10 विधायकों की कमी के बावजूद तीसरा प्रत्याशी क्यों? मीनाक्षी ने BJP पर साधा निशाना

Sandeep Kumar | Jun 21, 2026, 23:26 IST
भाजपा की साजिश थ्योरी बोगस
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज हुआ। उन्होंने भाजपा की साजिश थ्योरी को बोगस बताया। उनके मुताबिक रिटर्निंग ऑफिसर का रवैया पक्षपातपूर्ण था। वे अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेंगी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज हुआ।
  • नटराजन ने प्रक्रिया पर पक्षपात का आरोप लगाया।
  • भाजपा साजिश थ्योरी को उन्होंने खारिज किया।
  • तीसरी सीट पर जरूरी संख्या को लेकर विवाद है।
  • वे अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेंगी।

साजिश थ्योरी को बताया बोगस

मीनाक्षी के मुताबिक बाजार में साजिश की कहानियां फैल रही हैं। उनका कहना था कि ये कहानियां सच मान भी लें। तब भी आरओ का रवैया सही नहीं ठहरता। उन्होंने इसे भाजपा की 'फेक कॉन्स्पिरेंसी थ्योरी' बताया। उनके मुताबिक कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। उनका कहना था कि ये अफवाहें असली मुद्दे से ध्यान भटकाती हैं।



मीनाक्षी ने कहा कि नामांकन निरस्त करने का अधिकार सिर्फ आरओ के पास था। उनके मुताबिक मामला आपराधिक नहीं था। यह सिर्फ एक सामान्य लीगल नोटिस था। इसके बावजूद नामांकन खारिज कर दिया गया।



उनका कहना था कि बोगस बातों से आरओ का बचाव नहीं हो सकता। उनके मुताबिक या तो अधिकारियों को प्रक्रिया की समझ नहीं थी। या फिर वे पूरी तरह कॉम्प्रोमाइज्ड थे।



आरओ कमरे में कलेक्टर-कमिश्नर

कांग्रेस नेता ने स्क्रूटनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक भाजपा के कई नेता आरओ के कमरे में मौजूद थे। वहीं कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री को अंदर नहीं आने दिया गया।



उनके मुताबिक विरोध के बाद ही प्रवेश मिल पाया। इसके बाद कलेक्टर और कमिश्नर भी वहां पहुंच गए। उन्होंने पूछा कि ये अधिकारी आरओ के दफ्तर में क्या कर रहे थे।



10 विधायक कम, फिर भी मैदान में

मीनाक्षी ने राज्यसभा की तीन सीटों की बात बताई। इनमें से दो सीटें भाजपा के खाते में पहले से तय थीं। तीसरी सीट के लिए 58 विधायकों का समर्थन जरूरी था। कांग्रेस के पास 62 विधायक थे। इसलिए पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया।



उनके मुताबिक नामांकन के दौरान सभी विधायक साथ आए। चार सेटों में नामांकन दाखिल किया गया। तेलंगाना और महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी वहां मौजूद थे।



मीनाक्षी के मुताबिक भाजपा के पास सिर्फ 48 विधायक थे। यह जरूरी संख्या से 10 कम था। फिर भी पार्टी ने तीसरा उम्मीदवार उतार दिया।



उनका आरोप था कि भाजपा 'फाउल प्ले' की नीयत से आई थी। उनके मुताबिक क्रॉस वोटिंग और डर का माहौल बनाया गया। उनका आरोप है कि बाद में चुनाव आयोग के साथ मिलकर साजिश रची गई।



फॉर्म-26 में नोटिस कॉलम नहीं

मीनाक्षी ने कहा कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं था। उनके मुताबिक यह सिर्फ एक सामान्य लीगल नोटिस था। यह अदालत के संज्ञान लेने से पहले की स्थिति में था।



उनका कहना था कि नया कानून पहले नोटिस देने का प्रावधान करता है। यह प्रावधान फर्जी मामलों को रोकने के लिए है। उनके मुताबिक जिस मामले का जिक्र हुआ, वह पुराना था।



मीनाक्षी ने बताया कि चुनावी हलफनामे के फॉर्म-26 में एक कॉलम नहीं है। इसमें लंबित लीगल नोटिस की जानकारी मांगी ही नहीं जाती। स्क्रूटनी में पूछे जाने पर उन्होंने खुद यह जानकारी दी।



उनके मुताबिक वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने हलफनामे की जांच पहले ही कर ली थी। इनमें विवेक तंखा और डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी शामिल थे। उनका कहना था कि आरओ के पास इतनी सीमित अवधि में अधिकार नहीं था। उन्होंने झारखंड के परिमल नाथवानी का उदाहरण भी दिया।



आयोग तक पहुंची कांग्रेस टीम

मीनाक्षी ने बताया कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहुंचा। यह दोपहर 12 बजे का वक्त था। इसमें रणदीप सुरजेवाला और विवेक तंखा शामिल थे। डॉ. सिंघवी सीधे लंदन से लौटकर आयोग पहुंचे।



उनके मुताबिक आयोग के पास दोपहर 3 बजे तक मौका था। लेकिन रात 10 बजे तक कोई निर्णय नहीं आया। इसके बाद कांग्रेस को रात डेढ़ बजे सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा।



मीनाक्षी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी आधार पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि प्रमाणपत्र पहले ही जारी हो चुका है। अब चुनाव याचिका ही कानूनी रास्ता बचा है। अदालत में सरकार की ओर से मुकुल रोहतगी पेश हुए।



परिवार पर सवाल का जवाब

एक आरोपी से जुड़े सवाल पर मीनाक्षी ने जवाब दिया। उनका कहना था कि वे और कांग्रेस पीड़िता के साथ खड़े हैं। उनके मुताबिक आरोपी सर्वे में शीर्ष पर था। फिर भी 2023 में उसका टिकट काटा गया।



उन्होंने बताया कि बाद में उसे जिला अध्यक्ष पद से हटाया गया। उसे पार्टी से निलंबित भी किया गया। उनके मुताबिक कांग्रेस अब उसका बचाव नहीं कर रही। वह अब पार्टी का सदस्य भी नहीं है।



मीनाक्षी ने कहा कि संविधान व्यक्ति को स्वतंत्र इकाई मानता है। उनके मुताबिक एक के आरोप से परिवार कटघरे में नहीं खड़ा हो सकता। उन्होंने अपनी बहन पर लगे आरोपों को भी निराधार बताया।



अब पार्टी चोरी का आरोप

मीनाक्षी के मुताबिक राहुल गांधी पहले ही चेतावनी दे चुके थे। उनका कहना था कि पहले वोट चोरी हुई। फिर मेयर सीट की चोरी हुई। अब 'पार्टी चोरी' की कोशिश हो रही है। उन्होंने इसे 'वन नेशन, वन पार्टी' का एजेंडा बताया। उनके मुताबिक यह लोकतंत्र को तानाशाही में बदलने की कोशिश है। उनके अनुसार इससे संस्थाओं के बीच साठगांठ उजागर हुई है।



मीनाक्षी ने कहा कि राज्यसभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करना उनका अधिकार है। उन्होंने ऐलान किया कि वे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जाएंगी। यह याचिका 45 दिनों के भीतर दाखिल होगी। उन्होंने कहा कि कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।



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