ZEE5 से क्यों हटाई गई दिलजीत दोसांझ की फिल्म Satluj, जानेंं पूरा सच
Kaushiki | Jul 07, 2026, 08:43 IST
Satluj movie
दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को ZEE5 से हटा दिया गया है। सरकार ने सुरक्षा कारणों से इसे हटाने का निर्देश दिया। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। फिल्म पहले पंजाब 95 नाम से सेंसर बोर्ड में अटकी थी।
मशहूर एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह कोई गाना नहीं बल्कि उनकी नई फिल्म 'सतलुज' है। यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई थी। लेकिन रिलीज के महज दो दिन बाद ही इसे अचानक हटा दिया गया। इस खबर ने दिलजीत के फैंस को बड़ा झटका दिया है। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने जी5 को इसे हटाने का निर्देश दिया था। सरकार ने इसके लिए सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया है। यह निर्देश आईटी नियम 2021 के तहत दिया गया है।
जब यह मामला सरकार के सामने आया तो तुरंत कार्रवाई की गई। फिल्म को बिना किसी कट के चुपचाप रिलीज कर दिया गया था। इसी वजह से सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है।
![दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज' पर बैन से पंजाब में भूचाल, BJP-कांग्रेस और AAP आई साथ! - diljit dosanjh satluj removed from zee5 punjab political parties demands restore film ntc drmt - AajTak]()
फिल्म 'सतलुज' पंजाब के एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर बनी है। कहानी 1990 के दशक के उस दौर की है जब पंजाब में उग्रवाद था। जसवंत सिंह खालरा ने पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार का सच निकाला था। उन्होंने पुलिस की अवैध कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाई थी। साल 1995 में उनका अचानक अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद वह कभी वापस नहीं लौटे।
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इस फिल्म का असली नाम पहले पंजाब 95 रखा गया था। फिल्म मेकर्स ने साल 2022 में इसके सर्टिफिकेशन के लिए अप्लाई किया था। सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 127 कट्स लगाने का सुझाव दिया था। लेकिन मेकर्स इन कट्स को मानने के लिए तैयार नहीं थे। इस वजह से फिल्म थिएटर्स में रिलीज नहीं हो सकी। इसके बाद मेकर्स ने इसे ओटीटी पर रिलीज(पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ) करने का फैसला किया।
![Satluj Movie:ऑनलाइन लीक हुई पूरी 'सतलुज' फिल्म, जी5 ने पाइरेसी पर जताई नाराजगी, पोस्ट कर लोगों से की ये अपील - Zee5 Expresses Displeasure Over Piracy Of Sutlej Full Film Leaked ...]()
OTT का कंटेंट सीधे तौर पर सेंसर बोर्ड के तहत नहीं आता है। इसे डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड रूल्स 2021 के तहत रेगुलेट किया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक, मेकर्स ने नया नाम रखकर इसे ओटीटी पर डाल दिया।
उन्होंने पुराने विवादित हिस्सों को फिल्म से नहीं हटाया था। नियमों का पालन न करने के कारण सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। फिल्म (Diljit Dosanjh) को अगली सूचना तक भारत में बंद कर दिया गया है।
फिल्म के अचानक हटने से एक्टर दिलजीत दोसांझ बेहद दुखी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना दर्द भी साझा किया है। दिलजीत ने अपने फैंस से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म जहां भी मिले, इसे जरूर देखें। वहीं जी5 ने दर्शकों से अपील की है कि वे पायरेसी का रास्ता न अपनाएं। प्लेटफॉर्म इसे वापस लाने की कोशिश कर रहा है।
![जसवंत सिंह खालड़ा]()
यह फिल्म देश के सिस्टम और उस दौर की राजनीति पर सवाल उठाती है। इसमें मानवाधिकारों के बड़े उल्लंघन को दिखाया गया है। फिल्म में पुलिस के फर्जी एनकाउंटर के मुद्दे को भी उठाया गया है।
यह पंजाब के इतिहास के एक काले अध्याय को सामने लाती है। इन्हीं संवेदनशील मुद्दों के कारण फिल्म को लेकर विवाद बढ़ गया है। राजनीतिक पार्टियां भी इस मामले पर अपनी राय रख रही हैं।
जवाब:
फिल्म की कहानी: इस फिल्म को हनी त्रेहान ने डायरेक्ट किया है और इसमें सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ लीड रोल में हैं। इस फिल्म का नाम पहले 'Punjab '95' था। यह फिल्म पंजाब के मशहूर ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा की लाइफ पर बनी है।
मुद्दा क्या था:
जसवंत सिंह खालरा 1980 और 1990 के दशक में पंजाब के उग्रवाद के दौर में हुए कथित एनकाउंटर, लोगों के गायब होने और अवैध रूप से अंतिम संस्कार किए जाने के मामलों को उजागर कर रहे थे। उनका अनुमान था कि लगभग 25,000 लोगों का इस तरह गुपचुप अंतिम संस्कार कर दिया गया। 1995 में अमृतसर में उनके घर के बाहर से उन्हें किडनैप कर लिया गया और सीबीआई की जांच के मुताबिक, पुलिस वाले उन्हें थाने ले गए थे, जहां कस्टडी में उनकी मौत हो गई।
क्यों हटाया गया:
3 जुलाई को यह फिल्म ZEE5 पर रिलीज हुई, लेकिन सिर्फ दो दिन बाद 5 जुलाई को इसे इंडिया के प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया (हालांकि यह इंटरनेशनल लेवल पर ZEE5 ग्लोबल पर चल रही है)। मेकर्स का कहना है कि सरकार ने इसे हटाने का ऑर्डर दिया है और केंद्र की एक कमेटी IT एक्ट के सेक्शन 69A के तहत इस फिल्म की जांच कर रही है।
जवाब:
नियम क्या है: सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों को सेंसर बोर्ड (CBFC) से पहले सर्टिफिकेट लेना पड़ता है, लेकिन डायरेक्ट OTT पर आने वाले कंटेंट को ऐसी प्री-सर्टिफिकेशन की जरूरत नहीं होती। OTT प्लेटफॉर्म्स IT रूल्स, 2021 के तहत आते हैं।
सरकार की पावर: हां, सरकार के पास पावर है! Information Technology (IT) Act, 2000 का सेक्शन 69A केंद्र सरकार को यह हक देता है कि अगर कोई ऑनलाइन कंटेंट भारत की संप्रभुता (Sovereignty), एकता, देश की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ अच्छे संबंध या पब्लिक ऑर्डर को बिगाड़ता है, तो सरकार उस पर ब्लॉक लगाने का ऑर्डर दे सकती है। लेकिन इसके लिए कानून में बताए गए प्रोसीजर को फॉलो करना जरूरी है।
जवाब:
प्रोसीजर और रूल्स: इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के फाउंडर और एडवोकेट अपार गुप्ता के मुताबिक, सरकार को एक लिखित ऑर्डर देना होता है, जिसमें बताना पड़ता है कि कंटेंट कानून के किस नियम का उल्लंघन कर रहा है।
सुनवाई का मौका: IT रूल्स के तहत, पब्लिशर (जैसे ZEE5 या मेकर्स) को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के मशहूर श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ केस में भी कहा था कि सुनवाई का मौका और लिखित कारण देना बेहद जरूरी है।
जवाब:
बड़ा सस्पेंस: ब्लॉकिंग रूल्स का नियम 16 कहता है कि ऐसे ऑर्डर्स को गोपनीय रखा जा सकता है। सरकार अक्सर इसका फायदा उठाकर प्रभावित पार्टी (मेकर्स) को भी ऑर्डर की कॉपी नहीं देती।
फिल्ममेकर्स की परेशानी: अगर ब्लॉकिंग ऑर्डर को पूरी तरह सीक्रेट रखा जाएगा, तो मेकर्स उसे कोर्ट में चैलेंज कैसे करेंगे? बिना ऑर्डर की कॉपी के कोर्ट भी यह तय नहीं कर पाता कि सरकार का फैसला सही है या नहीं। यह सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों (जैसे पुट्टस्वामी केस और अनुराधा भसीन केस) का भी उल्लंघन करता है, जो कहते हैं कि पाबंदियां हमेशा तार्किक होनी चाहिए।
जवाब:
नया ट्रेंड: हां, यह एक बड़े बदलाव की तरफ इशारा करता है। पहले फिल्मों को रिलीज से पहले सेंसर बोर्ड से लड़ना पड़ता था (जैसे इस फिल्म को भी थिएटर रिलीज के लिए सेंसर बोर्ड ने 127 कट्स लगाने को कहा था, जिसकी वजह से यह कभी सिनेमाघरों में आ ही नहीं पाई)।
पैरेलल सेंसरशिप: अब थिएटर के बजाय सीधे OTT पर आने के बाद भी, सरकार सेक्शन 69A और IT रूल्स का इस्तेमाल करके रिलीज के बाद कंटेंट को कंट्रोल कर रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह एक तरह की 'पैरेलल सेंसरशिप' (समानान्तर सेंसरशिप) की तरह काम करने लगा है।
जवाब:
कोर्ट का दरवाजा: अगर सरकार ने फिल्म को ब्लॉक करने का ऑफिशियल ऑर्डर जारी किया है, तो मेकर्स संविधान के आर्टिकल 226 के तहत सीधे हाई कोर्ट में रिट पिटीशन (Writ Petition) फाइल कर सकते हैं।
फ्रीडम ऑफ स्पीच: मेकर्स कोर्ट में यह दलील दे सकते हैं कि सरकार का यह कदम आईटी एक्ट के सेक्शन 69A के दायरे से बाहर है और यह संविधान के आर्टिकल 19(1)(a) (बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी) और आर्टिकल 19(1)(g) (कोई भी व्यापार या पेशा करने की आजादी) का सीधा उल्लंघन करता है।
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सरकार ने क्यों लिया एक्शन
जब यह मामला सरकार के सामने आया तो तुरंत कार्रवाई की गई। फिल्म को बिना किसी कट के चुपचाप रिलीज कर दिया गया था। इसी वजह से सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है।
दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज' पर बैन से पंजाब में भूचाल, BJP-कांग्रेस और AAP आई साथ! - diljit dosanjh satluj removed from zee5 punjab political parties demands restore film ntc drmt - AajTak
क्या है फिल्म की असली कहानी
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सेंसर बोर्ड के साथ क्या था विवाद
Satluj Movie:ऑनलाइन लीक हुई पूरी 'सतलुज' फिल्म, जी5 ने पाइरेसी पर जताई नाराजगी, पोस्ट कर लोगों से की ये अपील - Zee5 Expresses Displeasure Over Piracy Of Sutlej Full Film Leaked ...
ओटीटी और सेंसर बोर्ड के नियम
उन्होंने पुराने विवादित हिस्सों को फिल्म से नहीं हटाया था। नियमों का पालन न करने के कारण सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। फिल्म (Diljit Dosanjh) को अगली सूचना तक भारत में बंद कर दिया गया है।
दिलजीत दोसांझ ने क्या कहा
जसवंत सिंह खालड़ा
क्यों विवादों में है यह फिल्म
यह पंजाब के इतिहास के एक काले अध्याय को सामने लाती है। इन्हीं संवेदनशील मुद्दों के कारण फिल्म को लेकर विवाद बढ़ गया है। राजनीतिक पार्टियां भी इस मामले पर अपनी राय रख रही हैं।
सवाल 1: 'Satluj' फिल्म किस बारे में है और रिलीज के दो दिन बाद ही इसे ZEE5 से क्यों हटाया गया?
फिल्म की कहानी: इस फिल्म को हनी त्रेहान ने डायरेक्ट किया है और इसमें सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ लीड रोल में हैं। इस फिल्म का नाम पहले 'Punjab '95' था। यह फिल्म पंजाब के मशहूर ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा की लाइफ पर बनी है।
मुद्दा क्या था:
जसवंत सिंह खालरा 1980 और 1990 के दशक में पंजाब के उग्रवाद के दौर में हुए कथित एनकाउंटर, लोगों के गायब होने और अवैध रूप से अंतिम संस्कार किए जाने के मामलों को उजागर कर रहे थे। उनका अनुमान था कि लगभग 25,000 लोगों का इस तरह गुपचुप अंतिम संस्कार कर दिया गया। 1995 में अमृतसर में उनके घर के बाहर से उन्हें किडनैप कर लिया गया और सीबीआई की जांच के मुताबिक, पुलिस वाले उन्हें थाने ले गए थे, जहां कस्टडी में उनकी मौत हो गई।
क्यों हटाया गया:
3 जुलाई को यह फिल्म ZEE5 पर रिलीज हुई, लेकिन सिर्फ दो दिन बाद 5 जुलाई को इसे इंडिया के प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया (हालांकि यह इंटरनेशनल लेवल पर ZEE5 ग्लोबल पर चल रही है)। मेकर्स का कहना है कि सरकार ने इसे हटाने का ऑर्डर दिया है और केंद्र की एक कमेटी IT एक्ट के सेक्शन 69A के तहत इस फिल्म की जांच कर रही है।
सवाल 2: क्या सरकार कानूनी रूप से किसी OTT प्लेटफॉर्म को फिल्म हटाने का ऑर्डर दे सकती है?
नियम क्या है: सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों को सेंसर बोर्ड (CBFC) से पहले सर्टिफिकेट लेना पड़ता है, लेकिन डायरेक्ट OTT पर आने वाले कंटेंट को ऐसी प्री-सर्टिफिकेशन की जरूरत नहीं होती। OTT प्लेटफॉर्म्स IT रूल्स, 2021 के तहत आते हैं।
सरकार की पावर: हां, सरकार के पास पावर है! Information Technology (IT) Act, 2000 का सेक्शन 69A केंद्र सरकार को यह हक देता है कि अगर कोई ऑनलाइन कंटेंट भारत की संप्रभुता (Sovereignty), एकता, देश की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ अच्छे संबंध या पब्लिक ऑर्डर को बिगाड़ता है, तो सरकार उस पर ब्लॉक लगाने का ऑर्डर दे सकती है। लेकिन इसके लिए कानून में बताए गए प्रोसीजर को फॉलो करना जरूरी है।
सवाल 3: ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक करने से पहले कौन से कानूनी सुरक्षा उपाय लागू होते हैं?
प्रोसीजर और रूल्स: इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के फाउंडर और एडवोकेट अपार गुप्ता के मुताबिक, सरकार को एक लिखित ऑर्डर देना होता है, जिसमें बताना पड़ता है कि कंटेंट कानून के किस नियम का उल्लंघन कर रहा है।
सुनवाई का मौका: IT रूल्स के तहत, पब्लिशर (जैसे ZEE5 या मेकर्स) को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के मशहूर श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ केस में भी कहा था कि सुनवाई का मौका और लिखित कारण देना बेहद जरूरी है।
सवाल 4: क्या फिल्मों को ब्लॉक करने वाले सरकारी ऑर्डर्स को सीक्रेट रखा जा सकता है?
बड़ा सस्पेंस: ब्लॉकिंग रूल्स का नियम 16 कहता है कि ऐसे ऑर्डर्स को गोपनीय रखा जा सकता है। सरकार अक्सर इसका फायदा उठाकर प्रभावित पार्टी (मेकर्स) को भी ऑर्डर की कॉपी नहीं देती।
फिल्ममेकर्स की परेशानी: अगर ब्लॉकिंग ऑर्डर को पूरी तरह सीक्रेट रखा जाएगा, तो मेकर्स उसे कोर्ट में चैलेंज कैसे करेंगे? बिना ऑर्डर की कॉपी के कोर्ट भी यह तय नहीं कर पाता कि सरकार का फैसला सही है या नहीं। यह सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों (जैसे पुट्टस्वामी केस और अनुराधा भसीन केस) का भी उल्लंघन करता है, जो कहते हैं कि पाबंदियां हमेशा तार्किक होनी चाहिए।
सवाल 5: क्या यह मामला OTT प्लेटफॉर्म्स के रेगुलेशन में किसी बड़े बदलाव का इशारा है?
नया ट्रेंड: हां, यह एक बड़े बदलाव की तरफ इशारा करता है। पहले फिल्मों को रिलीज से पहले सेंसर बोर्ड से लड़ना पड़ता था (जैसे इस फिल्म को भी थिएटर रिलीज के लिए सेंसर बोर्ड ने 127 कट्स लगाने को कहा था, जिसकी वजह से यह कभी सिनेमाघरों में आ ही नहीं पाई)।
पैरेलल सेंसरशिप: अब थिएटर के बजाय सीधे OTT पर आने के बाद भी, सरकार सेक्शन 69A और IT रूल्स का इस्तेमाल करके रिलीज के बाद कंटेंट को कंट्रोल कर रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह एक तरह की 'पैरेलल सेंसरशिप' (समानान्तर सेंसरशिप) की तरह काम करने लगा है।
सवाल 6: फिल्ममेकर्स के पास अब क्या कानूनी रास्ते बचे हैं?
कोर्ट का दरवाजा: अगर सरकार ने फिल्म को ब्लॉक करने का ऑफिशियल ऑर्डर जारी किया है, तो मेकर्स संविधान के आर्टिकल 226 के तहत सीधे हाई कोर्ट में रिट पिटीशन (Writ Petition) फाइल कर सकते हैं।
फ्रीडम ऑफ स्पीच: मेकर्स कोर्ट में यह दलील दे सकते हैं कि सरकार का यह कदम आईटी एक्ट के सेक्शन 69A के दायरे से बाहर है और यह संविधान के आर्टिकल 19(1)(a) (बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी) और आर्टिकल 19(1)(g) (कोई भी व्यापार या पेशा करने की आजादी) का सीधा उल्लंघन करता है।
FAQ
- फिल्म 'सतलुज' को जी5 से क्यों हटाया गया?
केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों और आईटी नियमों के उल्लंघन का हवाला देकर जी5 को फिल्म हटाने का निर्देश दिया था। मेकर्स ने बिना सेंसर कट्स के इसे रिलीज किया था। - जसवंत सिंह खालरा कौन थे जिन पर यह फिल्म बनी है?
जसवंत सिंह खालरा पंजाब के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। उन्होंने 90 के दशक में पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के अवैध अंतिम संस्कार का सच उजागर किया था। - क्या 'सतलुज' फिल्म का नाम पहले कुछ और था?
जी हां, इस फिल्म का ओरिजिनल नाम 'पंजाब 95' था। सेंसर बोर्ड के साथ विवाद और 127 कट्स के सुझाव के बाद इसका नाम बदलकर 'सतलुज' किया गया।
धमाल 4 सेंसर बोर्ड से पास: बच्चों के साथ देख सकेंगे अजय देवगन की फिल्म
मुंबई फिल्म फेस्टिवल में छाई MP की 64 योगिनी मंदिर पर बनी डॉक्यूमेंट्री
अक्षय कुमार की नई कॉमेडी फिल्म Welcome to the Jungle का ट्रेलर हुआ रिलीज
एडवांस बुकिंग खिड़की पर आलिया भट्ट की फिल्म Alpha का जलवा
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