CMO दो लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार, 40 लाख के बिल पास कराने मांगे थे 4 लाख
समझें क्या है पूरा मामला
- मंडला CMO गजानन नाफड़े रिश्वत लेते पकड़े गए।
- लोकायुक्त टीम ने नगर पालिका कार्यालय में कार्रवाई की।
- ठेकेदार ने रिश्वत मांगने की शिकायत दर्ज कराई थी।
- भुगतान के बदले चार लाख रुपए मांगने का आरोप है।
- पहली किस्त में दो लाख रुपए लेते गिरफ्तार हुए।
मध्यप्रदेश के मंडला में लोकायुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। नगर पालिका CMO गजानन नाफड़े को 2 लाख रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से बिल भुगतान के बदले 4 लाख रुपए मांगे थे। शुक्रवार को नगर पालिका कार्यालय में लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई कर उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।
ठेकेदार ने की थी शिकायत
जबलपुर जिले के पिंडरई निवासी ज्ञानचंद बेन सरकारी पंजीकृत ठेकेदार हैं। उनकी उम्र 57 साल है। उन्होंने और उनकी पत्नी मंजू बेन ने सीएमओ (Chief Municipal Officer) गजानन नाफड़े के खिलाफ शिकायत की थी। मंजू बेन के नाम पर एमएस पलक बेन नाम की फर्म पंजीकृत है।
इस फर्म को मंडला नगर पालिका से साल 2024-25 और 2025-26 में एलईडी लाइट और फिटकरी सप्लाई का ठेका मिला था। वहीं ज्ञानचंद बेन को पाइप जॉइंट और वाटर कूलर सप्लाई का काम मिला था।
39 लाख का भुगतान पहले हो चुका था
लोकायुक्त के मुताबिक मंजू बेन की फर्म को पहले ही 39 लाख 23 हजार रुपए का भुगतान हो चुका था। इसके बाद ज्ञानचंद बेन अपने हिस्से के करीब 15 लाख रुपए के भुगतान के लिए सीएमओ से मिले।
आरोप है कि सीएमओ ने इस भुगतान के बदले पुरानी राशि का 12 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत के तौर पर मांगा। यह रकम करीब 4 लाख रुपए बताई गई है।
2 लाख की पहली किस्त पर बनी बात
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि सीएमओ पहली किस्त के तौर पर 2 लाख रुपए लेने पर राजी हो गए थे।
शुक्रवार को ज्ञानचंद बेन यह रकम लेकर नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। जैसे ही रुपए दिए गए, लोकायुक्त टीम ने सीएमओ को रंगे हाथ पकड़ लिया।
सर्किट हाउस में हुई आगे की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद टीम सीएमओ को नगर पालिका कार्यालय से सर्किट हाउस लेकर गई। वहां पंचनामा की प्रक्रिया पूरी की गई। टीम अब मामले से जुड़े दस्तावेज और सबूत इकट्ठा कर रही है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस
लोकायुक्त निरीक्षक जितेंद्र यादव के मुताबिक सीएमओ के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(1)बी और 13(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। यह अधिनियम साल 2018 में संशोधित हुआ था।
शिकायतकर्ता ज्ञानचंद बेन का कहना है कि उनकी पत्नी की फर्म का भुगतान होने के बाद उनका अपना 15 लाख रुपए का भुगतान अटका हुआ था। इसी भुगतान के एवज में रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की गई थी।
यह मामला सरकारी दफ्तरों में चल रहे भ्रष्टाचार की एक और मिसाल है। लोकायुक्त की कार्रवाई से नगर पालिका के कामकाज पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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2 लाख की रिश्वत लेते हुए CMO गिरफ्तार