उषा ठाकुर बोलीं, मीनाक्षी का फार्म शिकायत करने वाली महिला की बद्दुआ से हुआ रद्द
Sanjay Gupta | Jun 12, 2026, 22:48 IST
महिला की बद्दुआ से हुआ रद्द नामांकन
राज्यसभा में कांग्रेस की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फार्म खारिज हो गया। चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। कांग्रेस इस मामले में बीजेपी पर हमले कर रही है।
Indore. कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म निरस्त होने के बाद कांग्रेस इसके लिए बीजेपी को कोस रही है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह इसे राज्य, केंद्र, चुनाव आयोग के साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई चोरी बता रहे हैं। मीनाक्षी भी अपनी सीट चोरी की बात कह रही है। वहीं महू की विधायक व पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने शुक्रवार को इंदौर में फार्म खारिज होने का कारण एक और बताया।
पूर्व मंत्री ठाकुर ने कहा कि मीनाक्षी खुद एक महिला है। एक महिला उनके पास शिकायत लेकर पहुंची थी। कांग्रेस नेता शिव कुमार रेड्डी से महिला पीड़ित थी लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। वह महिला आज भी न्याय के लिए परेशान हो रही है। मैं तो कहूंगी मीनाक्षी का जो फार्म निरस्त हुआ वह निश्चित तौर पर उन महिला की बद्दुआ से हुआ।
बीजेपी की प्रदेश प्रवक्ता व विधायक उषा ठाकुर ने कहा कि यह कांग्रेस की नासमझी, संगठनात्मक कमजोरी और आपसी गुटबाजी का नतीजा है। यह उनकी राजनीतिक हताशा है। हम तो एक पार्षद का भी फार्म भरते हैं तो डमी फार्म भी भरवााते हैं। बीजेपी इतनी सावधान रखती है। लेकिन कांग्रेस ने समझदारी नहीं दिखाई। वह खुद की गलती बीजेपी पर डाल रही है, यह राजनीतिक हताशा है।
यह एक निजी याचिका है जो कांग्रेस के पूर्व नेता और पूर्व ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के तारनाका से पूर्व नगर पार्षद द्वारा 2025 में हैदराबाद जिला कोर्ट में दायर की गई थी। शिकायतकर्ता पहले टीडीपी में थी फिर वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गईं।
याचिका में शिव कुमार रेड्डी, नटराजन, बी महेश कुमार गौड़, पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री वकाटी श्रीहरि और नारायणपेट विधायक चित्तेम पर्निका रेड्डी सहित सात कांग्रेस नेताओं को प्रतिवादी बनाया। इसमें शिव कुमार रेड्डी और उनके समर्थकों से अपनी जान को खतरा होने का आरोप लगाया था। उन्होंने अन्य कांग्रेस नेताओं का भी नाम लिया, क्योंकि उन्हें 'उत्पीड़न' और 'धमकियों' की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उक्त व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
याचिका में नटराजन का नाम केवल एक बार लिया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि वह तेलंगाना की एआईसीसी प्रभारी थीं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि मामले में प्रतिवादी सभी कांग्रेस नेता उन्हें मुकदमा वापस लेने के लिए धमका रहे थे। याचिका के आधार पर नटराजन को 17 सितंबर, 2025 को अदालत के समक्ष पेश होने के लिए नोटिस जारी किया।
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याचिका में शिव कुमार रेड्डी, नटराजन, बी महेश कुमार गौड़, पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री वकाटी श्रीहरि और नारायणपेट विधायक चित्तेम पर्निका रेड्डी सहित सात कांग्रेस नेताओं को प्रतिवादी बनाया। इसमें शिव कुमार रेड्डी और उनके समर्थकों से अपनी जान को खतरा होने का आरोप लगाया था। उन्होंने अन्य कांग्रेस नेताओं का भी नाम लिया, क्योंकि उन्हें 'उत्पीड़न' और 'धमकियों' की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उक्त व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
याचिका में नटराजन का नाम केवल एक बार लिया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि वह तेलंगाना की एआईसीसी प्रभारी थीं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि मामले में प्रतिवादी सभी कांग्रेस नेता उन्हें मुकदमा वापस लेने के लिए धमका रहे थे। याचिका के आधार पर नटराजन को 17 सितंबर, 2025 को अदालत के समक्ष पेश होने के लिए नोटिस जारी किया।
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