान पत्र और निवास प्रमाणपत्र भी देना अनिवार्य है। इसके अलावा आय प्रमाणपत्र और आयु प्रमाणपत्र भी मांगा जाता है। मोबाइल नंबर और बैंक डिटेल्स भी फॉर्म में भरनी होती है। साथ ही पासपोर्ट साइज फोटो भी अपलोड करनी होती है।
FAQ
- मध्य प्रदेश में कितने भूमिहीन परिवारों को जमीन मिल चुकी है?
मध्य प्रदेश में कुल 38,490 भूमिहीन परिवार चिह्नित किए गए थे। इनमें से 36,890 परिवारों को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। यह करीब 95.84 प्रतिशत है। इस मामले में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि छत्तीसगढ़ पहले नंबर पर है। - मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना में कौन आवेदन कर सकता है?
जिस परिवार के पास खुद का घर नहीं है, वह इस योजना के लिए पात्र है। 5 एकड़ से कम जमीन वाले परिवार भी आवेदन कर सकते हैं। परिवार में कोई आयकरदाता या सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए। आवेदक का नाम मतदाता सूची में दर्ज होना जरूरी है। - मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना के तहत कितनी जमीन और किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?
योजना के तहत अधिकतम 600 वर्गफीट यानी 60 वर्गमीटर भूखंड मुफ्त दिया जाता है। यह भूखंड पति-पत्नी दोनों के संयुक्त नाम पर होता है। आवेदन के लिए आधार कार्ड, पहचान पत्र, निवास और आय प्रमाणपत्र जरूरी हैं। इसके साथ बैंक डिटेल्स और फोटो भी देनी होती है।
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