मंदसौर जॉइंट कलेक्टर के खिलाफ जारी हुआ वारंट, बढ़ी मुश्किलें, जानें क्या है मामला
समझें क्या है पूरा मामला...
- इंदौर फैमिली कोर्ट ने जॉइंट कलेक्टर पर कार्रवाई की।
- राहुल चौहान पर 5.56 लाख रुपए बकाया हैं।
- कोर्ट आदेश के बाद भी भुगतान नहीं किया गया।
- सुनवाई में अधिकारी खुद उपस्थित नहीं हुए।
- कोर्ट ने वसूली और गिरफ्तारी वारंट के निर्देश दिए।
शुरू से जानें पूरा मामला
यह मामला निर्मला नाम की महिला ने दर्ज कराया था। उन्होंने अपने पति राहुल चौहान के खिलाफ सीआरपीसी (CrPC – Code of Criminal Procedure) की धारा-125 के तहत भरण-पोषण का आवेदन दिया था। राहुल चौहान फिलहाल मंदसौर की गरोठ तहसील में जॉइंट कलेक्टर के पद पर तैनात हैं।
सुनवाई के बाद प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने 4 मई 2026 को अंतरिम आदेश पारित किया था। इसके तहत हर महीने 20 हजार रुपए भरण-पोषण देने को कहा गया था।
5.56 लाख बकाया, सिर्फ 40 हजार जमा किए
कोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक आदेश के बावजूद राहुल चौहान ने नियमित भुगतान नहीं किया। गणना के अनुसार उन पर 5 लाख 56 हजार रुपए बकाया हो गए।
पिछली सुनवाई में उन्होंने केवल 40 हजार रुपए ही जमा किए। इसके बाद प्रार्थिया ने बकाया राशि की वसूली के लिए कोर्ट में अलग से आवेदन दिया।
सुनवाई में खुद नहीं आए अधिकारी
सुनवाई के दौरान राहुल चौहान खुद अदालत में मौजूद नहीं थे। उनकी तरफ से अधिवक्ता विनोद पाटीदार पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्हें अपने मुवक्किल से आगे की पैरवी को लेकर कोई निर्देश नहीं मिला है।
कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रतिपक्ष की ओर से प्रभावी उपस्थिति नहीं है। साथ ही कोर्ट के आदेश के बावजूद बकाया राशि का भुगतान भी नहीं हुआ।
इसे गंभीर मानते हुए कोर्ट ने वसूली वारंट जारी करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को तय की गई है। कोर्ट ने बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।
अफसर पर दहेज प्रताड़ना की FIR भी
इस मामले के साथ एक और गंभीर आरोप जुड़ा है। इंदौर पुलिस ने राहुल चौहान के खिलाफ दहेज प्रताड़ना की FIR (First Information Report) दर्ज की है।
पत्नी का आरोप है कि शादी के बाद से ही उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता रहा। उनका यह भी कहना है कि अधिकारी होने के दबाव के चलते पहले रिपोर्ट दर्ज नहीं हो पाई थी। अब यह मामला भी जांच के दायरे में है।
अगली सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि अधिकारी बकाया राशि जमा करते हैं या कोर्ट को आगे और सख्ती दिखानी पड़ती है।
पत्नी का क्या था आरोप
पत्नी निर्मला चौहान ने FIR में अपनी कहानी बताई है। FIR के अनुसार उनकी शादी 16 दिसंबर 2018 को हुई थी, तब राहुल चौहान ट्रेनी डिप्टी कलेक्टर थे। निर्मला ने बताया कि उनकी मां ने हैसियत अनुसार सारा गृहस्थी का सामान दिया था। इसके बाद भी शादी के अगले ही दिन पति ने उन्हें कम दहेज की बात पर गालियां देनी शुरू कर दीं।
मारपीट करना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना रोज का काम हो गया था। कुछ दिन बाद उनकी मां ने जमीन रजिस्ट्री के लिए 50 हजार रुपए ससुर को दिए थे।
जगह-जगह किया उत्पीड़न
साल 2019 में पति-पत्नी UPSC की तैयारी के लिए दिल्ली गए थे। आरोप है कि वहां भी राहुल चौहान ने अपनी पत्नी के साथ मारपीट जारी रखी। फिर 31 जुलाई 2019 को पति उन्हें मां के घर छोड़कर अचानक चले गए। उन्होंने तलाक देने की धमकी भी दी थी। इसके बाद वह कई महीनों तक उन्हें लेने के लिए नहीं आए। पीड़िता का कहना है कि पति ने दहेज की मांग करते हुए उनका मोबाइल भी तोड़ दिया था। पीड़िता ने बताया कि पति का कहना था कि उनकी मां ने लाखों रुपए दहेज में नहीं दिए हैं।
जबरन गर्भपात का आरोप
पीड़िता ने सबसे बड़ा आरोप लगाया है कि गर्भावस्था के दौरान भी उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया। इस प्रताड़ना के कारण उनका मिसकेरेज (गर्भपात) हो गया था। उनका इलाज बॉम्बे अस्पताल इंदौर में चला था।
बाद में धार जाने पर एक और खुलासा हुआ। महिला का कहना है कि उनके पति किसी अन्य महिला के साथ रह रहे थे। जहां-जहां अधिकारी पदस्थ रहा, वहीं-वहीं उत्पीड़न होता रहा। पति लगातार उन पर तलाक के लिए दबाव बना रहे थे।
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