MP में दवाओं पर रहेगी सरकार की नजर, खरीदी से मरीज तक हर गोली होगी ट्रैक

Sandeep Kumar | Jul 08, 2026, 16:21 IST
MP में दवाओं पर रहेगी सरकार की नजर
मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की निगरानी अब हाईटेक होगी। खरीदी से लेकर मरीज तक वितरण की जानकारी रियल टाइम में दर्ज होगी। इसके लिए प्रदेश में 10 नए वेयरहाउस बनाए जाएंगे।

समझें क्या है पूरा मामला

  • एमपी में दवाओं की निगरानी हाईटेक होगी।
  • खरीदी से वितरण तक रियल टाइम रिकॉर्ड रहेगा।
  • प्रदेश में 10 नए दवा वेयरहाउस बनेंगे।
  • एनएबीएल जांच के बाद दवाएं भेजी जाएंगी।
  • अमानक दवाओं की समस्या कम करने प्रयास होगा।

सप्लाई चेन में क्या बदलेगा

मेडिकल सप्लाई चेन में एंड-टू-एंड इंटीग्रेशन सुनिश्चित किया जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब में जांच के बाद ही दवाएं अस्पतालों को भेजी जाएंगी। मरीज को दवा देने की जानकारी भी उसी वक्त सिस्टम में दर्ज होगी।हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया था। जांच में 27 दवाएं अमानक पाई गईं। लेकिन जब तक रिपोर्ट आई, तब तक कई मरीजों को यह दवाएं बांटी जा चुकी थीं। नई व्यवस्था इसी तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए बनाई जा रही है।



डिप्टी सीएम ने क्या कहा

मंगलवार को विभागीय अधिकारियों ने उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के सामने इस नई व्यवस्था का प्रजेंटेशन दिया। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि दवाओं की समय पर टेस्टिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता जांच के बाद ही दवाओं का वितरण किया जाए। शुक्ल ने यह भी कहा कि हर स्तर पर पर्याप्त स्टॉक बना रहना चाहिए। डिमांड और सप्लाई में अंतर की स्थिति नहीं बननी चाहिए। उनका कहना है कि तकनीक आधारित व्यवस्था से दवाओं की उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।



वेयरहाउस से जांच तक प्रक्रिया

आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस ने बताया कि यह व्यवस्था क्षेत्रवार और केंद्रवार दवाओं की मांग का आकलन करने में मदद करेगी। इससे बेहतर योजना बनाकर दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। आखिरकार फायदा मरीज को ही मिलेगा। मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड दवाओं की खरीदी करेगा। आपूर्तिकर्ता दवाएं सीधे वेयरहाउस तक पहुंचाएंगे। वेयरहाउस में दवाओं का सही भंडारण होगा और समय पर गुणवत्ता जांच होगी। जांच में पास होने के बाद ही दवाएं अस्पतालों को भेजी जाएंगी।



अभी क्यों खराब होती हैं दवाएं

मौजूदा व्यवस्था में हेल्थ कॉर्पोरेशन रेट कॉन्ट्रेक्ट करता है। इस रेट पर दवा खरीदने के लिए सिविल सर्जन और सीएमएचओ जरूरत के हिसाब से ऑर्डर देते हैं। लेकिन ऑर्डर की दवाएं अस्पतालों तक पहुंचने में 45 से 60 दिन लग जाते हैं। इस वजह से कई बार अस्पतालों में दवाएं खत्म होने की शिकायतें आती हैं। इसके अलावा सीएमएचओ स्तर पर बने वेयरहाउस में मानकों का पालन नहीं होता। दवाएं बेतरतीब तरीके से रखी जाती हैं, जिससे वे कई बार खराब हो जाती हैं। नई व्यवस्था से इन दोनों समस्याओं पर लगाम लगने की उम्मीद है।



नई व्यवस्था से क्या फायदा

अस्पतालों में दवाओं की कमी नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर तुरंत सप्लाई मिलेगी। दवाओं के स्टॉक का ऑनलाइन आकलन होता रहेगा, जिससे समय पर खरीदी हो सकेगी। सही परिस्थितियों में भंडारण से दवाओं की गुणवत्ता भी बनी रहेगी। इस तरह मरीजों को समय पर और असरदार दवाएं मिल सकेंगी।



FAQ

  1. एमपी में दवाओं की ट्रैकिंग क्यों शुरू की जा रही है?
    हाल ही में कफ सिरफ की 27 दवाएं अमानक मिली थीं। इसी वजह से सरकार अब खरीदी से वितरण तक निगरानी बढ़ा रही है।
  2. दवाएं अस्पताल भेजने से पहले क्या जांच होगी?
    हर दवा की जांच एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब में होगी। जांच में पास होने के बाद ही दवाएं वितरित होंगी।
  3. वेयरहाउस कहां बनाए जाएंगे?
    प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों पर कुल 10 वेयरहाउस बनाए जाएंगे। यहां दवाओं का सुरक्षित भंडारण होगा।

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