उज्जैन महाकाल मंदिर में आज से शिवनवरात्रि शुरू, 10 दिनों तक अलग-अलग स्वरूपों में सजेंगे बाबा
आज (6 फरवरी) से महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का महापर्व शिवनवरात्रि शुरू हो गया है। यह खास उत्सव बाबा महाकाल और मां पार्वती के विवाह के मौके पर मनाया जाता है। यह परंपरा पूरे देश में सिर्फ उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही होती है।
आगामी 10 दिनों तक भगवान महाकाल भक्तों को नौ अलग-अलग दिव्य रूपों में दर्शन देंगे। बाबा का श्रृंगार केसर, चंदन और खुशबूदार द्रव्यों से किया जा रहा है। श्रद्धालु इस अद्भुत उत्सव का हिस्सा बनने के लिए उज्जैन पहुंच रहे हैं।
कोटेश्वर महादेव के पूजन से मंगलारंभ
शुक्रवार (6 फरवरी) सुबह कोटेश्वर महादेव के विशेष पूजन से अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। पुजारी घनश्याम शर्मा के नेतृत्व में 11 ब्राह्मणों ने अभिषेक किया।
गर्भगृह में भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक और पूजन हुआ। भगवान को एकादश-एकादशनी रूद्राभिषेक की पवित्र धारा से स्नान कराया गया।
नए वस्त्रों और आभूषणों से सजे त्रिलोकीनाथ
बाबा महाकाल को लाल, गुलाबी और पीले रंग के वस्त्र पहनाए गए। उन्हें मेखला, दुपट्टा, मुकुट और मुंड-माला से सुसज्जित किया गया। छत्र और आभूषणों के साथ महाकाल का मुखारविंद दमक उठा है। भक्त बाबा की एक झलक पाने के लिए घंटों प्रतीक्षा करते हैं।
केसर-चंदन का उबटन से दिव्य श्रृंगार
शाम को भगवान को सबसे पहले चंदन का उबटन लगाया गया। इसके पश्चात बाबा महाकाल को सुगंधित जल से स्नान कराया गया। जलधारी पर पवित्र हल्दी अर्पित कर विशेष मांगलिक रस्में निभाई गईं। दोपहर में भोग आरती के बाद बाबा का भांग श्रृंगार हुआ।
10 दिनों तक चलेगा ये महापर्व
उज्जैन महाशिवरात्रि मेंमहाकाल मंदिर में 6 फरवरी से 15 फरवरी तक उत्सव चलेगा। मान्यता है कि शिवनवरात्रि केवल उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में होती है। जैसे देवी की नवरात्रि होती है, वैसे ही शिव नवरात्रि मनाई जाती है। श्रद्धालु इन 10 दिनों में बाबा के अद्भुत रूपों को निहारते हैं।
9 दिनों के नौ विशेष स्वरूप
- 6 फरवरी: चंदन और भांग से दिव्य श्रृंगार किया गया।
- 7 फरवरी: बाबा नवीन वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे।
- 8 फरवरी: शेषनाग श्रृंगार के रूप में भगवान का पूजन होगा।
- 9 फरवरी: घटाटोप श्रृंगार से महाकाल का दरबार सजेगा।
- 10 फरवरी: छबीना श्रृंगार में बाबा की छवि अत्यंत मनमोहक होगी।
- 11 फरवरी: होलकर श्रृंगार के साथ रियासतकालीन परंपरा निभाई जाएगी।
- 12 फरवरी: मनमहेश श्रृंगार के दर्शन कर भक्त धन्य होंगे।
- 13 फरवरी: उमा महेश श्रृंगार में गौरी-शंकर के दर्शन होंगे।
- 14 फरवरी: शिव तांडव श्रृंगार में भगवान का रौद्र रूप दिखेगा।
- 15 फरवरी: सप्तधान का मुखौटा लगाकर महाशिवरात्रि मनाई जाएगी।
प्रशासन की व्यवस्था
इस बार महाशिवरात्रि पर 10 लाख भक्तों के आने की उम्मीद है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने दर्शन की नई व्यवस्था बनाई है। सामान्य दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को लंबा पैदल चलना होगा। शीघ्र दर्शन के लिए 250 रुपए की विशेष रसीद उपलब्ध है।
125 किलो सूखे मेवे का लगेगा विशेष भोग
महाकाल मंदिर महाशिवरात्रि मेंसंध्या आरती में प्रतिदिन भगवान को छप्पन भोग लगता है। चांदी की थाली में 125 किलो मेवे अर्पित किए जाएंगे। इसमें राजघराना उबटन और शुद्ध स्वर्ण भस्म का प्रयोग होगा। ये परंपरा सदियों से मंदिर में लगातार चली आ रही है।
16 फरवरी को होगा साल का सबसे बड़ा आयोजन
महाशिवरात्रि (महाशिवरात्रि का त्योहार) की अगली सुबह 16 फरवरी को सेहरा सजेगा। सुबह 4 बजे फूलों का भव्य सेहरा बांधा जाएगा। दोपहर 12 बजे साल में एक बार होने वाली भस्मआरती होगी। इसके साथ ही 10 दिवसीय इस महापर्व का समापन होगा।
ये खबरें भी पढ़ें...
Maha Shivratri 2026: उज्जैन में मचेगी शिव-विवाह उत्सव की धूम, Mahakal नौ स्वरूपों मे देंगे दर्शन
महाशिवरात्रि 2026 पर जरूर करें ये उपाय, चमक उठेगी आपकी किस्मत
क्या आप जानते हैं फाल्गुन नहीं, इस महीने में हुआ था शिव और पार्वती का विवाह
Narmada Jayanti: शिव के पसीने की एक बूंद से कैसे हुआ इस मोक्षदायिनी नदी का जन्म