मंदसौर साइबर ठगी में 9वां आरोपी अरेस्ट, नेपाल के कैसीनो में रची साजिश, पाकिस्तान तक जुड़े तार

Aman Vaishnav | Oct 12, 2026, 13:54 IST
मंदसौर साइबर ठगी मामले में नौवां आरोपी हरदोई से गिरफ्तार
मंदसौर में मैट्रिमोनियल साइट के जरिए हुई ठगी के मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस अब तक इस गिरोह के 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें नौवां आरोपी वासील सिद्दिकी यूपी से पकड़ा गया है। इस गिरोह ने देशभर में करीब 125 वारदातों को अंजाम दिया है। आरोपियों के बैंक खातों की जांच में 11 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन भी मिला है।

दरअसल मंदसौर जिले के शामगढ़ इलाके में एक युवती ने शादी के लिए मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनाई थी। दूसरी ओर ठगों ने खुद को NRI बताकर युवती से बात शुरू की। फर्जी परिवार और नकली फोटो के सहारे पहले युवती का भरोसा जीता। इसके बाद शादी का झांसा दिया गया।



इसके बाद आरोपियों ने कहा कि उन्होंने विदेश से उसके लिए एक बहुत कीमती गिफ्ट भेजा है। कुछ दिन बाद युवती को फोन आया कि उसका पार्सल कस्टम विभाग में रोक लिया गया है। फिर कस्टम ड्यूटी, सेल्स टैक्स और तरह-तरह के चार्ज के नाम पर डरा-धमकाकर अलग-अलग खातों में पैसे डलवाए गए।



इस तरह किश्तों में युवती से करीब 7.5 लाख रुपए ऐंठ लिए गए। जब ठगी का अहसास हुआ, तो पीड़िता ने शामगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद एसपी विनोद कुमार मीना ने विशेष टीम बनाई, जिसने करीब डेढ़ महीने तक खातों और मोबाइलों की पड़ताल की। साथ ही 15 दिन अलग-अलग राज्यों में दबिश देकर आरोपियों को पकड़ा।



हरदोई से पकड़ा गया नौवां आरोपी

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने उत्तर प्रदेश के हरदोई से इस गिरोह के नौवें आरोपी वासील सिद्दिकी को गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के अनुसार वासील मूल रूप से फिरोजाबाद के रसूलपुर थाना क्षेत्र के हाजीपुरा का रहने वाला है। वह गिरोह को आगरा और फिरोजाबाद से म्यूल बैंक अकाउंट (किराए के फर्जी खाते) लाकर देता था।



इससे पहले पुलिस बिहार के छह मुख्य आरोपियों और भोपाल से दो मददगारों को गिरफ्तार कर चुकी थी। भोपाल के सरस्वती नगर का रहने वाला शिवांश उर्फ शिवा यादव वृंदावन से पकड़ा गया था। वह जरूरतमंद लोगों से 12 हजार रुपए में बैंक खाते खरीदता था।



इसके बाद बिहार के गिरोह को 17 हजार रुपए में बेच देता था। उसने 15-20 खातों की जानकारी दी है। इसके बाद नेहरू नगर भोपाल के कृष्णासिंह दोहरे को पकड़ा गया, जिसने अपने चार से पांच खाते दिए थे। उसके एक खाते में दो लाख रुपए आए थे, जिन्हें कैश डिपॉजिट मशीन से आगे भेज दिया गया था।



पाकिस्तान तक पहुंचे तार

जांच में सामने आया कि गिरोह का मुख्य सरगना टोनी कुमार है, जो बिहार के गोपालगंज जिले के छपिया का रहने वाला है। वह बिहार के कनेर इलाके में पंचायत सचिव भी है। टोनी पहले खुद साइबर ठगी का शिकार हुआ था। बाद में उसने खुद का गिरोह बना लिया।



करीब पांच साल पहले नेपाल के वीरगंज और काठमांडू के कैसीनो में उसकी मुलाकात शिवम गुप्ता से हुई थी। दोनों को जुए और महंगे शौक की लत थी, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने ठगी का यह बड़ा नेटवर्क तैयार किया। कुछ आरोपियों के रिश्तेदार भी नेपाल में रहते हैं।



सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरोह के तार पाकिस्तान से भी जुड़ रहे हैं। पुलिस को विदेशी मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और कराची के संदिग्ध लोगों से चैटिंग के इनपुट मिले हैं। आरोपियों को ठगी की रकम का 10 प्रतिशत हिस्सा मिलता था। बाकी 90 प्रतिशत रकम आगे भेज दी जाती थी।



रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर पाकिस्तान भेजने का शक है। इसकी मनी ट्रेल खंगाली जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ATS ने मुख्य आरोपी से चार घंटे तक पूछताछ की है। 30 सितंबर को डीआईजी निमिष अग्रवाल ने भी शामगढ़ थाने पहुंचकर मामले की समीक्षा की थी।



125 वारदातें और 11 करोड़ के ट्रांजेक्शन

पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि पिछले चार से छह महीनों के भीतर गिरोह के खातों में 11 करोड़ रुपए से अधिक का लेन-देन हुआ है। यह गिरोह देश भर में 100 से लेकर 125 साइबर वारदातों में शामिल रहा है।



  • बरामदगी: पुलिस ने अब तक 22 एंड्रॉइड मोबाइल फोन, 30 सिम कार्ड और 5 एटीएम कार्ड जब्त किए हैं।
  • फ्रीज रकम: 150 से ज्यादा खातों में से करीब 22 लाख रुपए फ्रीज कराए जा चुके हैं। इसमें पीड़िता के पैसे भी शामिल हैं। 11 लाख रुपए और फ्रीज कराने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद कोर्ट के जरिए पीड़िता को पैसे वापस दिलाए जाएंगे।
  • काम करने का तरीका: गिरोह दो हिस्सों में बंटा था। पहली टीम सीधे-साधे और जरूरतमंद लोगों को झांसे में लेकर उनके नाम पर बैंक खाते, पासबुक, एटीएम और सिम कार्ड जुटाती थी। दूसरी टीम अलग-अलग राज्यों में घूमकर एटीएम या सीडीएम से पैसे निकालती थी। जैसे ही कोई खाता फ्रीज होता, आरोपी सिम और एटीएम तोड़कर फेंक देते थे और नए खातों का इस्तेमाल शुरू कर देते थे।

रतलाम रेंज डीआईजी निमिष अग्रवाल के अनुसार, विदेशी कड़ियों की पुष्टि होते ही केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद ली जाएगी। साथ ही बिहार सरकार को आरोपियों की अवैध संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव भी भेजा जा रहा है।



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