जॉइंट कलेक्टर राहुल चौहान के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस, पत्नी बोली- कई बार पीटा, दूसरी महिला के साथ रह रहे थे
Sanjay Dhiman | Nov 29, 2025, 14:43 IST
Photograph: (the sootr)
जॉइंट कलेक्टर राहुल चौहान पर उनकी पत्नी ने दहेज उत्पीड़न और मारपीट का आरोप लगाया है। उनकी पत्नी का कहना है कि कम दहेज मिलने की वजह से उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया।
Mandsaur. मंदसौर जिले में पदस्थ जॉइंट कलेक्टर राहुल चौहान के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज किया गया है। यह मामला उनकी पत्नी निर्मला चौहान ने दर्ज करवाया है।
इस एफआईआर (FIR) में दहेज प्रताड़ना, मारपीट और जबरन अबॉर्शन कराने के जैसे आरोप लगाए हैं। पत्नी निर्मला चौहान का कहना है कि लंबे समय से वह प्रताड़ना का शिकार हो रही थीं। प्रशासनिक और राजनैतिक पहुंच के चलते कई साल तक उनकी सुनवाई नहीं हुई।
पत्नी निर्मला चौहान ने FIR में अपनी कहानी बताई है। FIR के अनुसार उनकी शादी 16 दिसंबर 2018 को हुई थी, तब राहुल चौहान ट्रेनी डिप्टी कलेक्टर थे। निर्मला ने बताया कि उनकी मां ने हैसियत अनुसार सारा गृहस्थी का सामान दिया था। इसके बाद भी शादी के अगले ही दिन पति ने उन्हें कम दहेज की बात पर गालियां देनी शुरू कर दीं।
मारपीट करना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना रोज का काम हो गया था। कुछ दिन बाद उनकी मां ने जमीन रजिस्ट्री के लिए 50 हजार रुपए ससुर को दिए थे।
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साल 2019 में पति-पत्नी UPSC की तैयारी के लिए दिल्ली गए थे। आरोप है कि वहां भी राहुल चौहान ने अपनी पत्नी के साथ मारपीट जारी रखी। फिर 31 जुलाई 2019 को पति उन्हें मां के घर छोड़कर अचानक चले गए। उन्होंने तलाक देने की धमकी भी दी थी। इसके बाद वह कई महीनों तक उन्हें लेने के लिए नहीं आए। पीड़िता का कहना है कि पति ने दहेज की मांग करते हुए उनका मोबाइल भी तोड़ दिया था। पीड़िता ने बताया कि पति का कहना था कि उनकी मां ने लाखों रुपए दहेज में नहीं दिए हैं।
पीड़िता ने सबसे बड़ा आरोप लगाया है कि गर्भावस्था के दौरान भी उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया। इस प्रताड़ना के कारण उनका मिसकेरेज (गर्भपात) हो गया था। उनका इलाज बॉम्बे अस्पताल इंदौर में चला था।
पीड़िता के अधिवक्ता प्रवीण कचोले ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि आरोपी वरिष्ठ अधिकारी हैं, इसलिए कार्रवाई करवाने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहले सरदारपुर थाने में शिकायत देने पर आवेदन लेने से मना कर दिया गया था। महिला थाना पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। इस FIR में भी पति की पोस्ट जॉइंट कलेक्टर का जिक्र जानबूझकर नहीं किया गया है। यह दिखाता है कि असरदार लोग अब भी प्रभावशाली हैं।
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इस गंभीर मामले में जॉइंट कलेक्टर राहुल चौहान ने भी अपनी बात रखी है। उन्होंने सारे आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। उनका कहना है कि वह साढ़े तीन साल से खुद ही तलाक का केस लड़ रहे हैं।
गर्भपात करवाने की बात को उन्होंने सरासर झूठा बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि बॉम्बे हॉस्पिटल के दस्तावेज से सच्चाई पता चल सकती है। उन्होंने दावा किया कि इलाज का 15 लाख रुपए का खर्च उन्होंने खुद ही उठाया था। अब सच्चाई तो कोर्ट की सुनवाई से ही सामने आएगी।
इस एफआईआर (FIR) में दहेज प्रताड़ना, मारपीट और जबरन अबॉर्शन कराने के जैसे आरोप लगाए हैं। पत्नी निर्मला चौहान का कहना है कि लंबे समय से वह प्रताड़ना का शिकार हो रही थीं। प्रशासनिक और राजनैतिक पहुंच के चलते कई साल तक उनकी सुनवाई नहीं हुई।
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शादी के अगले दिन से ही प्रताड़ना
मारपीट करना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना रोज का काम हो गया था। कुछ दिन बाद उनकी मां ने जमीन रजिस्ट्री के लिए 50 हजार रुपए ससुर को दिए थे।
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जाॅइंट कलेक्टर पर एफआईआर को ऐसे समझें🔹 मंदसौर में जॉइंट कलेक्टर राहुल चौहान के खिलाफ पत्नी द्वारा दहेज प्रताड़ना, मारपीट और जबरन गर्भपात कराने का केस दर्ज।🔹 पत्नी निर्मला के अनुसार प्रताड़ना शादी के अगले दिन से शुरू हुई, दहेज कम लाने का ताना और बार-बार मारपीट। 🔹 UPSC तैयारी के दौरान दिल्ली और अलग-अलग जगहों पर भी उत्पीड़न, तलाक की धमकी और मोबाइल तोड़ने का आरोप। 🔹 पत्नी ने आरोप लगाया कि गर्भावस्था में भी प्रताड़ना हुई, मिसकेरेज हुआ और पति दूसरी महिला के साथ रहने लगे। 🔹 आरोपी अधिकारी राहुल चौहान ने सभी आरोपों को निराधार बताया और कहा कि सच्चाई कोर्ट की सुनवाई से साबित होगी। |
जगह-जगह किया उत्पीड़न
जबरन गर्भपात का आरोप
बाद में धार जाने पर एक और खुलासा हुआ। महिला का कहना है कि उनके पति किसी अन्य महिला के साथ रह रहे थे। जहां-जहां अधिकारी पदस्थ रहा, वहीं-वहीं उत्पीड़न होता रहा। पति लगातार उन पर तलाक के लिए दबाव बना रहे थे।
प्रशासनिक दबाव: FIR दर्ज करने में अड़चन
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अधिकारी ने कहा : सारे आरोप निराधार
गर्भपात करवाने की बात को उन्होंने सरासर झूठा बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि बॉम्बे हॉस्पिटल के दस्तावेज से सच्चाई पता चल सकती है। उन्होंने दावा किया कि इलाज का 15 लाख रुपए का खर्च उन्होंने खुद ही उठाया था। अब सच्चाई तो कोर्ट की सुनवाई से ही सामने आएगी।
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