कागजों में हजारों गोवंश, जमीन पर गायब! गौशालाओं पर घोटाले का आरोप

Sandeep Kumar | Jul 10, 2026, 23:37 IST
कागजों में हजारों गोवंश, जमीन पर गायब
मऊगंज जिले की गौशालाओं में करोड़ों रुपए के घोटाले का आरोप लगा है। कागजों पर 77 गौशालाओं में 24 हजरा 140 गोवंश दर्ज हैं। लेकिन जांच में सिर्फ 3,278 गायें ही मिलीं। कई गौशालाओं में तो एक भी गाय नहीं थी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मऊगंज की गौशालाओं में घोटाले का आरोप लगा है।
  • कागजों पर 24 हजार 140 गोवंश दर्ज बताए गए हैं।
  • जांच में केवल 3,278 गायें मिलीं।
  • कई गौशालाओं में एक भी गाय नहीं मिली।
  • शिकायतकर्ताओं ने 50 करोड़ से ज्यादा घोटाले की आशंका जताई है।

जांच में मिलीं कम गायें

जिले की 77 गौशालाओं में कुल 24,140 गोवंश दर्ज हैं। इनमें हनुमना में 9,539, मऊगंज में 12 हजार 388 और नईगढ़ी में 2,213 गोवंश शामिल हैं। लेकिन जब स्थानीय स्तर पर 56 गौशालाओं का मुआयना किया गया, तो हकीकत सामने आई।



जांच में सिर्फ 3,278 गायें ही मिलीं। मलैगवा, बिछरहटा, सरदमन, बेलहा और खैरा जैसी कई गौशालाओं में तो गायों की संख्या शून्य पाई गई। इसके अलावा कई जगह चारा रखने की जगह तक नहीं थी। पानी का भी इंतजाम नहीं था। गायों की हालत बेहद खराब मिली।



25 महीनों में 50 करोड़ के घोटाले का अनुमान

सरकार एक गाय के चारे-पानी और देखरेख के लिए रोजाना 40 रुपए का अनुदान देती है। शिकायतकर्ताओं का गणित है कि पोर्टल पर दर्ज संख्या के हिसाब से हर महीने करीब 2.90 करोड़ रुपए जारी हुए होंगे। अगर यह सिलसिला 25 महीनों तक चला हो, तो यह भुगतान 50 करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच सकता है। हालांकि अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने इस आंकड़े की पुष्टि नहीं की है। कई गौशालाओं में न तो कैश बुक मिली, न ही भूसा खरीदने के बिल-वाउचर मिले।



विवाद के केंद्र में बेलहा गौशाला

ग्राम पंचायत बेलहा की गौशाला इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सस्पेंस बनी हुई है। आरोप है कि यह गौशाला अभी अधूरी है। यहां एक भी गाय मौजूद नहीं थी, फिर भी करीब 42.57 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया।



मार्च 2025 में जब संयुक्त जांच दल ने निरीक्षण किया था, तब भी यहां कोई गाय नहीं मिली थी। शुरुआत में अधिकारियों ने कहा कि इस गौशाला को कोई पैसा नहीं दिया गया। लेकिन बाद में इसी गौशाला के खाते में रकम ट्रांसफर होने के दस्तावेज सामने आ गए।



रिश्वत के पैसों से प्रॉपर्टी खरीदने का आरोप

तत्कालीन उपसंचालक जेएल साकेत पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने गौशाला संचालकों से चेकों के जरिए पैसे लिए। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन्हीं चेकों का इस्तेमाल कर रीवा के संजय नगर में प्रॉपर्टी खरीदी गई।


यह प्रॉपर्टी करीब 42 लाख रुपए की बताई जा रही है। आरोप है कि यह अधिकारी के बेटे के नाम पर खरीदी गई। इसका जिक्र रजिस्ट्री के कागजातों में भी है।



कलेक्टर बोले, कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली

मऊगंज कलेक्टर आईएएस संजय कुमार जैन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 86 गौशालाएं चल रही हैं। इनमें सरकारी और प्राइवेट, दोनों तरह की गौशालाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक इस घोटाले से जुड़ी कोई औपचारिक शिकायत सीधे उनके पास नहीं आई है।



प्रशासन ने अपने स्तर पर जांच कराई थी। अधिकारियों को दो-दो गौशालाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिनकी रिपोर्ट आ चुकी है। जिन गौशालाओं में छोटी-मोटी कमियां मिली हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। कलेक्टर ने कहा कि अगर कोई विशेष शिकायत दर्ज कराता है, तो पूरी जांच के बाद दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



FAQ

  1. मऊगंज गौशाला घोटाले में क्या आरोप हैं?
    आरोप है कि कागजों पर गायों की संख्या बढ़ाकर सरकार से करोड़ों रुपए का अनुदान हड़पा गया। 77 गौशालाओं में 24,140 गोवंश दर्ज हैं, लेकिन जांच में सिर्फ 3,278 गायें मिलीं। कई गौशालाओं में एक भी गाय नहीं थी।
  2. कलेक्टर ने इस मामले पर क्या कहा?
    कलेक्टर संजय कुमार जैन ने कहा कि उनके पास अभी कोई औपचारिक शिकायत नहीं आई है। प्रशासन ने अपने स्तर पर जांच कराई है। शिकायत मिलने पर सख्त कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।

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