मिहिर भोज प्रतिमा विवाद: हाईकोर्ट ने रखा यथास्थिति आदेश, गुर्जर-क्षत्रिय समाज से शांति की अपील
समझें क्या है पूरा मामला
- ग्वालियर के चिरवाई नाके पर मिहिर भोज की प्रतिमा लगी है।
- प्रतिमा के नाम को लेकर गुर्जर और क्षत्रिय समाज में विवाद है।
- विवाद के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था।
- प्रशासन की कमेटी ने पुराने रिकॉर्ड देखकर रिपोर्ट तैयार की है।
- हाईकोर्ट ने फिलहाल प्रतिमा स्थल पर यथास्थिति बनाए रखी है।
ग्वालियर में मिहिर भोज प्रतिमा विवाद पर ग्वालियर हाईकोर्ट ने यथास्थिति कायम रखी। कोर्ट ने गुर्जर और क्षत्रिय समाज से शांति बनाए रखने को कहा। प्रशासन की कमेटी की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश हुई। रिपोर्ट का अध्ययन होने के बाद आगे फैसला होगा।
ग्वालियर में मिहिर भोज प्रतिमा विवाद फिर कोर्ट पहुंचा। गुरुवार को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने फिलहाल प्रतिमा की स्थिति बदलने से रोक दिया। प्रतिमा स्थल पर अभी यथास्थिति बनी रहेगी। इसका मतलब प्रतिमा अभी जैसी है, वैसी ही रहेगी। प्रतिमा फिलहाल टीन से ढकी हुई है।
दोनों समाजों से शांति बनाए रखने की अपील
कोर्ट ने गुर्जर और क्षत्रिय समाज से शांति मांगी। प्रशासन को भी कानून व्यवस्था बनाए रखने को कहा। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के आरोप भी सामने आए। कोर्ट ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने दोनों समाजों को संयम रखने का संदेश दिया।
प्रशासन ने हाईकोर्ट में कमेटी की रिपोर्ट दी
सुनवाई के दौरान प्रशासन ने कमेटी की रिपोर्ट पेश की। कमेटी ने पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों का अध्ययन किया है। रिपोर्ट में मिहिर भोज से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य देखे गए हैं। इस रिपोर्ट का अभी कोर्ट में अध्ययन किया जाएगा। रिपोर्ट स्वीकार करने पर आगे विचार किया जाएगा।
प्रतिमा से शुरू हुआ विवाद
नगर निगम ने चिरवाई नाके पर प्रतिमा लगाई थी। इसके बाद प्रतिमा के नाम को लेकर विवाद बढ़ा। गुर्जर और क्षत्रिय समाज आमने-सामने आ गए। दोनों समाज मिहिर भोज को अपना बताते हैं। नाम के साथ समाज का उल्लेख विवाद की वजह बना।
विवाद के बाद हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
विवाद बढ़ने के बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई। कोर्ट ने प्रतिमा स्थल पर यथास्थिति का आदेश दिया। इसके बाद प्रतिमा और नामपट्टिका ढकी हुई है। मामला कई साल से हाईकोर्ट में चल रहा है। 2021 से यह विवाद अदालत में विचाराधीन बताया गया है।
पहले भी दोनों समाजों में बढ़ा था तनाव
प्रतिमा विवाद को लेकर दोनों समाजों में तनाव रहा है। 2023 में भी शहर में विवाद बढ़ा था। उस दौरान प्रशासन को कानून व्यवस्था संभालनी पड़ी थी। प्रतिमा के पास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई थी। हाईकोर्ट ने पहले भी शांति बनाए रखने पर जोर दिया था।
संभागायुक्त की बैठक से समाधान की कोशिश
विवाद खत्म करने के लिए प्रशासन ने बैठकें भी कीं। संभागायुक्त के स्तर पर दोनों पक्षों से चर्चा हुई। कोर्ट के निर्देश पर समाधान खोजने की कोशिश हुई। हालांकि विवाद का स्थायी समाधान अभी नहीं हुआ है।
गुर्जर समाज के वकील ने क्या कहा?
गुर्जर समाज की ओर से राजीव शर्मा पेश हुए। उन्होंने 2023 से शांति बने रहने की बात कही। उन्होंने पुराने आरोपों को लेकर सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि आरोप प्रशासन के सामने रखें। उन्होंने कोर्ट में आरोप लगाने पर भी सवाल उठाया।
क्षत्रिय समाज की ओर से क्या कहा गया?
क्षत्रिय समाज की ओर से अवधेश सिंह तोमर पेश हुए। उन्होंने नगर निगम के पुराने फैसले का हवाला दिया। उन्होंने नाम उसी फैसले के अनुसार रखने की बात कही। नगर निगम के फैसले में मिहिर भोज नाम दर्ज है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बातें रखी गईं।
विधायक सहाब सिंह गुर्जर का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान विधायक सहाब सिंह गुर्जर का मुद्दा उठा। उनपर बैठक में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया गया। यह आरोप गुर्जर समाज की बैठक से जुड़ा बताया गया। इस मुद्दे पर भी अदालत में बात रखी गई। हालांकि कोर्ट ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
अब आगे क्या होगा?
अब सबसे अहम नजर कमेटी की रिपोर्ट पर रहेगी। हाईकोर्ट पहले रिपोर्ट में दिए तथ्यों को देखेगा। इसके बाद रिपोर्ट स्वीकार करने पर विचार होगा। फिलहाल प्रतिमा की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। प्रशासन को शांति और सुरक्षा बनाए रखनी होगी। अगली कार्रवाई कोर्ट के आगे के आदेश पर निर्भर रहेगी।
क्यों अहम है यह सुनवाई?
यह विवाद केवल प्रतिमा के नाम तक सीमित नहीं है। इससे दो समाजों की भावनाएं भी जुड़ी हैं। इसी वजह से प्रशासन लगातार सावधानी बरत रहा है। कोर्ट भी मामले में शांति को प्राथमिकता दे रहा है। ऐसे में रिपोर्ट का अध्ययन आगे की दिशा तय करेगा।
क्या है पूरा विवाद?
2015 में ग्वालियर नगर निगम ने सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा लगाने का फैसला किया था। इस प्रतिमा की शिलापट्टिका पर राजा भोज का नाम गुर्जर सम्राट मिहिर भोज लिखा हुआ था। जिस पर क्षत्रिय समाज के लोगों ने आपत्ति जताई। दरअसल क्षत्रिय समाज के लोग राजा मिहिर भोज के क्षत्रिय होने का दावा कर रहे हैं। वहीं गुर्जर समाज राजा मिहिर भोज को गुर्जर राजा बता रहा है। इसी बात को लेकर दोनों समाज के लोग आमने-सामने आ गए थे।
ये भी पढ़ें...
अधिकारियों को प्रोबेशन में मिलेगा पूरा वेतन, ग्वालियर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
बीजेपी ने बंगाल चुनाव में खर्च किए थे 287 करोड़ रुपए, जानें अन्य राज्यों में कितना हुआ खर्च
एमपी-छत्तीसगढ़ में वोट चोरी से बनी सरकार, राहुल बोले, चुनावी रिजल्ट पर सवाल
ग्वालियर में NHAI सड़क सैंपल फेल, ठेकेदार के भुगतान से पहले हाईकोर्ट में सुनवाई